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रूस-यूक्रेन युद्ध का सबसे बड़ा 'ट्विस्ट': दुनिया को तेल बेचने वाला रूस खुद भीषण तेल संकट में घिरा, भारत और बेलारूस से पेट्रोल आयात करने की आई नौबत

by admin@bebak24.com on | 2026-07-03 09:32:15

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रूस-यूक्रेन युद्ध का सबसे बड़ा 'ट्विस्ट': दुनिया को तेल बेचने वाला रूस खुद भीषण तेल संकट में घिरा, भारत और बेलारूस से पेट्रोल आयात करने की आई नौबत

अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): भू-राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार से इस समय की सबसे हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे बड़े तेल और ऊर्जा उत्पादक देशों में शुमार रूस आज खुद अभूतपूर्व ईंधन संकट (Fuel Crisis) से जूझ रहा है। आलम यह है कि मॉस्को से लेकर साइबेरिया तक के पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की मीलों लंबी कतारें लगी हैं, तेल की राशनिंग शुरू हो चुकी है और कई जगहों पर तेल खत्म होने के कारण पेट्रोल पंप पूरी तरह खाली हो चुके हैं।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स और एपी के अनुसार, कई दशकों में पहली बार रूस को अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत और अपने पड़ोसी देश बेलारूस से समुद्री व रेल मार्ग के जरिए पेट्रोल आयात (Import) करना पड़ रहा है।

1. कैसे शुरू हुआ यह महा-संकट? यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने तोड़ी कमर

हमेशा से कच्चे तेल का शुद्ध निर्यातक रहे रूस की इस हालत के पीछे यूक्रेन की बदली हुई सैन्य रणनीति है। अमेरिकी अखबार 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन ने रूस के आर्थिक तंत्र और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अब तक के सबसे घातक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

संकट के मुख्य कारण:

  • मारकर क्षमता में इजाफा: यूक्रेनी ड्रोन अब रूस के बहुस्तरीय एयर डिफेंस (Air Defense) को भेदते हुए 1,200 मील दूर साइबेरिया के ट्यूमेन जैसी सुदूर रिफाइनरियों को भी मटियामेट कर रहे हैं।

  • 28% रिफाइनिंग क्षमता ठप: बर्लिन स्थित कार्नेगी रशिया यूरेशिया सेंटर के वरिष्ठ फेलो सर्गेय वकुलेंको (पूर्व रणनीति प्रमुख, गज़प्रोम नेफ्ट) के अनुसार, 20 जून 2026 तक रूस की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह बंद हो चुका है।

  • मॉस्को रिफाइनरी तबाह: 18 जून को हुए एक बड़े हमले में मॉस्को की मुख्य रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा, जो अकेले राजधानी क्षेत्र की 40% ईंधन जरूरत पूरा करती थी। इसकी मरम्मत में कम से कम 3 महीने का समय लगेगा।

2. भारतीय तेल पर निर्भर हुआ मॉस्को; भेजे गए हजारों टन के टैंकर

इस संकट की सबसे बड़ी और दिलचस्प कड़ी भारत से जुड़ी है। युद्ध की शुरुआत से जो भारत रूस से भारी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल (Crude Oil) खरीद रहा था, आज वही भारत रूस को रिफाइंड पेट्रोल की सप्लाई कर रहा है।

  • 60,000 मीट्रिक टन की सप्लाई: रॉयटर्स ने उद्योग जगत के सूत्रों के हवाले से पुष्टि की है कि भारत से समुद्री मार्ग के जरिए कम से कम 60,000 मीट्रिक टन पेट्रोल रूस भेजा जा चुका है

  • टैंकर हुए रवाना: 30,000 से 40,000 टन की क्षमता वाले दो विशालकाय भारतीय तेल टैंकर रूस के लिए रवाना किए गए हैं। रूस हर महीने विभिन्न देशों से कुल 4 लाख टन पेट्रोल आयात करने का प्लान बना रहा है।

  • बेलारूस ने भी बढ़ाई मदद: रूस का पड़ोसी देश बेलारूस भी रेल मार्ग के जरिए पेट्रोल की आपूर्ति को तीन गुना बढ़ाकर 70,000 टन से अधिक कर चुका है।

