by on | 2026-07-02 16:08:21
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अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी महायुद्ध के बीच ईरान ने एक बार फिर अमेरिका और इजरायल को बेहद गंभीर और खुली सैन्य चेतावनी दी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर घोषणा की है कि वह अपने सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के 'खून का बदला' निश्चित तौर पर और हर कीमत पर लेगी।
बीबीसी की फारसी सेवा के अनुसार, ईरानी मीडिया ने सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाकर ज़ोलक़द्र के हस्ताक्षरित संदेश को सार्वजनिक किया है, जिसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर भी जारी किया गया है। इस बयान के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है।
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के पहले विनाशकारी हमले (28 फरवरी 2026) में सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत हो गई थी। इस हमले में उनके साथ कई अन्य शीर्ष ईरानी सैन्य अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य भी मारे गए थे।
अडिग तेवर: सुरक्षा परिषद के सचिव बाक़र ज़ोलक़द्र ने संदेश में साफ किया है कि ईरान अपने सर्वोच्च नेता की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देगा और इसके अपराधियों (अमेरिका और इजरायल) से निश्चित तौर पर बदला लिया जाएगा।
अंतिम संस्कार का कार्यक्रम: बीबीसी फारसी के मुताबिक, अली ख़ामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह 4 से 8 जुलाई (2026) तक ईरान के तीन प्रमुख और पवित्र शहरों— तेहरान, क़ोम और मशहद में आयोजित किया जाएगा, जहां लाखों की भीड़ जुटने की उम्मीद है।
इराक में भी शोक सभाएं: ईरान के अलावा, शिया बहुल देश इराक के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक शहरों— बग़दाद, काज़मिन, कर्बला और नजफ़ में भी बड़े पैमाने पर शोक सभाएं आयोजित की जाएंगी, जो इस संकट को पूरे क्षेत्र में फैला सकती हैं।
यह धमकी भरा बयान ऐसे समय पर आया है जब अभी कुछ ही घंटों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोहा में चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता को "सकारात्मक" बताया था। ईरान की ओर से आए इस तीखे बयान ने कूटनीतिक गलियारों में नया सस्पेंस पैदा कर दिया है:
एक तरफ कूटनीति, दूसरी तरफ युद्ध: ईरान का यह रुख दिखाता है कि वह अपनी घरेलू जनता और शिया समर्थक मिलिशिया (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) के सामने कमजोर नहीं दिखना चाहता।
प्रतिबंधों और दबाव का जवाब: अमेरिकी 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति के बावजूद ईरान अपनी रक्षात्मक और आक्रामक रणनीति से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या आधुनिक इतिहास में पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट (मोड़) है। 1989 से ईरान की सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति का इस तरह अमेरिकी-इजरायली हमले में मारा जाना ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा सुरक्षा ब्लंडर और अपमान है। ऐसे में सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा "बदले" का राग अलापना बेहद स्वाभाविक है; इसके बिना ईरान की नई अंतरिम सरकार अपनी जनता और अपने प्रॉक्सी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह और हूती) के बीच अपनी साख नहीं बचा सकती।
लेकिन 'बेबाक24' इस घटनाक्रम को एक अलग और पैनी कूटनीतिक नजर से देख रहा है। एक तरफ जहां ईरान कतर में अमेरिका के साथ टेबल के नीचे 60 दिनों के युद्धविराम और अपने 6 अरब डॉलर के फ्रीज फंड को छुड़ाने के लिए 'सकारात्मक' बातचीत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह 'खून का बदला' लेने के पोस्टर जारी कर रहा है। यह ईरान की 'ट्विन-ट्रैक डिप्लोमेसी' (दोहरी रणनीति) है। 4 से 8 जुलाई के बीच होने वाला अंतिम संस्कार केवल एक शोक सभा नहीं होगा, बल्कि यह ईरान के सैन्य शक्ति प्रदर्शन का मंच बनेगा। इराक के कर्बला और नजफ जैसे शहरों में शोक सभाएं आयोजित करवाकर ईरान पूरे मिडिल ईस्ट के शिया समुदाय को लामबंद (Mobilize) कर रहा है। ट्रंप प्रशासन को यह समझना होगा कि दोहा की शांति वार्ता तब तक कागजी रहेगी, जब तक कि ख़ामेनेई की मौत के प्रतिशोध की यह सुलगती आग शांत नहीं होती। यदि 8 जुलाई के बाद ईरान या उसके समर्थकों ने इजरायल पर कोई बड़ा पलटवार किया, तो यह तथाकथित शांति वार्ता पूरी तरह जमींदोज हो जाएगी।
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