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वाशिंगटन से यरूशलम तक कूटनीतिक रार: जेडी वेंस की किस 'नसीहत' पर नेतन्याहू ने ट्रंप को दिखाया भारत की 140 करोड़ आबादी का दम?

by on | 2026-07-06 12:39:42

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वाशिंगटन से यरूशलम तक कूटनीतिक रार: जेडी वेंस की किस 'नसीहत' पर नेतन्याहू ने ट्रंप को दिखाया भारत की 140 करोड़ आबादी का दम?

इंटरनेशनल डेस्क (बेबाक24): अमेरिका और इसराइल के 'सनातनी' रिश्तों के बीच इन दिनों पर्दे के पीछे सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा दी गई एक कूटनीतिक नसीहत का जवाब देते हुए इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन को साफ संदेश दिया है कि दुनिया में अमेरिका ही उनका इकलौता मददगार नहीं है, बल्कि भारत जैसा दुनिया का सबसे आबादी वाला देश भी इसराइल और उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

फॉक्स न्यूज़  को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक, भारत में उन्हें अपार जनसमर्थन और प्यार हासिल है।

1. विवाद की जड़: जेडी वेंस की वो कौन सी बात थी जिसपर भड़के नेतन्याहू?

दरअसल, यह पूरा विवाद जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सीजफायर/पीस डील (शांति वार्ता) के दौरान शुरू हुआ। इस बातचीत के बीच भी इसराइल ने लेबनान पर हमले जारी रखे, जिससे नाराज होकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसराइल के प्रति कड़ा रुख अख्तियार किया था।

18 जून 2026 को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जेडी वेंस ने इसराइली कैबिनेट को नसीहत देते हुए कहा था:

जेडी वेंस का वो बयान जिसने तनाव बढ़ाया:

"पूरी दुनिया में सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप ही इकलौते नेता हैं जो इसराइल के प्रति इतनी सहानुभूति और समर्थन दिखा रहे हैं। साथ ही, वह दुनिया के सबसे ताकतवर देश के नेता भी हैं। अगर मैं इसराइली कैबिनेट का सदस्य होता, तो शायद मैं दुनिया में बचे अपने इकलौते ताकतवर सहयोगी (अमेरिका) पर सार्वजनिक रूप से हमला नहीं करता।"

वेंस का यह बयान इसराइली मंत्रियों के उस रुख पर था जिसमें उन्होंने ईरान-अमेरिका पीस डील की आलोचना की थी। जब फॉक्स न्यूज की एंकर ने नेतन्याहू से वेंस की इस 'नसीहत' पर प्रतिक्रिया मांगी, तो नेतन्याहू ने तल्ख लहजे में जवाब दिया।

2. 'हमारे पास भारत भी है'— नेतन्याहू का कूटनीतिक पलटवार

नेतन्याहू ने जेडी वेंस के 'इकलौते ताकतवर सहयोगी' वाले दावे को सिरे से खारिज करते हुए भारत का कार्ड खेला। उन्होंने कहा:

  • भारत में अपार समर्थन: नेतन्याहू ने कहा— "मैं जेडी वेंस की इज्जत करता हूं, लेकिन मैं उनकी हर बात से सहमत नहीं हूं। अमेरिका ही नहीं, बल्कि हमारे दूसरे दोस्त भी हैं, जैसे भारत। 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में हमें बहुत ज्यादा समर्थन हासिल है। फेसबुक और सोशल मीडिया पर मुझे भारत से मिले अपार समर्थन के लगातार मैसेज आते रहते हैं।"

  • दिखावे और हकीकत का अंतर: नेतन्याहू ने दावा किया कि कई देशों के नेता पब्लिक ओपिनियन (जनता के दबाव) के कारण मंच पर भले इसराइल की आलोचना करते हों (जिसे उन्होंने एक फैशन बताया), लेकिन वे पीठ पीछे फोन करके कहते हैं कि— "हम आपकी इज्जत करते हैं, क्या आपकी सेना हमें कुछ सिखा सकती है? क्या आप हमें AI और साइबर सिक्योरिटी सिखा सकते हैं?"

3. ट्रंप और नेतन्याहू में 'फोन कॉल' पर तीखी झड़प का सच

इस कूटनीतिक रार के पीछे डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच जून में जी-7 समिट (G7 Summit) के दौरान पैदा हुई तल्खी भी है:

  • ट्रंप की फटकार: ट्रंप ने लेबनान पर इसराइली हमलों को 'गैर-जरूरी' बताते हुए कहा था कि हिज्बुल्लाह की खोज में पूरे इलाके को तबाह करना समझदारी नहीं है क्योंकि वहां आम लोग भी रहते हैं। सूत्रों के मुताबिक ट्रंप ने एक फोन कॉल पर नेतन्याहू को इसके लिए कड़ी फटकार भी लगाई थी।

  • अहंकार का टकराव: ट्रंप ने यहां तक कह दिया था कि— "हमारे बिना, मेरे बिना इसराइल का अस्तित्व ही नहीं होता, क्योंकि किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने वो नहीं किया जो मैंने किया।"

  • नेतन्याहू का स्टैंड: इसके जवाब में नेतन्याहू ने घरेलू राजनीतिक दबाव के बीच साफ कर दिया कि— "समझौता हो या न हो, जब तक मैं पीएम हूं, ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।"

बेबाक24 टेक

वाशिंगटन और यरूशलम के बीच का यह वाकयुद्ध अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बदलते समीकरणों (Realpolitik) का एक बेहतरीन उदाहरण है। जेडी वेंस का यह सोचना कि अमेरिका ही इसराइल का 'एकमात्र तारणहार' है, अमेरिकी कूटनीतिक अहंकार को दर्शाता है। नेतन्याहू ने जेडी वेंस के इसी 'अहंकार' को तोड़ने के लिए भारत का नाम लिया है।

'बेबाक24' का मानना है कि नेतन्याहू द्वारा अपनी रक्षा में भारत के जनसमर्थन और सोशल मीडिया नैरेटिव का हवाला देना यह दिखाता है कि भारत की भू-राजनीतिक (Geopolitical) ताकत अब वैश्विक विवादों में एक 'शील्ड' (ढाल) की तरह इस्तेमाल होने लगी है। इसी साल फरवरी 2026 में पीएम मोदी का इसराइल दौरा यह साफ कर चुका है कि भारत मध्य-पूर्व में संतुलन की नीति पर चल रहा है। नेतन्याहू जानते हैं कि जब अमेरिका की घरेलू राजनीति (ट्रंप बनाम सीजफायर दबाव) उन पर हावी होने की कोशिश करेगी, तब वे वैश्विक मंच पर खुद को अलग-थलग होने से बचाने के लिए नई दिल्ली की दोस्ती और 140 करोड़ भारतीयों के 'डिजिटल सपोर्ट' को एक बड़े कूटनीतिक हथियार के रूप में पेश कर सकते हैं। यह बयान जेडी वेंस के लिए एक सीधा सबक है कि बदलते दौर में कोई भी देश किसी का 'एकमात्र' मालिक या साथी नहीं हो सकता।



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