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लखनऊ से 45 किमी दूर तैयार हुआ नियामतपुर ईको-टूरिज्म हब, अगले सत्र से मिलेगा प्रकृति का अनोखा अनुभव*

by on | 2026-07-03 22:59:12

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लखनऊ से 45 किमी दूर तैयार हुआ नियामतपुर ईको-टूरिज्म हब, अगले सत्र से मिलेगा प्रकृति का अनोखा अनुभव*

 लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मात्र 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बाराबंकी का नियामतपुर वन क्षेत्र जल्द ही प्रदेश के प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थलों में अपनी पहचान बनाने जा रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित नियामतपुर ईको-टूरिज्म परियोजना लगभग तैयार हो चुकी है। करीब 52.50 लाख रुपये की लागत से विकसित हो रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है कि अगले ईको-पर्यटन सत्र से इस स्थल को आम पर्यटकों के लिए खोल दिया जाए, जिससे प्रदेश में प्रकृति आधारित पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।


यह परियोजना केवल एक पर्यटन स्थल नहीं होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के प्रति जागरूकता और स्थानीय लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। सरकार का मानना है कि नियामतपुर ईको-टूरिज्म स्थल आने वाले वर्षों में बाराबंकी ही नहीं बल्कि पूरे अवध क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान स्थापित करेगा।


प्रकृति की गोद में मिलेगा सुकून का अहसास

नियामतपुर वन क्षेत्र को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यहां आने वाले पर्यटक शहर की भागदौड़ और प्रदूषण से दूर प्राकृतिक वातावरण में कुछ सुकून भरे पल बिता सकें। घने वृक्षों, हरियाली और शांत वातावरण के बीच विकसित यह स्थल प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरण शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और परिवारों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।


परियोजना का सबसे प्रमुख आकर्षण दो किलोमीटर लंबी नेचर ट्रेल होगी। इस विशेष पैदल भ्रमण मार्ग पर पर्यटक जंगल के प्राकृतिक वातावरण के बीच चलते हुए विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों, वनस्पतियों, पक्षियों और स्थानीय जैव विविधता को बेहद करीब से देख सकेंगे। यह अनुभव न केवल मनोरंजन प्रदान करेगा, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से भी जोड़ने का कार्य करेगा।


आधुनिक सुविधाओं से होगा बेहतर पर्यटन अनुभव

पर्यटन विभाग ने इस परियोजना को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने पर विशेष ध्यान दिया है। परिसर में आकर्षक मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण कराया गया है, जो पर्यटकों का स्वागत करेगा। इसके साथ ही आधुनिक हाट, स्वच्छ एवं व्यवस्थित शौचालय, आकर्षक सेल्फी प्वाइंट और नाले के ऊपर मजबूत ओवर ब्रिज का निर्माण भी कराया गया है।


इन सुविधाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने के साथ-साथ आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी सहज रूप से उपलब्ध हों। सरकार चाहती है कि यह स्थल परिवारों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श पर्यटन गंतव्य बने।


साइन बोर्ड बताएंगे जंगल की अनकही कहानी

नियामतपुर ईको-टूरिज्म परियोजना की एक विशेषता पूरे वन क्षेत्र में लगाए जा रहे जानकारीपूर्ण साइन बोर्ड हैं। इन बोर्डों पर विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधों, औषधीय वनस्पतियों, स्थानीय जैव विविधता और पर्यावरणीय महत्व की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।


पर्यटक जब नेचर ट्रेल पर भ्रमण करेंगे तो उन्हें केवल प्राकृतिक दृश्य ही नहीं, बल्कि वन क्षेत्र की पारिस्थितिकी और पर्यावरणीय संतुलन के बारे में भी जानकारी मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य पर्यटन को ज्ञान और जागरूकता से जोड़ना है, ताकि लोग प्रकृति संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील बन सकें।


ईको-टूरिज्म को नई पहचान देने की तैयारी

उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में ईको-टूरिज्म को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में नियामतपुर परियोजना को एक मॉडल ईको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नियामतपुर परियोजना प्रदेश में ईको-टूरिज्म की नई पहचान बनेगी और यह पर्यटकों को प्रकृति के बीच सुरक्षित, शांत और यादगार अनुभव प्रदान करेगी।


उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और प्रदेश की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। सरकार का उद्देश्य पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदाय की सहभागिता के बीच संतुलन स्थापित करना है।


स्थानीय समुदाय को मिलेगा रोजगार का लाभ

इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय लोगों को मिलने वाले रोजगार के अवसर हैं। ईको-टूरिज्म स्थल शुरू होने के बाद स्थानीय युवाओं को गाइड, सुरक्षा कर्मी, पर्यटक सहायता, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री जैसे क्षेत्रों में रोजगार मिलने की संभावना है।


इसके अतिरिक्त स्थानीय महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन और अन्य उत्पादों के माध्यम से आय बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ लोगों की आय में भी वृद्धि होगी।


वन संरक्षण और पर्यटन का संतुलित मॉडल

बाराबंकी के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) आकाश दीप बधावन ने बताया कि नियामतपुर ईको-टूरिज्म परियोजना वन संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी। उन्होंने कहा कि यहां विकसित की गई नेचर ट्रेल, ओवर ब्रिज, साइन बोर्ड और अन्य सुविधाएं पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक करेंगी।


उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना और स्थानीय समुदायों को आजीविका के स्थायी अवसर उपलब्ध कराना भी है।


अगले पर्यटन सत्र से मिलेगा नया आकर्षण

परियोजना का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य भी तेजी से अंतिम चरण में हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी निर्माण कार्य समय पर पूरे कर लिए जाएंगे ताकि अगले ईको-पर्यटन सत्र से नियामतपुर ईको-टूरिज्म स्थल आम लोगों के लिए खोल दिया जाए। इसके शुरू होने के बाद लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, सीतापुर, रायबरेली और आसपास के जिलों के लोगों को सप्ताहांत में प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए एक नया और आकर्षक पर्यटन स्थल मिलेगा।


प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर उभरेगा नया केंद्र

नियामतपुर ईको-टूरिज्म परियोजना उत्तर प्रदेश में प्रकृति आधारित पर्यटन को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, स्थानीय रोजगार और सतत पर्यटन विकास का ऐसा मॉडल बनेगी, जिससे भविष्य में प्रदेश के अन्य वन क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की योजनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।



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