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गरबा में मुस्लिमों की एंट्री पर अमृता फडणवीस का बयान, बोलीं- शांतिपूर्वक कोई उत्सव देखना चाहे तो ठीक है

by admin@bebak24.com on | 2026-09-09 12:58:56

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गरबा में मुस्लिमों की एंट्री पर अमृता फडणवीस का बयान, बोलीं- शांतिपूर्वक कोई उत्सव देखना चाहे तो ठीक है

मुंबई | बेबाक24 न्यूज़

महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर चल रही बहस के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गरबा अब केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है और इसे अलग-अलग समुदायों के लोग भी देखते हैं।

अमृता फडणवीस ने कहा कि यदि किसी भी समुदाय या धर्म का व्यक्ति बिना किसी विवाद के शांतिपूर्वक गरबा देखने आता है, तो इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मंत्री नितेश राणे के बयान के पीछे क्या कारण हैं, इसकी उन्होंने विस्तार से पड़ताल नहीं की है।

नितेश राणे ने प्रवेश रोकने की मांग का किया समर्थन

इस विवाद की शुरुआत महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग का समर्थन किया था।

राणे ने कहा था कि विश्व हिंदू परिषद की ओर से पहचान की जांच और अन्य शर्तों से जुड़ी जो मांगें रखी गई हैं, उन्हें गलत नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग हिंदू धर्म और मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें हिंदुओं के नवरात्रि और गरबा समारोहों में शामिल होने का अधिकार क्यों होना चाहिए।

आधार कार्ड के बाद हनुमान चालीसा का सुझाव

नितेश राणे ने इससे आगे बढ़कर कहा कि केवल आधार कार्ड से पहचान सत्यापन पर्याप्त नहीं होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रवेश देने से पहले लोगों से हनुमान चालीसा का पाठ कराया जाए और उसके बाद ही उन्हें गरबा समारोह में आने की अनुमति दी जाए।

उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।

अमृता फडणवीस ने क्या कहा?

अमृता फडणवीस ने नितेश राणे के बयान के सभी पहलुओं पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उन्होंने इस विषय की गहराई से जांच नहीं की है। हालांकि, उन्होंने गरबा को व्यापक स्तर पर मनाया जाने वाला उत्सव बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से इसे देखने आने वाले किसी व्यक्ति के प्रवेश को लेकर सकारात्मक रुख जताया।

अब इस मामले में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं पर नजर बनी हुई है।



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