by admin@bebak24.com on | 2026-07-03 19:02:45
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अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच अब एक नया और बेहद खतरनाक मोर्चा खुलता नजर आ रहा है। तुर्की और इसराइल के बीच कूटनीतिक और जुबानी जंग अब सीधे सैन्य टकराव की आशंकाओं में तब्दील होने लगी है। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने इसराइल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि "इसराइल इस समय दुनिया में एक नए दुश्मन की तलाश में है, लेकिन तुर्की अपने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए किसी से डरने, हिचकिचाने या पीछे हटने वाला नहीं है।"
सीएनएन तुर्क (CNN Türk) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में हकान फ़िदान ने साफ किया कि अगर बात सैन्य टकराव तक पहुंचती है, तो तुर्की इसके लिए पूरी तरह तैयार है। दूसरी तरफ, इसराइली रक्षा प्रतिष्ठानों और खुफिया एजेंसियों में तुर्की को लेकर चिंताएं इतनी गहरी हो गई हैं कि इसराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने पूर्वी भूमध्यसागर में तुर्की के विशाल नौसैनिक बेड़े का सामना करने के लिए अपनी नौसेना को अपग्रेड करना शुरू कर दिया है।
तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने इसराइल की नीतियों को पूरी दुनिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संकट बताया। उन्होंने वैश्विक समुदाय से इसराइल पर कड़े कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग की।
अर्दोआन अकेले जो सच बोल रहे हैं: फ़िदान ने कहा, "इसराइल सिर्फ तुर्की या राष्ट्रपति अर्दोआन की समस्या नहीं है, यह पूरी मानवता की समस्या है। फर्क सिर्फ इतना है कि हमारे राष्ट्रपति बंद कमरों में फुसफुसाने के बजाय खुलकर गलत को गलत कह रहे हैं।"
टकराव से गुरेज नहीं: उन्होंने स्पष्ट किया कि तुर्की को इसराइल के साथ किसी भी स्तर के टकराव से कोई समस्या नहीं है और अंकारा अपने कदमों से पीछे नहीं हटेगा।
प्रतिबंधों की मांग: फ़िदान ने दुनिया के अन्य देशों से आह्वान किया कि वे मूकदर्शक बने रहने के बजाय आगे आएं और इसराइल पर कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू करें।
हकान फ़िदान के इस बयान के बाद यरूशलम और तेल अवीव में हड़कंप मच गया है। इसराइल के विदेश राज्य मंत्री गिडियोन सार ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, "यहूदियों को 'असहनीय बोझ' बताकर उनका अमानवीयकरण करना इतिहास के सबसे भयावह और विनाशकारी नाजी शासन तंत्रों की क्लासिक भाषा है। नेटो (NATO) सहयोगियों को इसराइल को मिटाने की इस तुर्की अपील की कड़ी निंदा करनी चाहिए।"
ईरान की जगह लेने की कोशिश: मशहूर इसराइली पत्रकार मारियो नावफल के अनुसार, हमास और हिज़्बुल्लाह के कमजोर होने के बाद तुर्की अब क्षेत्र में ईरान की जगह मुख्य इसराइल-विरोधी ताकत के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।
इस्लामवाद और नव-ऑटोमनवाद: चैनल 14 के डिप्लोमैटिक संवाददाता तमिर मोराग ने लिखा कि इसराइल का शीर्ष राजनीतिक और रक्षा नेतृत्व तुर्की को लंबे समय से अगले सबसे बड़े खतरे के रूप में देख रहा है। यह केवल तात्कालिक गुस्सा नहीं, बल्कि अर्दोआन प्रशासन की 'नव-ऑटोमन साम्राज्य' (Neo-Ottomanism) की गहरी वैचारिक सोच का हिस्सा है।
तुर्की से पैदा होने वाले इस रणनीतिक खतरे को भांपते हुए प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के सीधे समर्थन से इसराइल ने अपनी सैन्य तैयारियों की दिशा बदल दी है:
