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कृष्णांनद राय हत्याकांड: 400 राउंड गोलियां, 7 लाशें... पर न्याय के पन्नों में "हत्यारा कोई नहीं"!

by on | 2026-09-12 11:29:30

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कृष्णांनद राय हत्याकांड: 400 राउंड गोलियां, 7 लाशें... पर न्याय के पन्नों में "हत्यारा कोई नहीं"!

संतोष राय

वाराणसी । पूर्वांचल के सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले कृष्णानंद राय हत्याकांड की यह दास्तान कानून व्यवस्था के उस कड़वे सच को उजागर करती है, जहाँ रसूख, खौफ और प्रशासनिक साठगांठ के आगे इंसाफ दम तोड़ देता है।

खौफ का साम्राज्य और गवाहों का टूटना

29 नवंबर 2005 को जब एके-47 से 400 से ज्यादा गोलियां बरसाकर भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों की हत्या की गई, तब लगा था कि न्याय की राह साफ होगी। लेकिन वक्त के साथ माफिया के खौफ की ऐसी परत चढ़ी कि जो गवाह कभी राय के 'प्राणों से प्यारे' और बेहद करीबी थे, अदालत पहुंचते-पहुंचते एक-एक कर मुकर गए।

इनाम में 'दिल्ली का तख्त' और काला साम्राज्य

चर्चाओं की मानें तो इस पूरी बिसात को बिछाने और गवाहों को तोड़ने वाले चेले को माफिया ने छोटा-मोटा नहीं, बल्कि मुंहमांगा इनाम दिया। जिसने राजनीतिक और जमीनी राहें आसान कीं, उसे दिल्ली की सियासी कुर्सी के सपने से लेकर मोबाइल टावरों से डीजल की अवैध वसूली और खड़ा किया हुआ पूरा 'काला साम्राज्य' तक सौंप दिया गया।

कॉर्पोरेट लाइजनिंग में उलझी सीबीआई

मामला सीबीआई के सुपुर्द हुआ, लेकिन माफिया के 'कॉर्पोरेट लाइजनर' और सफेदपोश पैरोकारों ने जांच के इर्द-गिर्द ऐसा जाल बुना कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी भी कागजी दलीलों में उलझ कर रह गई। ठोस और कानूनी सबूतों के अभाव में सीबीआई को भी अदालत में पराजय झेलनी पड़ी।

गाजीपुर से गायब हुई केस की फाइलें

जांच को भटकाने का खेल केवल अदालतों में नहीं, बल्कि महकमे के भीतर भी खेला गया। गाजीपुर पुलिस दफ्तर से हत्याकांड से जुड़ी अहम पत्रावली रहस्यमयी तरीके से गायब कर जला दी गई। बाद में जब सीबीआई फाइलें तलाशने पहुंची, तो पता चला कि उन्हें 'निस्तारित दस्तावेजों' के नाम पर राख में तब्दील कर दिया गया था।

​साढ़े 13 साल तक चले इस मुकदमे का अंत वही हुआ जिसका अंदेशा पूर्वांचल के उस खौफनाक दौर को जानने वालों को था। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। सिस्टम सुनता रहा, गवाह बदलते रहे और अंत में कानून की किताबों में सिर्फ एक जुमला दर्ज रह गया— सबूत गायब, हत्यारा कोई नहीं।



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