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80 के दशक की तस्वीर का चलन बना साइबर जाल, फर्जी ऐप से चोरी हो सकता है निजी डेटा

by admin@bebak24.com on | 2026-09-13 12:52:16

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80 के दशक की तस्वीर का चलन बना साइबर जाल, फर्जी ऐप से चोरी हो सकता है निजी डेटा

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

सामाजिक माध्यमों पर 80 के दशक की पुरानी तस्वीर जैसा रूप देने का चलन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तस्वीर सुधारने वाले साधनों की मदद से अपनी सामान्य तस्वीरों को रेट्रो अंदाज में बदल रहे हैं। इसी चलन का फायदा उठाकर साइबर ठग लोगों को फर्जी विज्ञापनों, संदिग्ध कड़ियों और खतरनाक एपीके फाइलों के जरिए निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने लोगों को ऐसे फर्जी तस्वीर सुधारने वाले अनुप्रयोगों से सावधान रहने की सलाह दी है। ब्यूरो के अनुसार, ठग मुफ्त या असीमित रेट्रो तस्वीर बनाने का लालच देकर उपयोगकर्ताओं को ऐसे अनुप्रयोग डाउनलोड करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जो उनकी निजी जानकारी तक पहुंच बना सकते हैं।

कैसे होती है ठगी?

ठग सामाजिक माध्यमों और संदेश सेवा मंचों पर आकर्षक विज्ञापन या संदेश भेजते हैं। इनमें दावा किया जाता है कि एक विशेष अनुप्रयोग से तस्वीर को आसानी से 80 के दशक के रूप में बदला जा सकता है।

कड़ी पर जाने के बाद उपयोगकर्ता को कई बार आधिकारिक अनुप्रयोग भंडार के बजाय किसी अनजान वेबसाइट से एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। यहीं से जोखिम बढ़ जाता है।

एक तस्वीर के बदले खतरे में पड़ सकता है पूरा फोन

फर्जी अनुप्रयोग स्थापना के बाद जरूरत से ज्यादा अनुमति मांग सकता है। इसके माध्यम से संदेश, ओटीपी, संपर्क सूची, सूचनाएं, उपकरण संबंधी जानकारी और अन्य निजी आंकड़ों तक पहुंच हासिल करने की कोशिश हो सकती है।

चोरी हुई जानकारी का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और अनधिकृत लेनदेन जैसे अपराधों में किया जा सकता है। इसलिए केवल आकर्षक तस्वीर बनाने के लिए किसी अनजान अनुप्रयोग को फोन की व्यापक अनुमति देना खतरनाक हो सकता है।

इन सावधानियों से बचें

अनजान कड़ी पर क्लिक न करें और किसी बाहरी या संदिग्ध स्रोत से एपीके फाइल डाउनलोड न करें। किसी अनुप्रयोग को स्थापित करने से पहले उसके निर्माता, स्रोत और मांगी जा रही अनुमतियों की जांच करें। तस्वीर सुधारने वाले अनुप्रयोग को संदेश, संपर्क सूची या बैंकिंग जानकारी जैसी अनावश्यक पहुंच बिल्कुल न दें।

बैंकिंग या निजी जानकारी मांगने वाला कोई संदिग्ध अनुप्रयोग दिखे तो उसे तुरंत बंद कर दें और अपने उपकरण से हटा दें।

रेट्रो तस्वीर बनाना खतरा नहीं, गलत स्रोत खतरा है

विशेषज्ञों के अनुसार, 80 के दशक वाली तस्वीर बनाने का चलन अपने आप में खतरनाक नहीं है। असली जोखिम उन ठगों से है जो इस लोकप्रिय चलन का इस्तेमाल लोगों को फर्जी अनुप्रयोग या नुकसान पहुंचाने वाली फाइल तक ले जाने के लिए कर रहे हैं।

इसलिए रेट्रो तस्वीर बनाने के लिए केवल भरोसेमंद और आधिकारिक मंचों का इस्तेमाल करना बेहतर है।

बेबाक24 दृष्टिकोण: साइबर ठगी अब केवल बैंकिंग संदेशों तक सीमित नहीं रही। लोकप्रिय सामाजिक माध्यम चलन भी ठगों के लिए नया रास्ता बन रहे हैं। किसी भी मुफ्त सुविधा के लालच में कड़ी खोलने से पहले उसके स्रोत की जांच करना ही डिजिटल सुरक्षा की सबसे आसान पहली दीवार है।



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