क्रेमलिन का कबूलनामा: क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि कई दशकों में पहली बार रूस ईंधन आयात शुरू करने के लिए मित्र देशों के साथ स्वीकार्य कीमतों पर बातचीत कर रहा है।

3. जमीन पर हाहाकार: साइबेरिया में लगे पोर्टेबल टॉयलेट, 'अल्टीमेट लग्जरी 2026'

रूस में गर्मियों के इस मौसम में पेट्रोल की दैनिक खपत कम से कम 1,10,000 टन होती है, लेकिन वास्तविक कमी के कारण आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है:

  • लॉजिस्टिक फेलियर: विश्लेषक क्रिस वीफर के मुताबिक, रूस के पास तेल भंडार केवल 4% कम है, लेकिन विशाल भूगोल के कारण तेल सही जगह पर नहीं है। ईंधन को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में हफ्तों का समय लग रहा है।

  • किसान और आम जनता परेशान: अनाज उत्पादक क्षेत्रों के किसान फसल की कटाई को लेकर चिंतित हैं। सोशल मीडिया पर ड्राइवरों के बीच पेट्रोल के लिए मारपीट के वीडियो आ रहे हैं।

  • "द अल्टीमेट लग्ज़री 2026": सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें एक रूसी नागरिक मज़ाक उड़ाते हुए जेरी कैन से अपने लॉनमूवर में पेट्रोल डालते हुए कह रहा है— "क्या दौलत है! अब इसे खरीदने की हैसियत किसकी है?"

  • किर्गिस्तान पर भी संकट: किर्गिस्तान जैसे देश जो अपनी 90% तेल जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर थे, अब कजाकिस्तान और अज़रबैजान से मदद की भीख मांग रहे हैं।

बेबाक24 टेक

भू-राजनीति के चक्रव्यूह का इससे सटीक उदाहरण दूसरा नहीं हो सकता। इतिहास खुद को किस तरह दोहराता है, यह आज पूरी दुनिया देख रही है। 2022 में जब यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ, तब रूस ने यूरोप की गैस और तेल सप्लाई रोकने की धमकी देकर पूरी दुनिया को घुटनों पर लाने का प्रयास किया था। लेकिन आज 2026 में पासा पूरी तरह पलट चुका है। यूक्रेन ने अग्रिम मोर्चे पर सीधे लड़ने के बजाय रूस की दुखती रग यानी उसके 'ऑयल रिफाइनरी इंफ्रास्ट्रक्चर' पर ड्रोन से सर्जिकल स्ट्राइक शुरू की, जिसका नतीजा आज रूस के पेट्रोल पंपों पर दिख रहा है। 28% रिफाइनिंग क्षमता का ध्वस्त होना किसी भी महाशक्ति के लिए एक आर्थिक और रणनीतिक पैरालिसिस (लकवा) जैसा है।

'बेबाक24' इस पूरे संकट में भारत की 'साइलेंट डिप्लोमेसी' और कूटनीतिक चतुरता की दाद देता है। भारत सरकार ने इस मामले पर आधिकारिक रूप से भले ही चुप्पी साध रखी है, लेकिन रॉयटर्स की यह रिपोर्ट कि भारत से 60,000 टन पेट्रोल मॉस्को भेजा गया है, यह दिखाता है कि भारत अब केवल एक 'क्रेता' (Buyer) नहीं बल्कि वैश्विक संकटों को मैनेज करने वाला 'सप्लायर' बन चुका है। भारत रूस से ही सस्ता कच्चा तेल खरीदता है, उसे अपनी रिलायंस और जामनगर जैसी रिफाइनरियों में रिफाइंड करता है और अब उसी रिफाइंड तेल को वापस रूस को ऊंचे दामों पर बेच रहा है। व्लादिमीर पुतिन के लिए यह युद्ध अब केवल यूक्रेन की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रूस के आंतरिक बजट और जनता के सब्र की परीक्षा बन चुका है। अगर मॉस्को रिफाइनरी 3 महीने तक शुरू नहीं हुई, तो रूसी सेना के टैंकों और विमानों के लिए डीजल-पेट्रोल जुटाना पुतिन के लिए सबसे टेढ़ी खीर साबित होने वाला है।



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