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आकाश आनंद प्रकरण में अशोक सिद्धार्थ की भूमिका पर सवाल, बसपा में बढ़ी अंदरूनी खींचतान

by admin@bebak24.com on | 2026-09-11 13:33:15

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आकाश आनंद प्रकरण में अशोक सिद्धार्थ की भूमिका पर सवाल, बसपा में बढ़ी अंदरूनी खींचतान

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

बसपा में आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त किए जाने के बाद संगठन के भीतर की खींचतान एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास की घोषणा और उसके तुरंत बाद मायावती की ओर से आकाश आनंद पर की गई कार्रवाई ने पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है।

बसपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ को लेकर पार्टी में पिछले करीब 2 वर्षों से असंतोष था। उन्हें पहले भी 2 बार संगठन से बाहर किया गया था। उन पर महाराष्ट्र चुनाव में टिकट वितरण में हस्तक्षेप, दिल्ली चुनाव में दखल और पार्टी के निर्देशों की अनदेखी जैसे आरोप लगाए गए थे। हालिया विवाद में भी उन पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश के आरोपों का जिक्र सामने आया।

आकाश आनंद तक पहुंचा विवाद

अशोक सिद्धार्थ और पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान का असर आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य पर भी पड़ा। आकाश के करीबी लोगों की ओर से संगठन में कुछ पदाधिकारियों की कार्यशैली बदलने की जरूरत की बात कही गई थी। बताया जाता है कि इस बयान को पार्टी नेतृत्व के सामने अलग संदर्भ में रखा गया, जिससे विवाद और बढ़ा।

इसी क्रम में पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को भी पार्टी से बाहर किया गया। अंटू मिश्रा और अशोक सिद्धार्थ के करीबी संबंधों को इस कार्रवाई से जोड़कर देखा गया।

अशोक सिद्धार्थ ने आरोपों को बताया साजिश

राजनीति से संन्यास की घोषणा करते हुए अशोक सिद्धार्थ ने मायावती को लिखे पत्र में खुद पर पार्टी में प्रभाव बढ़ाने और आकाश आनंद को गुमराह करने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साजिश का हिस्सा हैं और समय आने पर सच्चाई सामने आएगी।

सिद्धार्थ ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके संन्यास को आकाश आनंद की राजनीतिक वापसी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आकाश को दोबारा जिम्मेदारी देनी है या नहीं, इसका फैसला पूरी तरह मायावती का है।

अब आगे क्या?

मायावती ने 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारियों से मुक्त किया था। इसके बाद अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त किए जाने का एलान किया गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह फैसला अंतिम है या चुनाव से पहले बसपा में नेतृत्व से जुड़े समीकरण फिर बदल सकते हैं।

आकाश आनंद की वापसी को लेकर अटकलें जरूर हैं, लेकिन फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है।

बेबाक24 दृष्टिकोण: बसपा का मौजूदा संकट केवल 2 नेताओं के बीच मतभेद का मामला नहीं दिखता, बल्कि संगठनात्मक नियंत्रण और भविष्य के नेतृत्व को लेकर गहरे सवाल खड़े करता है। चुनाव से पहले मायावती के अगले फैसले ही यह तय करेंगे कि आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका पूरी तरह समाप्त हुई है या आगे कोई नया रास्ता खुल सकता है।



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