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ट्रंप की खुली धमकी पर ईरान का पलटवार; विदेश मंत्री अराग़ची बोले— 'धमकियां बंद होने तक अमेरिका से कोई बातचीत नहीं'

by on | 2026-07-07 20:16:08

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ट्रंप की खुली धमकी पर ईरान का पलटवार; विदेश मंत्री अराग़ची बोले— 'धमकियां बंद होने तक अमेरिका से कोई बातचीत नहीं'

तेहरान/वाशिंगटन (बेबाक24): अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच चल रहा कूटनीतिक तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई एक बेहद आक्रामक और सीधी धमकी के बाद अब ईरान ने भी कड़े शब्दों में पलटवार किया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची (Abbas Araghchi) ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक ईरान के खिलाफ धमकियां और दबाव बनाने का सिलसिला जारी रहेगा, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी अंतिम समझौते के लिए बातचीत की मेज पर शुरुआत नहीं होगी।

1. 'या तो समझौता करो, या काम खत्म समझो'— ट्रंप की सीधी धमकी

इस ताजा विवाद की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने ईरान को खुलेआम चेतावनी दी थी। ट्रंप ने अपने बयान में कहा था कि या तो ईरान उनके साथ समझौता करे, नहीं तो वे इस पूरे मिशन को अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लेंगे। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा था— "या तो वे (ईरान) समझौता करेंगे, या फिर हम काम खत्म कर देंगे।"

2. 'आपने जिस चीज़ पर दस्तखत किया है, उस पर कायम रहें'— ईरान का जवाब

ट्रंप की इस धमकी के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने मोर्चा संभाला और मंगलवार को अमेरिका को नियमों की याद दिलाई। अराग़ची ने कहा:

अब्बास अराग़ची का आधिकारिक बयान:

"अमेरिका के साथ हुए एमओयू (MoU) का अनुच्छेद 13 बिल्कुल स्पष्ट और असंदिग्ध है। जब तक ईरान के खिलाफ धमकियां जारी रहेंगी, अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए कोई बातचीत शुरू नहीं होगी। ट्रंप प्रशासन को हमारी सीधी सलाह है कि आपने जिस चीज पर दस्तखत किया है, पहले उस पर कायम रहना सीखें।"

3. 'ईरानी जनता और बहादुर सेना किसी खतरे से नहीं डरती'

विदेश मंत्री अराग़ची ने ईरान की आंतरिक ताकत और एकजुटता का हवाला देने के लिए देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के ऐतिहासिक पलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लाखों की तादाद में ईरानी नागरिक पूरी एकता और एकजुटता के साथ अपने पूर्व नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़े थे। यह इस बात का सबूत है कि ईरानी जनता और देश की बहादुर सेना किसी भी तरह की विदेशी धमकी या सैन्य खतरे से रत्ती भर भी डरने वाली नहीं है।

बेबाक24 टेक

डोनाल्ड ट्रंप की 'काम खत्म कर देने' (डू ऑर डाई) वाली कूटनीति इस बार ईरान के सामने बेअसर साबित होती दिख रही है। ट्रंप हमेशा से अपनी 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) की नीति के जरिए दूसरे देशों को समझौते की मेज पर झुकाने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन ईरान जैसी क्षेत्रीय महाशक्ति के सामने यह पैंतरा उलटा पड़ता नजर आ रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने एमओयू के 'अनुच्छेद 13' का हवाला देकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह साफ कर दिया है कि अमेरिका खुद अपने हस्ताक्षरित वादों से मुकर रहा है।

'बेबाक24' का मानना है कि आयतुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान इस वक्त एक संवेदनशील राजनीतिक दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में ट्रंप की धमकी का इस्तेमाल ईरानी प्रशासन अपने देश में राष्ट्रवाद को जगाने और जनता को एकजुट करने के लिए कर रहा है। अराग़ची का यह कहना कि 'बहादुर सेना किसी खतरे से नहीं डरती', यह संकेत है कि यदि अमेरिका ने कोई सैन्य दुस्साहस किया, तो पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में एक भीषण युद्ध छिड़ सकता है। ट्रंप को समझना होगा कि कूटनीति बिजनेस डील्स की तरह केवल धमकियों से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और संधियों के पालन से चलती है।



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