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एआई के दुरुपयोग का खतरा बढ़ा, जैविक हथियार से जुड़ी कोशिशें पकड़ीं

by admin@bebak24.com on | 2026-09-11 13:29:30

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एआई के दुरुपयोग का खतरा बढ़ा, जैविक हथियार से जुड़ी कोशिशें पकड़ीं

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इसके खतरनाक दुरुपयोग को लेकर नई चिंता सामने आई है। एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने दावा किया है कि उसके क्लॉड मॉडल का इस्तेमाल कुछ लोगों ने जैविक हथियारों और सैन्य प्रणालियों से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों के लिए करने की कोशिश की। कंपनी के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था ने ऐसे कई मामलों की पहचान कर संबंधित खातों पर कार्रवाई की।

एंथ्रोपिक के मुताबिक सबसे गंभीर मामला मई में सामने आया। इसमें एक वैज्ञानिक ने क्लॉड की मदद से चिकनगुनिया वायरस के आनुवंशिक स्वरूप में ऐसे बदलावों से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की, जिससे रोगजनक की गंभीरता बढ़ने की आशंका हो सकती थी। जांच में संबंधित संस्थान के एक विदेशी सैन्य अनुसंधान केंद्र से जुड़े होने की जानकारी सामने आई।

वैज्ञानिक शोध और गलत इस्तेमाल के बीच चुनौती

कंपनी के सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक एआई से जुड़े ऐसे अनुरोधों की पहचान करना आसान नहीं है। वायरस, रोगाणुओं और जैविक अनुसंधान से जुड़ी कई जानकारियां उपचार, टीका निर्माण और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी जरूरी होती हैं। यही वजह है कि किसी अनुरोध के पीछे वास्तविक शोध है या नुकसान पहुंचाने का उद्देश्य, यह तय करना जटिल हो जाता है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि उन्नत एआई प्रणालियां जटिल वैज्ञानिक कार्यों को आसान बना सकती हैं। इससे उन लोगों की क्षमता भी बढ़ सकती है, जिनके पास पहले इतनी विशेषज्ञता या संसाधन उपलब्ध नहीं थे।

मिसाइल और ड्रोन से जुड़े मामले भी सामने आए

एंथ्रोपिक ने जैविक अनुसंधान के अलावा सैन्य क्षेत्र से जुड़े कई संदिग्ध मामलों का भी उल्लेख किया है। कंपनी के अनुसार, चीन से जुड़े कुछ मामलों में मिसाइल, बम और अन्य हथियार प्रणालियों के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने की कोशिशों का पता चला।

रूस से जुड़े मामलों में चुनावी दुष्प्रचार सामग्री और घातक हथियारों से संबंधित गतिविधियां सामने आने का दावा किया गया है। वहीं यमन में ईरान समर्थित हूती नेटवर्क से जुड़े एक मामले में ड्रोन और मिसाइल प्रणालियों के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कराने की कोशिश पकड़ी गई।

संदिग्ध खातों पर हुई कार्रवाई

कंपनी ने बताया कि ऐसे मामलों में संबंधित खातों को बंद किया गया और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े कुछ इंटरनेट पतों को भी अवरुद्ध किया गया। एंथ्रोपिक का कहना है कि एआई की क्षमता बढ़ने के साथ उसके सुरक्षित इस्तेमाल के लिए निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी लगातार मजबूत करना जरूरी है।

एआई की दोहरी उपयोगिता बनी चुनौती

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग चिकित्सा, अनुसंधान और तकनीकी विकास में तेजी लाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन यही क्षमता गलत हाथों में गंभीर खतरा भी पैदा कर सकती है। जैविक अनुसंधान और सैन्य तकनीक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह चुनौती और बड़ी हो जाती है।

बेबाक24 दृष्टिकोण: एआई की असली चुनौती केवल उसकी बढ़ती क्षमता नहीं, बल्कि यह तय करना है कि उस क्षमता का इस्तेमाल कौन और किस उद्देश्य से कर रहा है। जैविक तथा सैन्य क्षेत्रों में ऐसे मामलों की पहचान और रोकथाम के लिए कंपनियों, वैज्ञानिक संस्थानों और सरकारों के बीच मजबूत सुरक्षा व्यवस्था अब पहले से अधिक जरूरी हो गई है।



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