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किसान रजिस्ट्री से जुड़ेगी खाद की बिक्री, डिजिटल टोकन से बंद होगी कालाबाजारी

by on | 2026-09-16 17:28:38

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किसान रजिस्ट्री से जुड़ेगी खाद की बिक्री, डिजिटल टोकन से बंद होगी कालाबाजारी


वाराणसी । ​उत्तर प्रदेश सरकार ने उर्वरक (खाद) वितरण प्रणाली को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए 'फार्मर रजिस्ट्री (Farmer ID)' को अनिवार्य कर दिया है। अब राज्य में खाद का आवंटन फर्टिलाइजर फ्रेमवर्क सिस्टम (FFS App) के माध्यम से डिजिटल टोकन व्यवस्था के तहत किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य वास्तविक किसानों तक उचित मूल्य पर समय से खाद पहुंचाना और लंबे समय से चली आ रही कालाबाजारी पर पूरी तरह से लगाम लगाना है।

​इस प्रणाली के तहत प्रत्येक किसान की जमीन के क्षेत्रफल (जोत) और बोई गई फसल के आधार पर खाद का कोटा तय किया जाएगा—जैसे प्रति हेक्टेयर DAP और यूरिया के बैग की सीमा निर्धारित रहेगी। किसान अपने मोबाइल या नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) के जरिए एफएफएस ऐप पर फार्मर आईडी दर्ज कर खाद की अग्रिम बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग पूरा होते ही एक ऑनलाइन कूपन या QR कोड जनरेट होगा, जिसकी वैधता 3 दिनों की होगी। ऐप में ही किसान को अपने आसपास की निजी दुकानों या साधन सहकारी समितियों में उपलब्ध लाइव स्टॉक की जानकारी मिल जाएगी, जिससे वे अपनी पसंद की दुकान चुन सकेंगे। खाद का उठान दुकान पर लगी ई-पॉश (e-PoS) मशीन से बायोमेट्रिक या QR वेरिफिकेशन के बाद ही संभव होगा।

बिना बायोमेट्रिक नहीं मिलेगी खाद, जमाखोरी और टैगिंग पर लगेगा पूर्ण विराम

​डिजिटल टोकन और फार्मर आईडी लिंकिंग से उर्वरक क्षेत्र में व्याप्त बिचौलियों और कालाबाजारी के नेटवर्क पर सीधा प्रहार होगा। बिना सत्यापन के खाद की बिक्री न होने से गैर-कृषि औद्योगिक कार्यों में सब्सिडी वाली खाद का दुरुपयोग और सीमाओं पर होने वाली तस्करी पूरी तरह थम जाएगी।

​इसके अलावा, प्रति किसान कोटे की सीमा तय (कैपिंग) होने के कारण बड़े या प्रभावशाली भूस्वामी थोक में खाद खरीदकर कृत्रिम किल्लत पैदा नहीं कर सकेंगे। डिजिटल सिस्टम से दुकानों पर उपलब्ध स्टॉक का पूरा डेटा पारदर्शी रहेगा, जिससे विक्रेताओं द्वारा की जाने वाली ओवररेटिंग (तय कीमत से अधिक वसूलना) और किसानों पर जबरन अन्य उत्पाद थपने (टैगिंग) जैसी मनमानी पर भी पूरी तरह अंकुश लगेगा।



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