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बस्तर में लाल आतंक पर सुरक्षाबलों का बड़ा प्रहार; सुकमा-बीजापुर मुठभेड़ में 14 नक्सली ढेर

by on | 2026-01-03 16:03:14

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बस्तर में लाल आतंक पर सुरक्षाबलों का बड़ा प्रहार; सुकमा-बीजापुर मुठभेड़ में 14 नक्सली ढेर


जगदलपुर/रायपुर | 

छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर इलाके में शनिवार को सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशनों में से एक को अंजाम दिया। सुकमा और बीजापुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में जवानों ने 14 वर्दीधारी नक्सलियों को मार गिराया है। मारे गए नक्सलियों में कोंटा एरिया कमेटी का सचिव और दुर्दांत नक्सली नेता 'मंगडू' भी शामिल है, जिस पर लाखों का इनाम था।

सुबह 5 बजे से गूंजी गोलियों की तड़तड़ाहट

​बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि सुरक्षाबलों को सुकमा और बीजापुर के दक्षिणी इलाकों में भारी संख्या में सशस्त्र नक्सलियों की मौजूदगी की सटीक सूचना मिली थी। इसके आधार पर डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने घेराबंदी शुरू की। शनिवार तड़के करीब 5 बजे बीजापुर में और सुबह 8 बजे सुकमा के जंगलों में मुठभेड़ शुरू हुई, जो रुक-रुक कर दोपहर तक चलती रही।

भारी मात्रा में आधुनिक हथियार बरामद

​आईजी सुंदरराज के मुताबिक, तलाशी अभियान के दौरान अब तक कुल 14 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से 12 नक्सली सुकमा में और 2 बीजापुर में मारे गए हैं। मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास राइफल और एसएलआर (SLR) जैसे अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद किया गया है।

​"यह इस साल की पहली बड़ी सफलता है। मारे गए नक्सलियों में कई हार्डकोर कैडर शामिल हैं। हमारा लक्ष्य मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त बनाना है और हम उस दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहे हैं।"

पी. सुंदरराज, आईजी बस्तर रेंज


मास्टरमाइंड मंगडू का खात्मा

​मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों में 'वेट्टी मंगडू' उर्फ 'मुक्का' की पहचान एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पुलिस के अनुसार, मंगडू पिछले साल कोंटा में हुए उस आईईडी (IED) ब्लास्ट का मास्टरमाइंड था, जिसमें एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) शहीद हो गए थे। सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि कोंटा एरिया कमेटी के लगभग सभी प्रमुख लड़ाकों को इस ऑपरेशन में न्यूट्रलाइज कर दिया गया है।

मार्च 2026 की डेडलाइन की ओर बढ़ते कदम

​केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित मार्च 2026 की समयसीमा के मद्देनजर बस्तर के 'कोर' इलाकों में ऑपरेशनों में तेजी लाई गई है। आईजी ने स्पष्ट किया कि नक्सलियों के पास अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं— या तो वे हिंसा का रास्ता त्याग कर मुख्यधारा में शामिल हों (आत्मसमर्पण करें) या फिर सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई का सामना करें। फिलहाल इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन जारी है।



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