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पोखरा में भारत-नेपाल की अहम बैठक संपन्न; गोरखपुर-न्यू बुटवल ट्रांसमिशन लाइन की प्रगति सराही

by on | 2026-07-15 21:35:09

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पोखरा में भारत-नेपाल की अहम बैठक संपन्न; गोरखपुर-न्यू बुटवल ट्रांसमिशन लाइन की प्रगति सराही

पोखरा/काठमांडू (बेबाक24): भारत और पड़ोसी देश नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों और ऊर्जा सहयोग को एक नई दिशा देने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई है। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने बिजली क्षेत्र में सहयोग, पावर ट्रेड (बिजली व्यापार) और क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े संवेदनशील और रणनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा की।

नेपाल के खूबसूरत शहर पोखरा में आयोजित यह दो दिवसीय बैठक बुधवार (15 जुलाई 2026) को आधिकारिक तौर पर समाप्त हुई। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रेस रिलीज जारी कर इस बेहद सफल वार्ता की विस्तृत जानकारी साझा की है। 'बेबाक24' की यह विशेष अंतरराष्ट्रीय व्यापार रिपोर्ट:

संयुक्त संचालन समिति (JSC) की 13वीं बैठक: पोखरा में महामंथन

भारतीय दूतावास के मुताबिक, बिजली क्षेत्र में सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच गठित संयुक्त संचालन समिति (Joint Steering Committee - JSC) की यह 13वीं आधिकारिक बैठक थी, जो 14 और 15 जुलाई 2026 को नेपाल के पोखरा में आयोजित की गई:

  • व्यापक समीक्षा: बैठक के दौरान भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा क्षेत्र में चल रहे तमाम बड़े प्रोजेक्ट्स की व्यापक समीक्षा की गई।

  • त्रिकोणीय एजेंडा: इस महामंथन में मुख्य रूप से तीन स्तंभों— जलविद्युत परियोजनाओं (Hydroelectric Projects) का तेजी से विकास, द्विपक्षीय बिजली व्यापार और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर (बिजली ग्रिड नेटवर्क) को मजबूत करने पर रणनीतिक सहमति बनी।

गोरखपुर-न्यू बुटवल ट्रांसमिशन लाइन की प्रगति की सराहना

इस बैठक का सबसे बड़ा और सकारात्मक पहलू दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ाने वाली बिजली लाइनों का समय पर पूरा होना रहा:

  • 400 KV गोरखपुर-न्यू बुटवल लाइन: दोनों देशों के डेलीगेट्स ने 400 केवी गोरखपुर-न्यू बुटवल ट्रांसमिशन लाइन समेत कई अन्य नई अंतर-देशीय (Cross-Border) ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण कार्य में हुई तेज प्रगति की खुलकर सराहना की।

  • ग्रिड का समन्वित संचालन: इसके साथ ही भारत और नेपाल के नेशनल पावर ग्रिड्स के समन्वित संचालन (Coordinated Operation) को लेकर भी तकनीकी ब्लूप्रिंट तैयार किया गया, ताकि भविष्य में बिजली की ट्रिपिंग या शार्टेज को मिलकर संभाला जा सके।

ग्रीन एनर्जी और 'ग्रीन हाइड्रोजन' पर फोकस

भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस 13वीं बैठक में पारंपरिक पनबिजली से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों को शामिल किया गया:

  • सौर ऊर्जा (Solar Energy): नेपाल के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स विकसित करने में भारत तकनीकी और वित्तीय मदद बढ़ाएगा।

  • ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen): इस उभरती हुई तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करेंगे।

  • क्षमता निर्माण (Capacity Building): भारत, नेपाल के ऊर्जा और ग्रिड विशेषज्ञों की क्षमता निर्माण के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम्स आयोजित करना जारी रखेगा।

भारत-नेपाल ऊर्जा सहयोग बैठक 2026: मुख्य बिंदु

मुख्य पहलूबैठक से जुड़े प्रमुख तथ्य और फैसले
बैठक का नाम / संस्करणभारत-नेपाल संयुक्त संचालन समिति (JSC) की 13वीं बैठक
तारीख और स्थान14-15 जुलाई 2026; पोखरा, नेपाल
प्रमुख बुनियादी ढांचा400 KV गोरखपुर-न्यू बुटवल ट्रांसमिशन लाइन की प्रगति को सराहा गया।
भविष्य के नए क्षेत्रसौर ऊर्जा विकास, ग्रीन हाइड्रोजन में सहयोग और ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन।
भारतीय दूतावास का बयानयह चर्चा दोनों देशों के बीच बिजली क्षेत्र के रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

बेबाक24 टेक

भारत और नेपाल के बीच बिजली क्षेत्र में यह सहयोग सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर है। नेपाल के पास प्रचुर मात्रा में जलविद्युत (Hydro Power) की क्षमता है, लेकिन उसके पास न तो बड़ा बाजार है और न ही बड़ा ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर। दूसरी तरफ, भारत को अपनी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए भारी मात्रा में क्लीन और ग्रीन एनर्जी की जरूरत है।

बेबाक24 का मानना है कि 400 केवी गोरखपुर-न्यू बुटवल ट्रांसमिशन लाइन का तेजी से पूरा होना उत्तर प्रदेश और बिहार समेत पूरे उत्तर भारत के पावर कॉरिडोर के लिए मील का पत्थर साबित होगा। नेपाल की बिजली को भारतीय ग्रिड में शामिल करने और भविष्य में इसे बांग्लादेश तक एक्सपोर्ट करने की जो योजना है, उसे इस पोखरा बैठक से नई रफ्तार मिलेगी। ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर पावर को एजेंडे में शामिल करना यह दिखाता है कि दोनों देश पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर 21वीं सदी के आधुनिक ऊर्जा संकट से मिलकर निपटने की ठोस तैयारी कर चुके हैं।



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