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सोरहिया मेले के लिए लक्ष्मी कुंड पर नगर निगम की भव्य तैयारियां, जानें धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

by on | 2026-09-16 12:29:49

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सोरहिया मेले के लिए लक्ष्मी कुंड पर नगर निगम की भव्य तैयारियां, जानें धार्मिक एवं पौराणिक महत्व


​वाराणसी । काशी केप्रसिद्ध लक्ष्मी कुंड पर आयोजित होने वाले 16 दिवसीय 'सोरहिया मेले' के दृष्टिगत वाराणसी नगर निगम द्वारा कुंड परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में विशेष साफ-सफाई और स्वच्छ स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। श्रद्धालुओं के स्वागत और स्वच्छ, सुंदर एवं सुव्यवस्थित वाराणसी के संकल्प के साथ नगर निगम प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता से कार्य में जुटा हुआ है।

​हर साल इस पावन अवसर पर माता महालक्ष्मी के दर्शन-पूजन और 16 दिवसीय व्रत का अनुष्ठान करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु लक्ष्मी कुंड पर पहुंचते हैं।

सोरहिया मेले का धार्मिक और पौराणिक महत्व

​काशी खंड के अनुसार, लक्ष्मी कुंड में स्नान और देवी महालक्ष्मी के पूजन का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है।

  • 16 दिनों का अखण्ड व्रत: भाद्रपद शुक्ल अष्टमी (राधाष्टमी) से शुरू होकर आश्विन कृष्ण अष्टमी (जिउतिया/जीवत्पुत्रिका व्रत) तक चलने वाले इस 16 दिवसीय अनुष्ठान को 'सोरहिया मेला' कहा जाता है। श्रद्धालु इन 16 दिनों तक प्रतिदिन लक्ष्मी कुंड में स्नान कर 16 गांठों वाला पवित्र धागा (सोराही) धारण करते हैं और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं।
  • पुत्र प्राप्ति और सुख-समृद्धि की मान्यता: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो महिलाएं संतान प्राप्ति, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना रखती हैं, वे इस व्रत का निष्ठापूर्वक पालन करती हैं। ऐसा माना जाता है कि महालक्ष्मी कुंड का प्राकट्य स्वयं धन और वैभव की देवी लक्ष्मी के काशी आगमन से हुआ था।
  • लक्ष्मी कुंड का ऐतिहासिक संदर्भ: मान्यता है कि इस कुंड के जल में आचमन और स्नान करने से संपूर्ण पापों का नाश होता है तथा दरिद्रता से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि काशी के स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में भक्त यहाँ शीश नवाते हैं।

​नगर निगम द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चूने का छिड़काव, निरंतर कचरा उठान, कुंड के घाटों की धुलाई और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जा रही है ताकि धार्मिक आस्था का यह पर्व स्वच्छ और सुरक्षित माहौल में संपन्न हो सके।



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