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कैलाश खेर बोले- म्यूजिक की बात हो तो शाहरुख को बुला लेते हैं, इंडिपेंडेंट संगीत को अलग पहचान जरूरी

by admin@bebak24.com on | 2026-09-16 10:56:06

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कैलाश खेर बोले- म्यूजिक की बात हो तो शाहरुख को बुला लेते हैं, इंडिपेंडेंट संगीत को अलग पहचान जरूरी

मनोरंजन डेस्क | बेबाक24 न्यूज़

गायक कैलाश खेर इन दिनों अपने नए गीत ‘थम जा’ को लेकर चर्चा में हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने गीत के विचार, संगीत की बदलती दुनिया और भारत में इंडिपेंडेंट म्यूजिक को मिलने वाली पहचान पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि देश में संगीत को अक्सर फिल्मों और फिल्मी सितारों के दायरे से जोड़कर देखा जाता है, जबकि स्वतंत्र संगीत की अपनी अलग पहचान है।

कैलाश खेर के मुताबिक ‘थम जा’ उन खूबसूरत पलों को महसूस करने की कोशिश है, जिन्हें इंसान याद बनने से पहले ही रोक लेना चाहता है। उन्होंने कहा कि जीवन में आनंद, प्रेम और भावनाओं से जुड़े ऐसे कई क्षण आते हैं, जब मन करता है कि समय वहीं ठहर जाए।

‘म्यूजिक को इज्जत मिलनी चाहिए’

संगीत उद्योग में बदलाव के सवाल पर कैलाश खेर ने पेशेवर रवैये और संगीत को उसकी स्वतंत्र पहचान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत में ‘म्यूजिक’ शब्द सुनते ही अक्सर फिल्मी संगीत की चर्चा शुरू हो जाती है, जबकि फिल्मी संगीत और स्वतंत्र संगीत को अलग-अलग पहचान के साथ देखा जाना चाहिए।

उन्होंने समझाया कि फिल्मी गीत में गीतकार, संगीतकार, गायक और कलाकार समेत कई लोग मिलकर काम करते हैं। वहीं इंडिपेंडेंट म्यूजिक में एक कलाकार खुद गीत लिखने, धुन बनाने, गाने और मंच पर प्रस्तुति देने तक कई भूमिकाएं निभा सकता है।

‘म्यूजिक की बात होगी तो शाहरुख खान को बुला लेंगे’

कैलाश खेर ने भारतीय संगीत जगत की इसी सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां संगीत से जुड़ा कोई कार्यक्रम हो तो कई बार चर्चा फिल्मों और सितारों तक पहुंच जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि म्यूजिक की बात होने पर लोग शाहरुख खान को बुलाकर फिल्मी गानों पर नृत्य कराने लगेंगे। उनके अनुसार, इससे संगीत की स्वतंत्र पहचान पीछे छूट जाती है।

उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में यू2 और कोल्डप्ले जैसे संगीत समूह अपनी पहचान फिल्मों से अलग बनाते हैं। उनके लिए संगीत ही मुख्य पहचान है। कैलाश खेर का मानना है कि भारत में भी स्वतंत्र संगीत को इसी तरह उसकी अपनी पहचान और जगह मिलनी चाहिए।

‘फिल्में बाद में आईं, संगीत बहुत पुराना है’

कैलाश खेर ने कहा कि फिल्मों का इतिहास करीब एक सदी पुराना है, जबकि संगीत की परंपरा उससे कहीं पुरानी है। इसलिए संगीत को केवल फिल्मों के संदर्भ में परिभाषित करना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बदलाव की शुरुआत सोच और शब्दावली से होनी चाहिए।

उनके मुताबिक फिल्मी संगीत को फिल्मी संगीत और स्वतंत्र रचनाओं को संगीत के रूप में अलग-अलग पहचान मिलने से कलाकारों और इस क्षेत्र दोनों को फायदा होगा।

‘थम जा’ में जिंदगी के खूबसूरत पलों की कहानी

अपने नए गीत के बारे में कैलाश खेर ने बताया कि यह उन क्षणों को समर्पित है, जब खुशी या प्रेम के बीच व्यक्ति चाहता है कि समय कुछ देर के लिए ठहर जाए। उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में कहा कि उनके लिए हर पल महत्वपूर्ण है और आध्यात्मिकता, प्रेम तथा भक्ति उनके अनुभवों का अहम हिस्सा हैं।

बेबाक24 टेक

कैलाश खेर की बात का केंद्र किसी एक कलाकार या फिल्मी सितारे की आलोचना नहीं, बल्कि संगीत की पहचान को व्यापक बनाने की मांग है। उनकी टिप्पणी उस बहस को सामने लाती है कि भारत में स्वतंत्र संगीत को फिल्मों से अलग अपनी पहचान, मंच और सम्मान कितना मिल पा रहा है।



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