ब्रेकिंग न्यूज़
झांसी हादसे में छोटे बेटे अबान की मौत, कसारी-मसारी में पिता-चाचा की कब्रों के पास ही होगा सुपुर्द-ए-खाक
अर्थव्यवस्था अर्थव्यवस्था

कच्चा तेल 108 डॉलर के पार, भारत पर बढ़ा महंगाई और विकास का दबाव

by admin@bebak24.com on | 2026-09-11 13:33:13

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3079


कच्चा तेल 108 डॉलर के पार, भारत पर बढ़ा महंगाई और विकास का दबाव

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। शुक्रवार को ब्रेंट कच्चा तेल 108.77 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो 4 महीने का उच्च स्तर है। एक सप्ताह में इसकी कीमत 12 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है। तेल की इस तेजी ने भारत की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

पश्चिम एशिया के तनाव से बढ़ी कीमत

क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है। निवेशकों को आशंका है कि संघर्ष लंबा खिंचने पर कच्चे तेल की आपूर्ति और प्रमुख ऊर्जा मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।

कुछ समय पहले तनाव कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई थी। अब पश्चिम एशिया में दोबारा बढ़े तनाव ने कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात खर्च बढ़ सकता है। इससे महंगाई पर दबाव बढ़ने के साथ परिवहन और उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है। तेल आयात का बिल बढ़ने पर देश के चालू खाते पर भी दबाव पड़ने की आशंका रहती है।

महंगे ईंधन का असर कारोबारियों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। खासतौर पर परिवहन लागत बढ़ने से कई वस्तुओं और सेवाओं की लागत में वृद्धि हो सकती है।

आर्थिक विकास पर भी खतरा

राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद के पूर्व वरिष्ठ अर्थशास्त्री सुनील सिन्हा के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो भारत की आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है।

उनके अनुमान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी भारत की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर को करीब 20 से 30 आधार अंक तक प्रभावित कर सकती है।

हालांकि भारत की हालिया तिमाही आर्थिक वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही है, लेकिन तेल की कीमतों में लगातार तेजी से महंगाई, आयात लागत और बाहरी खाते पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

आगे क्या सबसे अहम रहेगा?

अब बाजार की नजर इस बात पर है कि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कितने समय तक बना रहता है और पश्चिम एशिया का संघर्ष कितना लंबा खिंचता है। यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो भारत के लिए ऊर्जा लागत और आर्थिक वृद्धि दोनों बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

बेबाक24 दृष्टिकोण: कच्चे तेल की मौजूदा तेजी भारत के लिए सिर्फ ईंधन महंगा होने का मामला नहीं है। लंबे समय तक ऊंची कीमतें बनी रहीं तो महंगाई, आयात खर्च और आर्थिक विकास—तीनों पर एक साथ दबाव बढ़ सकता है।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment