by admin@bebak24.com on | 2026-07-03 19:37:07
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क्राइम डेस्क (बेबाक24): आईटी हब बेंगलुरु से दिल को दहला देने वाला और बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। टेक पार्क में काम करने वाले आईटी प्रोफेशनल्स के मासूम बच्चों की देखभाल के लिए बने एक नामी डे-केयर सेंटर (क्रेच) में बच्चों के साथ जानवरों जैसा सुलूक किया जा रहा था। बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य केयरटेकर विजयलक्ष्मी को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपी महिला को न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया गया है।
यह सनसनीखेज मामला बेंगलुरु में स्थित दिग्गज आईटी कंपनी कैपजेमिनी (Capgemini) के कर्मचारियों के बच्चों के लिए बने डे-केयर सेंटर का है। इस मामले में कुल पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से एक की गिरफ्तारी हो चुकी है और अन्य दो महिला आरोपियों से पुलिस कड़ाई से पूछताछ कर रही है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब 26 जून 2026 को चाइल्ड हेल्पलाइन पर एक गुमनाम फोन कॉल आई। कॉल करने वाले ने आरोप लगाया कि डे-केयर सेंटर में दो-से-तीन साल से भी कम उम्र के मासूम बच्चों को केवल उनके रोने की वजह से बेरहमी से प्रताड़ित किया जा रहा है।
बेंगलुरु पूर्व जिला बाल संरक्षण इकाई के लॉ ऑफिसर तिलकेश कुमार ने मुस्तैदी दिखाते हुए कॉल करने वाले से संपर्क किया और क्रेच का सटीक पता लगाकर तफ्तीश शुरू की। जांच में जो बातें और वीडियो सामने आए, उसने सबको झंझोर कर रख दिया:
सीसीटीवी से बचने की साजिश: आरोपी केयरटेकर्स कथित तौर पर बच्चों के साथ क्रूरता की सारी हदें टॉयलेट के अंदर पार करती थीं। क्रेच के बाकी हिस्सों में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, लेकिन टॉयलेट के अंदर कैमरा न होने का फायदा उठाकर इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया जाता था।
वॉशिंग मशीन में बैठाना: सामने आए कुछ विचलित करने वाले वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि रोते हुए मासूम बच्चों को डराने और चुप कराने के लिए उन्हें वॉशिंग मशीन के ड्रम के अंदर जबरन बैठा दिया जाता था।
टॉयलेट जेट स्प्रे का टॉर्चर: बच्चों को अकेले कमरों में फर्श पर रोता छोड़ देना और उन्हें टॉयलेट में ले जाकर उनके मुंह और शरीर पर सीधे टॉयलेट जेट स्प्रे से तेज पानी डालना जैसी अमानवीय हरकतें की जाती थीं।
मामले की संवेदनशीलता और आईटी सेक्टर से जुड़े माता-पिता के भारी आक्रोश को देखते हुए बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने कड़े कदम उठाए हैं।
डीसीपी स्तर की जांच: बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए पुलिस कमिश्नर ने एक आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि की और बताया कि इस पूरे मामले की गहन जांच अब एक महिला पुलिस उपायुक्त (DCP) के नेतृत्व में की जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही इस केस में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
राष्ट्रीय बाल आयोग की एंट्री: कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष संतोष कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के दो वरिष्ठ सदस्य शुक्रवार दोपहर दिल्ली से बेंगलुरु पहुंच चुके हैं। यह टीम आईटी कंपनी के डे-केयर सेंटर का मुआयना करेगी और पीड़ित बच्चों के माता-पिता व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर कड़े एक्शन की सिफारिश करेगी।
बेंगलुरु की यह घटना सिर्फ एक क्रेच की नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमारी पूरी व्यवस्था और कॉर्पोरेट डे-केयर कल्चर पर एक बहुत बड़ा और गहरा कलंक है। महानगरों में काम करने वाले आईटी प्रोफेशनल्स और कामकाजी माता-पिता (Working Parents) अपने जिगर के टुकड़ों को भारी-भरकम फीस देकर इन डे-केयर सेंटर्स के भरोसे इस उम्मीद में छोड़ जाते हैं कि वहां उनके बच्चों को मां जैसा प्यार और सुरक्षा मिलेगी। लेकिन सीसीटीवी कैमरों की अंधाधुंध निगरानी से बचकर टॉयलेट के भीतर बच्चों को 'जेट स्प्रे से प्रताड़ित करना' और 'वॉशिंग मशीन के ड्रम में बंद करना' किसी मानसिक विक्षिप्तता और राक्षसी सोच से कम नहीं है।
'बेबाक24' बेंगलुरु पुलिस की महिला डीसीपी से मांग करता है कि गिरफ्तार विजयलक्ष्मी और इस घिनौने कृत्य में शामिल अन्य चारों आरोपियों पर ऐसी सख्त कानूनी धाराएं लगाई जाएं जो नजीर बनें। कॉर्पोरेट कंपनियों को भी सिर्फ नाम के लिए क्रेच खोलकर पल्ला नहीं झाड़ लेना चाहिए, बल्कि वहां काम करने वाले स्टाफ का कड़ा साइकॉलोजीकल टेस्ट (Psychological Test) और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन अनिवार्य होना चाहिए। आज इस घटना ने उन तमाम कामकाजी माताओं को खौफ से भर दिया है जो कल सुबह फिर अपने बच्चों को किसी क्रेच के भरोसे छोड़कर दफ्तर जाने वाली हैं। जब तक इन मासूमों को इंसाफ नहीं मिलता, बेबाक24 इस खबर पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।
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