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अपराध पर ‘कमिश्नर राज’ का कड़ा हंटर: श्रावण से पहले बनारस पुलिस में बड़ा फेरबदल, लापरवाह नपे, एक्शन में खाकी!

by on | 2026-07-04 09:13:23

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अपराध पर ‘कमिश्नर राज’ का कड़ा हंटर: श्रावण से पहले बनारस पुलिस में बड़ा फेरबदल, लापरवाह नपे, एक्शन में खाकी!

​वाराणसी। श्रावण मास की शुरुआत से ठीक पहले वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में एक बड़ा प्रशासनिक जलजला आया है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने साफ कर दिया है कि बनारस में 'नो-नॉनसेन्स' की नीति चलेगी। ढीली कानून-व्यवस्था, पेंडिंग फाइलें और अपराध पर सुस्ती दिखाने वाले पुलिसवालों की अब खैर नहीं है। एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक के बाद पुलिस कमिश्नर ने लापरवाही के आरोप में सिंधौरा इंस्पेक्टर को सीधे लाइन हाजिर कर दिया, तो वहीं जैतपुरा के सरैयां चौकी प्रभारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर महकमे में तहलका मचा दिया है।


​सिंडिकेट और सुस्ती पर सीधे वार: सिंधौरा थाना प्रभारी लाइन हाजिर


​मामला थाना सिंधौरा क्षेत्र का है, जहां बीती 2 जुलाई को एक चर्चित हत्या की वारदात हुई थी। इस संवेदनशील मामले में कोई प्रभावी या अपेक्षित कार्रवाई न होने को पुलिस कमिश्नर ने प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही माना। नतीजा?


​बड़ा एक्शन: थाना प्रभारी सिंधौरा, निरीक्षक ज्ञानेन्द्र कुमार त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर (लाईन हाजिर) कर दिया गया।


​नई कमान: सिगरा थाने के नगर निगम चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक पंकज कुमार को प्रमोट कर सिंधौरा का नया थानाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।


​फाइलों पर 'कुंडली' मारकर बैठने का अंजाम: दरोगा सस्पेंड


​क्राइम कंट्रोल में सबसे बड़ी बाधा बनती है ढुलमुल विवेचना। जैतपुरा थाने के सरैयां चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक सत्यदेव गुप्ता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है।


​800 से 1000 दिनों की सुस्ती: दरोगा जी के पास पांच ऐसी विवेचनाएं थीं जो 60 से 90 दिन की तय सीमा से काफी ऊपर निकल चुकी थीं। कुछ केस तो 800 से लेकर 1000 दिनों से धूल फांक रहे थे। कमिश्नर ने इस अकर्मण्यता पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें सीधे निलंबित (सस्पेंड) कर दिया।



​सीपी मोहित अग्रवाल का 'सुपर सिक्स' अल्टीमेटम


​बैठक में पुलिस कमिश्नर ने वाराणसी के सभी राजपत्रित अधिकारियों और थाना प्रभारियों को दो टूक शब्दों में कड़े निर्देश जारी किए हैं:


​विवेचना की 'डेडलाइन': सामान्य अपराधों की विवेचना हर हाल में 60 दिन और जघन्य (गंभीर) अपराधों की 90 दिन के भीतर पूरी होनी चाहिए।


​माफियाओं पर 'चक्रव्यूह': संगठित अपराध, माफिया, साइबर फ्रॉड, एनडीपीएस (ड्रग्स) तस्करों और गोवध में लिप्त अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट, एनएसए (रासुका) और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई में कोई ढील न बरती जाए।


​24 घंटे में खुलासा: चोरी और नकबजनी जैसी घटनाओं पर पुलिस तत्काल एक्टिव हो और 24 घंटे के भीतर वारदात का खुलासा करने की कोशिश करे।


​कांवड़ियों की सुरक्षा और सम्मान: आगामी श्रावण मास को लेकर निर्देश दिया गया कि कांवड़ यात्रियों के साथ पुलिस का व्यवहार बेहद सम्मानजनक होना चाहिए। यातायात सुगम हो और संवेदनशील इलाकों पर ड्रोन व खुफिया नजर रखी जाए।


​अफवाहबाजों पर 'डिजिटल स्ट्राइक': सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाने वालों को चिन्हित कर तुरंत जेल भेजा जाए।


​ बेबाक 24' का नज़रिया


​पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल का यह एक्शन उन पुलिसकर्मियों के लिए एक खुली चेतावनी है जो ड्यूटी को 'टाइमपास' समझते हैं। बनारस जैसे अति-संवेदनशील और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में, जहां लाखों की संख्या में कांवड़िए आने वाले हैं, वहां पुलिसिंग में ऐसी लापरवाही किसी बड़े खतरे को दावत दे सकती थी। थानों की कुर्सियों पर बैठकर केवल 'आश्वासन' का खेल खेलने वाले अफसरों को समझ जाना चाहिए कि अब बनारस की कानून-व्यवस्था 'एक्शन मोड' में आ चुकी है। या तो काम करिए, या फिर लाइन-हाजिर और सस्पेंशन झेलने के लिए तैयार रहिए!





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