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'ऑपरेशन सिंदूर' पर विवाद: राजनाथ सिंह पर संसद को गुमराह करने का आरोप, मंत्रालय की सफाई

by admin@bebak24.com on | 2026-06-27 20:58:04

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'ऑपरेशन सिंदूर' पर विवाद: राजनाथ सिंह पर संसद को गुमराह करने का आरोप, मंत्रालय की सफाई

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ की गई भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर देश में एक नया सियासी घमासान छिड़ गया है। नेशनल वॉर मेमोरियल (राष्ट्रीय समर स्मारक) पर इस ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए छह जांबाज सैनिकों के नाम दर्ज किए जाने के बाद विपक्ष ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद में झूठ बोलने और जानकारी छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है।

विपक्ष के इन तीखे हमलों के बाद रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।

1. क्या है पूरा विवाद? विपक्ष का आरोप

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए भाषण का एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए सरकार पर 'संसद को गुमराह' करने का आरोप लगाया है।

  • संसद में क्या कहा था रक्षा मंत्री ने?: पिछले साल 28 जुलाई 2025 को संसद सत्र के दौरान लोकसभा में इस ऑपरेशन पर बहस चल रही थी। तब राजनाथ सिंह ने विपक्ष को जवाब देते हुए जोर देकर कहा था, "आपको सवाल पूछना है तो ये पूछिए कि इस ऑपरेशन में क्या हमारे जांबाज़ सैनिकों को कोई क्षति पहुंची है तो उसका उत्तर है नहीं।"

  • विपक्ष का सवाल: विपक्ष का कहना है कि जब सरकार ने अब आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है कि ऑपरेशन में छह जवान शहीद हुए थे और उनके नाम वॉर मेमोरियल पर दर्ज किए गए हैं, तो रक्षा मंत्री ने संसद में 'कोई क्षति न होने' की बात क्यों कही थी?

2. रक्षा मंत्रालय ने दी सफाई: "भाषण को गलत तरीके से पेश किया गया"

बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर रक्षा मंत्री का बचाव किया है। मंत्रालय का कहना है कि:

"28 जुलाई, 2025 को संसद में दिए गए रक्षा मंत्री के भाषण को गलत संदर्भ में और तोड़-मरोड़ कर दिखाने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने कभी भी अपने वीर जवानों की शहादत को नहीं छिपाया है।"

3. क्या था 'ऑपरेशन सिंदूर'?

  • पहलगाम हमला: पिछले साल 22 अप्रैल (2025) को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बड़ा चरमपंथी हमला हुआ था, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी।

  • भारत का कड़ा प्रहार: इस कायरतापूर्ण हमले के जवाब में भारतीय सेना ने मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चार दिनों तक एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया, जिसे 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया।

  • दोनों तरफ का नुकसान: अब भारत सरकार ने इस ऑपरेशन में सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह भारतीय सैनिकों के नामों को सार्वजनिक कर सम्मान दिया है। वहीं, पिछले साल पाकिस्तानी सेना ने भी माना था कि इस सैन्य संघर्ष के दौरान उसके 11 जवान (7 थलसेना और 4 वायुसेना) मारे गए थे।

बेबाक24 टेक

'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ (मई 2026) के ठीक एक महीने बाद इस मुद्दे का दोबारा गरमाना दिखाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों पर भी देश में कितनी भारी राजनीतिक अविश्वास की स्थिति है। एक तरफ जहां भारतीय सेना ने पाकिस्तान को उसकी सरजमीं पर घुसकर करारा जवाब दिया और उसके 11 जवानों को ढेर किया, वहीं दूसरी तरफ छह भारतीय जांबाजों की शहादत की टाइमिंग को लेकर रक्षा मंत्री का पुराना बयान अब उनके गले की फांस बन गया है।

रक्षा मंत्रालय भले ही कह रहा हो कि बयान को गलत तरीके से पेश किया गया, लेकिन जब मामला संसद के रिकॉर्ड का हो, तो 'कोई क्षति नहीं पहुंची' जैसे सीधे वाक्य पर विपक्ष का आक्रामक होना स्वाभाविक है। मुमकिन है कि जुलाई 2025 में जब रक्षा मंत्री ने यह बयान दिया था, तब तक सैन्य गोपनीयता या रणनीतिक कारणों से हताहतों के आंकड़े सार्वजनिक न किए गए हों। लेकिन लोकतंत्र में पारदर्शिता सबसे अहम है; हमारे शहीदों का बलिदान सर्वोच्च है और उनके नाम समर स्मारक पर गर्व से दर्ज हैं। सरकार को इस तकनीकी विरोधाभास पर संसद के पटल पर एक स्पष्ट टाइमलाइन रखनी चाहिए, ताकि देश की सुरक्षा और जवानों की शहादत पर कोई राजनीतिक कीचड़ न उछल सके।



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