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अयोध्या के बाद काशी में मचेगा हड़कंप? विश्वनाथ मंदिर के 'खजाने' पर उठे सवाल!

by on | 2026-07-04 09:06:33

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अयोध्या के बाद काशी में मचेगा हड़कंप? विश्वनाथ मंदिर के 'खजाने' पर उठे सवाल!

वाराणसी। अयोध्या के श्री राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विवाद की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद राय ने सीधे तौर पर काशी विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन को निशाने पर ले लिया है। उन्होंने वाराणसी के जिलाधिकारी (DM) को पत्र लिखकर मंदिर के ट्रस्टियों और कर्मचारियों की अकूत संपत्ति और आय की जांच कराने की मांग कर दी है।

"जब नीयत साफ है, तो हिसाब देने में डर कैसा? प्राइवेट हाथों में बाबा का चढ़ावा क्यों?" — ये वो कड़वा सवाल है जो इस समय वाराणसी के प्रशासनिक गलियारों में गूंज रहा है।

​ चढ़ावे की गिनती पर 'प्राइवेट' पहरा क्यों? भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप!

​अधिवक्ता नित्यानंद राय ने जो आरोप लगाए हैं, वो बेहद गंभीर और हैरान करने वाले हैं। उनके मुताबिक:

भ्रष्टाचार का गढ़: विश्वनाथ धाम का प्रबंधन पूरी तरह से भ्रष्टाचार की चपेट में है।


प्राइवेट कर्मियों पर भरोसा क्यों?: बाबा के दरबार में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे और चंदे की गिनती सरकारी कर्मचारियों के बजाय प्राइवेट लोगों से कराई जा रही है, जो पूरी तरह से संदेहास्पद है।


सुप्रीम कोर्ट के नियमों की अनदेखी: आरोप है कि मंदिर का 'बोर्ड ऑफ ट्रस्टी' सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप गठित नहीं है और न ही इनकी नियमित बैठकें होती हैं।


अपारदर्शी व्यवस्था: चढ़ावे की रकम को लेकर कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। सब कुछ गुपचुप तरीके से चल रहा है।


​ 5 साल का खंगाला जाए 'कच्चा चिट्ठा'

​नित्यानंद राय ने सीधे तौर पर मांग की है कि मंदिर प्रबंधन में जो लोग सालों से एक ही मलाईदार पद पर जमे हुए हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि:

​पिछले 5 वर्षों से मंदिर प्रबंधन से जुड़े छोटे-बड़े और प्राइवेट, सभी कर्मचारियों और ट्रस्टियों की आय की सघन जांच हो।


​प्रबंधन से जुड़े हर अधिकारी और कर्मचारी का नाम और पता सार्वजनिक किया जाए।


​ 'VIP दर्शन' का ढोंग बंद हो, लाइव हो सीसीटीवी!

​बात सिर्फ चढ़ावे तक सीमित नहीं है। अधिवक्ता ने मंदिर में चल रहे 'VIP दर्शन' के खेल पर भी तगड़ा प्रहार किया है।

दलालों का बोलबाला: 'स्पर्श दर्शन' और 'सुगम दर्शन' के नाम पर श्रद्धालुओं की जेबें काटी जा रही हैं। पुलिस और सिक्योरिटी कर्मी भी इस मिलीभगत में शामिल हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ 'खानापूर्ति' होती है।


आर-पार की मांग: विश्वनाथ धाम के चारों प्रवेश द्वारों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को लाइव और सार्वजनिक किया जाए ताकि दलालों और भ्रष्ट कर्मियों का चेहरा बेनकाब हो सके। इसके साथ ही, आम श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव करने वाली VIP दर्शन व्यवस्था को तुरंत और पूरी तरह से बंद किया जाए।


बेबाक 24' का नज़रिया:

​आस्था के सबसे बड़े केंद्रों पर अगर पारदर्शिता की कमी होगी, तो भक्तों का भरोसा टूटना लाजमी है। अगर अधिवक्ता के आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह बाबा के भक्तों के साथ बहुत बड़ा छल है। अब देखना यह है कि वाराणसी प्रशासन इस पत्र पर क्या एक्शन लेता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। हम आंखें मूंदकर नहीं बैठेंगे, हर अपडेट आप तक बेबाकी से पहुंचाते रहेंगे।



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