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बंगाल: टीएमसी के 10 बागी विधायकों पर अयोग्यता का संकट, विधानसभा सचिवालय का नोटिस

by admin@bebak24.com on | 2026-09-16 11:02:53

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बंगाल: टीएमसी के 10 बागी विधायकों पर अयोग्यता का संकट, विधानसभा सचिवालय का नोटिस

कोलकाता | बेबाक24 न्यूज़

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही गुटबाजी अब विधानसभा की औपचारिक कार्यवाही तक पहुंच गई है। विधानसभा सचिवालय ने विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 बागी विधायकों को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है। यह कार्रवाई ममता बनर्जी गुट की ओर से दाखिल अयोग्यता याचिका के बाद हुई है।

नोटिस पाने वाले विधायकों में ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, विप्लव मित्रा, जावेद खान और रतिन घोष शामिल हैं। विधायक अखरुज्जमान अंसारी ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामले पर पार्टी के भीतर चर्चा के बाद समय पर जवाब दिया जाएगा।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

टीएमसी के भीतर यह संकट विधानसभा में विपक्ष के नेता पद को लेकर सामने आया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस पद के लिए वरिष्ठ विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय का नाम आगे किया था, जबकि दूसरे गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना।

सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने 7 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष रतिन बोस को पत्र लिखकर ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की थी। उनका आरोप था कि इन विधायकों ने पार्टी हितों के खिलाफ काम किया है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर मामला पहले से कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है। चट्टोपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के तौर पर मान्यता दी गई थी।

बागी गुट का दावा क्या है?

बागी गुट का दावा है कि उसे टीएमसी के 80 में से 65 विधायकों का समर्थन हासिल है। इसी आधार पर उसने संगठन में भी समानांतर गतिविधियां शुरू की हैं। गुट ने अखरुज्जमान अंसारी को मुख्य सचेतक नियुक्त किया है।

इस कदम के जरिए बागी विधायक पार्टी नेतृत्व के अधिकार और विधानसभा में अपने दावे को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट इन विधायकों की सदस्यता पर सवाल उठाते हुए दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

ममता बनर्जी गुट की ओर से सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया है। उनका पक्ष है कि बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की प्रक्रिया पर फैसला होना चाहिए।

इस पूरे विवाद का असर अब सिर्फ टीएमसी संगठन तक सीमित नहीं है। विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद, विधायकों की सदस्यता और पार्टी के वास्तविक नेतृत्व को लेकर दोनों गुट आमने-सामने हैं।

अब आगे क्या होगा?

विधानसभा सचिवालय के नोटिस के बाद 10 विधायकों को निर्धारित समय में अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद संबंधित प्राधिकरण उनके जवाब और अयोग्यता याचिका पर आगे की प्रक्रिया तय करेगा। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन विधायकों की सदस्यता निश्चित रूप से समाप्त होगी, क्योंकि अंतिम निर्णय प्रक्रिया और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के तहत होगा।

मामले का एक दूसरा पहलू यह भी है कि विधानसभा में विपक्ष के नेता की मान्यता को लेकर चल रही कानूनी कार्यवाही के परिणाम का असर पूरे विवाद पर पड़ सकता है।

बेबाक24 टेक

टीएमसी का यह विवाद अब पार्टी संगठन की सीमाओं से बाहर निकलकर विधानसभा की संवैधानिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। 10 विधायकों को भेजा गया नोटिस आगे की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का आधार बनेगा। आने वाले दिनों में इन विधायकों के जवाब, विधानसभा स्तर पर होने वाली कार्रवाई और अदालतों के रुख से यह तय होगा कि बंगाल की सियासत में यह गुटीय संघर्ष किस दिशा में जाता है।



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