by on | 2026-07-06 12:43:08
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तेहरान/दुबई ब्यूरो: मध्य-पूर्व (Middle-East) से इस वक्त की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक खबर सामने आ रही है। अमेरिकी और इसराइली हमलों में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में राजधानी तेहरान में आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं। ईरानी मीडिया आउटलेट्स ने तेहरान की सड़कों पर उमड़े लाखों लोगों की तस्वीरें और वीडियो जारी किए हैं, जिसके बाद तेहरान और पवित्र शहर क़ोम (Qom) में सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम लागू कर दिए गए हैं।
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में ईरान से लेकर इराक़ तक चलने वाले इस ऐतिहासिक विदाई समारोह में डेढ़ से दो करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं।
इस पूरे अंतिम संस्कार के दौरान सबसे हैरान और कूटनीतिक हलकों को चौंकाने वाली घटना रविवार को घटी। अली ख़ामेनेई के शक्तिशाली बेटे और उनके संभावित उत्तराधिकारी माने जा रहे मोजतबा ख़ामेनेई अपने पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के जनाजे में शामिल नहीं हुए।
रहस्यमयी अनुपस्थिति: मोजतबा और उनके परिवार के करीबी सदस्यों का इस बड़े सार्वजनिक और धार्मिक मौके से गायब रहना कई तरह की कयासबाजियों को जन्म दे रहा है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इसराइल या अमेरिका के अगले संभावित हवाई हमले (Air Strike) के डर से मोजतबा को किसी सुरक्षित अंडरग्राउंड ठिकाने पर रखा गया है।
पर्दे के पीछे से सत्ता पर पकड़: जनाजे से गायब रहने के कुछ ही घंटों बाद मोजतबा ख़ामेनेई के नाम से एक आधिकारिक संदेश जारी किया गया। इस संदेश में उन्होंने गुलामहुसैन मोहसेनी एजेई को एक बार फिर ईरान की न्यायपालिका (Judiciary) के प्रमुख के तौर पर पेश किया, जो यह दर्शाता है कि अनुपस्थित रहने के बावजूद देश की सत्ता और प्रशासनिक निर्णयों पर उनका सीधा नियंत्रण बना हुआ है।
रविवार को तेहरान के सबसे प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र इमाम खुमैनी मस्जिद में अली ख़ामेनेई और उनके परिवार के मारे गए अन्य सदस्यों के लिए जनाजे की नमाज अदा की गई। इस नमाज की अगुवाई प्रसिद्ध धार्मिक नेता आयतुल्लाह जाफर सोभानी ने की। इस मौके पर ईरान की सेना, रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के शीर्ष कमांडर और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
ईरानी सरकार द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को ईरान के विभिन्न धार्मिक स्थलों से होते हुए अंतिम दफन के लिए इराक़ ले जाया जाएगा:
3-4 जुलाई 2026: तेहरान की इमाम खुमैनी मस्जिद में अंतिम संस्कार की शुरुआती धार्मिक रस्में पूरी की गईं।
5-6 जुलाई 2026 (आज): ताबूत को आम जनता और रामभक्तों (श्रद्धालुओं) के अंतिम दर्शन के लिए सार्वजनिक रूप से रखा गया है।
7 जुलाई 2026 (मंगलवार): ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को ईरान के पवित्र शहर 'क़ोम' ले जाया जाएगा, जहाँ 'जमकरान' में जनाजे की विशेष नमाज होगी।
8 जुलाई 2026 (बुधवार): शव को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराकर इराक़ के नजफ़ (Najaf) ले जाया जाएगा। यहाँ 'इमाम अली दरगाह' तक एक विशाल शोक जुलूस निकाला जाएगा, जिसके बाद कर्बला (Karbala) की पवित्र धरती पर अंतिम संस्कार (दफन) किया जाएगा।
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई का इस तरह अमेरिकी-इसराइली हमलों में मारा जाना और उसके बाद उनके बेटे मोजतबा का खुद के पिता के जनाजे से गायब रहना यह साबित करता है कि तेहरान इस वक्त अभूतपूर्व सुरक्षा संकट और डर के साये में जी रहा है। ईरान भले ही दुनिया के सामने डेढ़-दो करोड़ की भीड़ दिखाकर अपनी ताकत और एकजुटता का कूटनीतिक प्रदर्शन कर रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि देश के शीर्ष नेतृत्व को अपने ही मुल्क में अपनी जान सुरक्षित नहीं लग रही है।
'बेबाक24' का मानना है कि मोजतबा ख़ामेनेई का जनाजे में न आकर अंडरग्राउंड रहते हुए न्यायपालिका प्रमुख की नियुक्ति का संदेश जारी करना यह दिखाता है कि ईरान में सत्ता के उत्तराधिकार (Succession) की जंग बेहद गुप्त और गंभीर मोड़ पर है। ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दफन के लिए इराक़ के नजफ़ और कर्बला ले जाना यह दर्शाता है कि शिया जगत की इस सबसे बड़ी क्षति को ईरान एक वैश्विक धार्मिक आंदोलन में बदलना चाहता है। आने वाले 48 घंटे मध्य-पूर्व की सुरक्षा और इसराइल के अगले कदम के लिहाज से बेहद संवेदनशील होने वाले हैं।
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