by admin@bebak24.com on | 2026-07-02 16:14:00
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अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगने के महज एक दिन बाद, मशहूर लेखिका ई. जीन कैरोल (E. Jean Carroll) ने न्यूयॉर्क की एक अदालत से अपील की है कि वह डोनाल्ड ट्रंप को जूरी द्वारा तय किए गए 50 लाख डॉलर (लगभग 41 करोड़ रुपये) के हर्जाने का तत्काल भुगतान करने का आदेश दे।
यह मामला लगभग तीन साल पुराना है, जिसमें एक दीवानी (सिविल) मुकदमे के दौरान जूरी ने ट्रंप को लेखिका कैरोल का यौन उत्पीड़न करने और बाद में उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर उनकी मानहानि करने का दोषी पाया था। ट्रंप ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दोबारा सुनवाई (Retrial) की याचिका दायर की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है।
82 वर्षीय ई. जीन कैरोल, जो अतीत में एक प्रतिष्ठित पत्रिका में स्तंभकार (Columnist) रह चुकी हैं, उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप पर दो मुख्य आरोप लगाए थे:
ट्रायल रूम में उत्पीड़न: कैरोल का आरोप था कि 1990 के दशक के मध्य (Mid-1990s) में मैनहैटन स्थित एक आलीशान 'बर्गडॉर्फ गुडमैन डिपार्टमेंट स्टोर' के चेंजिंग/ट्रायल रूम में डोनाल्ड ट्रंप ने उनका यौन उत्पीड़न किया था।
सोशल मीडिया पर मानहानि: कैरोल ने जब इस घटना का सार्वजनिक खुलासा किया, तो साल 2022 में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक पोस्ट के जरिए इन आरोपों को पूरी तरह "झूठा, मनगढ़ंत और एक बड़ा घोटाला" करार दिया था। कैरोल ने इस बयान को अपनी साख पर हमला बताते हुए मानहानि का केस ठोक दिया था।
मई 2023 में इस मामले की सुनवाई के बाद न्यूयॉर्क की एक जूरी ने कैरोल के दावों को सही माना था और डोनाल्ड ट्रंप को हर्जाना देने का आदेश सुनाया था।
| अदालत/जूरी का आदेश | डोनाल्ड ट्रंप का कूटनीतिक व कानूनी स्टैंड |
| 50 लाख डॉलर का जुर्माना: जूरी ने यौन उत्पीड़न के लिए 20 लाख डॉलर और मानहानि (साख को नुकसान पहुंचाने) के लिए 30 लाख डॉलर का हर्जाना तय किया। | आरोपों से पूरी तरह इनकार: ट्रंप शुरुआत से ही इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं। उनका कहना है कि वे कैरोल को जानते तक नहीं हैं। |
| सुप्रीम कोर्ट का रुख: ट्रंप ने जूरी के फैसले को चुनौती देते हुए मामले की दोबारा सुनवाई की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया। | अपील खारिज होने का असर: अब ट्रंप के पास इस दीवानी मामले में बचने के कानूनी रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं और उन्हें यह राशि चुकानी ही होगी। |
डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति जरूर हैं, लेकिन अमेरिकी न्याय प्रणाली ने एक बार फिर यह साबित किया है कि कानून के सामने सत्ता का शीर्ष पद भी बौना है। एक सिटिंग प्रेसिडेंट (वर्तमान राष्ट्रपति) के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा याचिका खारिज होना और एक महिला के पक्ष में जूरी के वित्तीय हर्जाने के आदेश को बरकरार रखना, अमेरिकी लोकतंत्र की संस्थागत स्वतंत्रता को दर्शाता है।
'बेबाक24' इस मामले को ट्रंप की 'अजेय' राजनीतिक छवि पर एक बड़े नैतिक दाग के रूप में देखता है। ट्रंप अपनी रैलियों में खुद को अक्सर कानून से ऊपर या 'राजनैतिक बदले की भावना' (Witch Hunt) का शिकार बताते हैं, लेकिन यह फैसला किसी क्रिमिनल केस का नहीं बल्कि एक सिविल जूरी का है, जहां तथ्यों और चश्मदीदों के आधार पर फैसला हुआ है। 82 वर्षीय ई. जीन कैरोल की यह कानूनी जीत दुनिया भर की उन महिलाओं के लिए एक मिसाल है जो दशकों बाद भी शक्तिशाली पुरुषों के खिलाफ आवाज उठाने का साहस करती हैं। ट्रंप प्रशासन भले ही वैश्विक मंच पर बड़े-बड़े कूटनीतिक सौदे कर रहा हो, लेकिन घरेलू मोर्चे पर राष्ट्रपति का एक 'प्रमाणित यौन उत्पीड़क' के रूप में हर्जाना देना उनकी वैश्विक साख और नैतिकता को गंभीर ठेस पहुंचाता है। अब देखना यह होगा कि ट्रंप इस राशि का भुगतान शालीनता से करते हैं या इसे भी एक राजनीतिक ड्रामे में तब्दील करने की कोशिश करेंगे।
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