रणनीतिक नौसैनिक बेड़ा: इसराइल अपनी पारंपरिक छोटी और मुख्यतः रक्षात्मक भूमिका वाली नौसेना को एक विशाल रणनीतिक समुद्री ताकत में बदलने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि पूर्वी भूमध्यसागर (Eastern Mediterranean) में तुर्की के विशाल और अत्याधुनिक नौसैनिक बेड़े का मुकाबला किया जा सके।
F-35 लड़ाकू विमानों पर घेराबंदी: इसराइल अमेरिका के जरिए हर संभव कूटनीतिक दबाव बना रहा है कि तुर्की को अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II लड़ाकू जेट विमान किसी भी कीमत पर न मिलें। इसराइल को डर है कि अगर तुर्की को ये फिफ्थ-जनरेशन विमान मिले, तो भूमध्यसागर के आसमान में इसराइली वायुसेना (IAF) का एकछत्र दबदबा खत्म हो जाएगा।
जॉर्जटाउन और तेल अवीव यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ योसी शाइन के मुताबिक, ईरान युद्ध के बाद पैदा हुई अनिश्चितता का तुर्की पूरा फायदा उठा रहा है। खाड़ी देश भी अमेरिका के साथ अपने संबंधों की समीक्षा कर रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगले सप्ताह तुर्की नेटो (NATO) के 32 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के महासम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हो रहे हैं। इसराइल को डर है कि तुर्की इस वैश्विक मंच का इस्तेमाल गाजा और मिडिल ईस्ट में इसराइल को पूरी दुनिया के सामने 'जनसंहार करने वाला देश' घोषित कराने के लिए करेगा।
इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने इसी साल फरवरी में सुरक्षा सम्मेलन में एक बेहद चौंकाने वाली चेतावनी दी थी, जो अब सच होती दिख रही है। बेनेट ने कहा था कि इस इलाके में इसराइल को घेरने के लिए एक बेहद खतरनाक धुरी बन रही है:
बेनेट ने आगाह किया था कि वर्तमान नेतन्याहू सरकार इस मोर्चे पर सो रही है, जबकि हमारी सीमाओं पर 'पाकिस्तानी परमाणु हथियारों' के वैचारिक समर्थन और तुर्की के आक्रामक नेतृत्व वाली एक नई मुस्लिम ब्रदरहुड धुरी खड़ी हो चुकी है।
पश्चिम एशिया का युद्ध अब एक ऐसे मुहाने पर पहुंच चुका है जहां परमाणु महाविनाश की गूंज साफ सुनाई दे रही है। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान का यह बयान कि 'तुर्की को टकराव से कोई समस्या नहीं है', कोई मामूली राजनीतिक बयानबाजी नहीं है। तुर्की दुनिया की सबसे आधुनिक और बड़ी सेनाओं में से एक है और वह नेटो (NATO) का एक बेहद महत्वपूर्ण सदस्य है। ईरान के साथ चल रहे युद्ध में इसराइल पहले ही अपनी काफी सैन्य और आर्थिक ताकत झोंक चुका है, ऐसे में तुर्की जैसी महाशक्ति से सीधा पंगा लेना इसराइल के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा जुआ साबित हो सकता है।
'बेबाक24' यहां इसराइल की उस छटपटाहट को रेखांकित करना चाहता है, जिसके तहत वह अब अपनी नौसेना को अपग्रेड कर रहा है और अमेरिका से मिन्नतें कर रहा है कि तुर्की को F-35 विमान न दिए जाएं। पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट का यह दावा कि तुर्की के पीछे 'पाकिस्तानी परमाणु बम' का वैचारिक समर्थन है, इस पूरे नैरेटिव को बेहद डरावना बना देता है। अगर अगले हफ्ते तुर्की में होने वाली नेटो समिट में राष्ट्रपति अर्दोआन ने डोनाल्ड ट्रंप के सामने इसराइल के खिलाफ घेराबंदी मजबूत कर ली, तो अमेरिका के लिए अपने दो सबसे बड़े सहयोगियों (इसराइल और नेटो सदस्य तुर्की) के बीच चुनाव करना असंभव हो जाएगा। मिडिल ईस्ट में अब केवल गाजा या लेबनान का मुद्दा नहीं बचा है, बल्कि यह 'ऑटोमन साम्राज्य' की पुरानी महत्त्वाकांक्षाओं और इसराइल के वजूद के बीच की अंतिम जंग की तरफ बढ़ रहा है।
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