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'विपक्षी दलों में टूट संविधान की भावना के खिलाफ'— संसद सत्र से पहले खड़गे और राहुल की बड़ी बैठक

by on | 2026-07-16 21:06:25

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'विपक्षी दलों में टूट संविधान की भावना के खिलाफ'— संसद सत्र से पहले खड़गे और राहुल की बड़ी बैठक

नई दिल्ली (बेबाक24): 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले देश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति के बीच, कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर विपक्षी दलों को अवैध रूप से तोड़ने का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाया है।

गुरुवार (16 जुलाई 2026) को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की एक हाई-प्रोफाइल बैठक में विपक्ष ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोलने का एलान कर दिया। 'बेबाक24' के राजनीतिक ब्यूरो की यह विशेष विस्तृत रिपोर्ट:

'चंदा चोरी' से लेकर 'विदेश नीति' तक: खड़गे ने गिनाए मुख्य मुद्दे

संसदीय दल की बैठक की अध्यक्षता सोनिया गांधी ने की, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और डॉ. शशि थरूर समेत पार्टी के तमाम शीर्ष सांसद शामिल हुए। बैठक के तुरंत बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर उन मुख्य एजेंडों की जानकारी दी, जिन पर संसद में सरकार को घेरा जाएगा:

  • मुख्य मुद्दे: खड़गे ने लिखा कि बैठक में देश के ज्वलंत मुद्दों जैसे— चंदा चोरी (चुनावी बॉन्ड/फंडिंग विवाद), आस्था के साथ धोखा, देश की लगातार बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था (NEET पेपर लीक विवाद), लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सरकारी कब्जा और विपक्षी राजनीतिक दलों को बलपूर्वक तोड़ने की साजिशों पर विस्तृत चर्चा हुई।

  • आर्थिक व वैश्विक मोर्चे: इसके अलावा पार्टी ने भ्रष्टाचार, कमरतोड़ महंगाई, देश की वर्तमान विदेश नीति (विशेषकर अमेरिका-ईरान संकट के बीच भारत का रुख) और ई20 (E20) जैसे वैश्विक और आर्थिक नीतिगत मुद्दों पर भी संसद में सरकार से जवाब मांगने का फैसला किया है।

जयराम रमेश का अमित शाह पर सीधा हमला: "यह दागदार बहुमत होगा"

बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने सीधे तौर पर देश के गृह मंत्री पर विपक्षी दलों में अवैध रूप से टूट करवाने का संगीन आरोप लगाया:

  • गृह मंत्री पर आरोप: जयराम रमेश ने तीखे लहजे में कहा, "यह पूरी तरह सच है कि 17 अप्रैल के बाद से देश के गृह मंत्री ने राजनीतिक सत्ता का दुरुपयोग कर एक-दो विपक्षी दलों के भीतर बड़ी टूट करवाई है। लोकतंत्र में इस तरह चुने हुए प्रतिनिधियों को डरा-धमकाकर या लालच देकर दल बदलना हमारे पवित्र संविधान का सीधा अपमान है।"

  • दागदार बहुमत की कोशिश: उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सत्तापक्ष बहुत ही चालाकी और असंवैधानिक तरीकों से संसद में दो-तिहाई (2/3) बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रहा है। रमेश ने चेतावनी दी, "दूसरे दलों को तोड़कर और लोकतंत्र की हत्या कर जुटाया गया ऐसा कोई भी दो-तिहाई बहुमत पूरी तरह 'दागदार बहुमत' कहलाएगा। यह हमारे संविधान की मूल भावना के सरासर खिलाफ है।"

परिसीमन के मुद्दे पर विपक्ष की महा-एकजुटता

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि लोकसभा में सत्तापक्ष के लिए तोड़-फोड़ के बाद भी दो-तिहाई का आंकड़ा छूना नामुमकिन है और विपक्ष इस मोर्चे पर पूरी तरह एकजुट है:

  • राहुल-खड़गे का मिशन संपर्क: जयराम रमेश ने जानकारी दी कि कांग्रेस पार्टी देश के सभी प्रमुख विपक्षी दलों के साथ लगातार जीवंत संपर्क में है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद क्षेत्रीय क्षत्रपों से सीधे संवाद कर रहे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी उन सभी दलों के संपर्क में हैं, जिन्होंने बीते 16 और 17 अप्रैल को सरकार के परिसीमन रोडमैप का देशव्यापी स्तर पर जोरदार विरोध किया था।

  • मानसून सत्र में आर-पार: विपक्ष की रणनीति साफ है कि यदि सरकार संसद में दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों को प्रभावित करने वाले परिसीमन के नियमों या किसी अन्य बड़े संवैधानिक संशोधन को बिना आम सहमति के पेश करती है, तो पूरा विपक्ष संसद से लेकर सड़क तक एक अभूतपूर्व मोर्चा खोलेगा।

कांग्रेस संसदीय दल बैठक: रणनीतिक फैक्ट फाइल

रणनीतिक पहलूकांग्रेस का रुख और संसद में घेराव की योजना (16 जुलाई 2026)
बैठक के प्रमुख चेहरेसोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, डॉ. शशि थरूर।
सरकार पर मुख्य आरोपगृह मंत्री द्वारा 17 अप्रैल के बाद विपक्षी दलों में असंवैधानिक टूट करवाना।
राजनीतिक मकसदभाजपा द्वारा संविधान संशोधन के लिए 'दागदार दो-तिहाई बहुमत' जुटाने का प्रयास।
केंद्रीय एजेंडापरिसीमन का विरोध, NEET पेपर लीक/शिक्षा संकट, महंगाई और चंदा चोरी।
आगामी तारीख20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा संसद का मानसून सत्र होगा बेहद हंगामेदार।

बेबाक24 टेक

20 जुलाई से शुरू हो रहा संसद का यह मानसून सत्र 2026 का सबसे ऐतिहासिक और टकराव से भरा सत्र साबित होने जा रहा है। कांग्रेस संसदीय दल की बैठक और जयराम रमेश का यह कड़ा बयान दर्शाता है कि विपक्ष इस बार रक्षात्मक होने के बजाय पूरी तरह से आक्रामक मोड में है। 17 अप्रैल के बाद विपक्षी खेमे में हुई टूट को 'संविधान पर हमला' और 'दागदार बहुमत' का नाम देकर कांग्रेस ने आगामी सत्र के लिए एक बहुत बड़ी वैचारिक और राजनीतिक लाइन खींच दी है।

बेबाक24 का मानना है कि विपक्ष का असली इम्तिहान परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर होगा। दक्षिण भारत के क्षेत्रीय दल (जैसे DMK, UDF, और वामपंथी दल) सीटों के पुनर्गठन को लेकर बेहद संवेदनशील हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि जनसंख्या नियंत्रण के उनके सफल प्रयासों के बदले उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर किया जा सकता है। राहुल गांधी और खड़गे का इन दलों को एकजुट रखना इस बात का संकेत है कि विपक्ष संसद के भीतर सरकार को वाकओवर देने के मूड में बिल्कुल नहीं है। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह विपक्ष के इन तीखे हमलों का जवाब किस रणनीतिक और विधायी तैयारी के साथ देती है।



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