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बारुईपुर कांड में अब बीजेपी की एंट्री; पीड़ित परिवार से मिलीं अग्निमित्रा पॉल, बोलीं— 'मुख्यमंत्री की कार्रवाई से परिवार आश्वस्त'

by on | 2026-07-07 20:28:29

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बारुईपुर कांड में अब बीजेपी की एंट्री; पीड़ित परिवार से मिलीं अग्निमित्रा पॉल, बोलीं— 'मुख्यमंत्री की कार्रवाई से परिवार आश्वस्त'

कोलकाता/बारुईपुर ब्यूरो (बेबाक24): पश्चिम बंगाल के बारुईपुर (Baruipur) में नाबालिग लड़की से बलात्कार और हत्या का मामला अब एक बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित राजनीतिक मोड़ ले चुका है। जहां एक तरफ सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मामले में पुलिस और प्रशासन को घेर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेताओं ने मंगलवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात की है।

इस मुलाकात के बाद बीजेपी नेताओं के बयानों और टीएमसी द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोपों ने बंगाल के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से उलट दिया है।

1. 'मुख्यमंत्री के कदमों से परिवार पूरा आश्वस्त'— अग्निमित्रा पॉल

बारुईपुर में पीड़िता के परिजनों से मुलाकात करने के बाद बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने मीडिया से बात की। अमूमन राज्य सरकार पर हमलावर रहने वाली बीजेपी का रुख इस बार हैरान करने वाला था। अग्निमित्रा पॉल ने कहा:

अग्निमित्रा पॉल का आधिकारिक बयान:

"मुख्यमंत्री ने (इस मामले में) जो कदम उठाया है और जो कार्रवाई की है, उससे पीड़ित परिवार पूरी तरह से आश्वस्त है।"

2. 'ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को दोहराया नहीं जाएगा'— लॉकेट चटर्जी

अग्निमित्रा पॉल के साथ ही बीजेपी की एक और कद्दावर नेता लॉकेट चटर्जी भी पीड़ित परिवार का ढांधस बंधाने पहुंची थीं। उन्होंने राज्य की नई व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा:

  • बदलाव की सरकार: "यह सरकार बदलाव की सरकार है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 साल के (पिछले) शासन को अब यहाँ दोहराया नहीं जाएगा।"

  • सख्त कार्रवाई का दावा: उन्होंने आगे साफ किया कि इस मामले में गिरफ्तारियां पहले ही की जा चुकी हैं और दोषियों के खिलाफ सबसे सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

3. रविवार को तालाब से मिला था शव; इलाके में भारी तनाव

बारुईपुर के इस जघन्य मामले की कड़ियां शनिवार से जुड़ी हुई हैं:

  • शनिवार से लापता थी बच्ची: परिजनों के मुताबिक, नाबालिग लड़की शनिवार से अचानक लापता हो गई थी।

  • रविवार को मिला शव: रविवार (5 जुलाई 2026) को जब बच्ची का शव स्थानीय इलाके के एक तालाब से बरामद हुआ, तो पूरे क्षेत्र में भारी जनाक्रोश और तनाव फैल गया। परिजनों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि हत्या करने से पहले मासूम के साथ दरिंदगी (बलात्कार) की गई थी।

4. टीएमसी का पलटवार: 'बीजेपी कार्यकर्ता है आरोपी, पुलिस उसे बचा रही है'

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा राजनीतिक यू-टर्न तब आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर करते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस और बीजेपी पर साठगांठ का सीधा आरोप जड़ दिया।

  • अभियुक्त को बचाने का आरोप: टीएमसी ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल पुलिस बारुईपुर की इस वीभत्स घटना के एक मुख्य अभियुक्त को जान-बूझकर बचा रही है।

  • बीजेपी से कनेक्शन का दावा: टीएमसी ने एक्स पर लिखा— "पुलिस क्यों बचा रही है? क्योंकि बताया जा रहा है कि वह मुख्य आरोपी पश्चिम बंगाल बीजेपी का कार्यकर्ता है। ऐसा लगता है कि सत्ताधारी पार्टी (बीजेपी) के कहने पर पुलिस अभियुक्त को संरक्षण दे रही है और जांच से जुड़ी बेहद अहम जानकारियों को जान-बूझकर नजरअंदाज कर रही है।"

  • बंगाल के हालात पर सवाल: टीएमसी ने पोस्ट के आखिर में तीखा तंज कसते हुए पूछा— "आखिर बंगाल में यह क्या हो रहा है?"

बेबाक24 टेक

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बारुईपुर की यह घटना 'सत्ता और विपक्ष' के बदले हुए किरदारों का एक ऐसा आईना है, जिसे समझना बेहद जरूरी है। कल तक जो टीएमसी पुलिसिया कार्रवाई का बचाव करती थी, आज वह पुलिस पर आरोप लगा रही है कि पुलिस एक 'बीजेपी कार्यकर्ता' को बचा रही है। वहीं दूसरी तरफ, कल तक पुलिस को कटघरे में खड़ा करने वाली बीजेपी आज मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन की पीठ थपथपा रही है कि 'कार्रवाई से परिवार आश्वस्त है'। यह साफ दिखाता है कि बंगाल की राजनीति में अब कूटनीतिक और प्रशासनिक संतुलन पूरी तरह बदल चुका है।

'बेबाक24' का मानना है कि इस सियासी नूराकुश्ती के बीच सबसे बड़ा नुकसान उस मासूम बच्ची के इंसाफ का हो रहा है। चाहे आरोपी बीजेपी का कार्यकर्ता हो या टीएमसी का, वह सिर्फ और सिर्फ एक 'दरिंदा' है। पुलिस अगर सत्ता के दबाव में आकर किसी भी राजनीतिक रसूख वाले आरोपी को बचाने या तथ्यों को छुपाने की कोशिश कर रही है, तो यह बेहद शर्मनाक है। शनिवार को लापता हुई बच्ची का शव रविवार को तालाब से मिलना और पुलिस का शुरुआत में हीला-हवाली करना यह साबित करता है कि तंत्र में खोट है। नेताओं को इस जघन्य अपराध पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना बंद करना चाहिए और पुलिस को बिना किसी राजनीतिक चश्मे के निष्पक्ष जांच कर आरोपी को फांसी के फंदे तक पहुंचाना चाहिए।



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