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होर्मुज़ स्ट्रेट पर ट्रंप का 'टोल डिप्लोमेसी' यू-टर्न; वियतनाम जैसे 'अनंत युद्ध' के दलदल में फंसने की आशंका, कच्चे तेल में 10% का रिकॉर्ड उछाल

by admin@bebak24.com on | 2026-07-16 14:43:11

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होर्मुज़ स्ट्रेट पर ट्रंप का 'टोल डिप्लोमेसी' यू-टर्न; वियतनाम जैसे 'अनंत युद्ध' के दलदल में फंसने की आशंका, कच्चे तेल में 10% का रिकॉर्ड उछाल

वाशिंगटन/तेहरान (बेबाक24): अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब अपने पांचवें महीने में प्रवेश करने जा रहा है, लेकिन शांति की उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान संकट को लेकर महज 24 घंटे के भीतर लिए गए एक बड़े 'यू-टर्न' ने पूरी दुनिया के राजनयिकों और आर्थिक बाजारों को चौंका दिया है।

पहले होर्मुज़ स्ट्रेट  से गुजरने वाले जहाजों पर 20 फीसदी सुरक्षा शुल्क (टोल) लगाने की घोषणा और फिर अगले ही दिन इस फैसले से पीछे हट जाना, यह साफ करता है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के चक्रव्यूह से निकलने के लिए छटपटा रहा है। 

24 घंटे का ड्रामा: पहले 20% टोल का ऐलान, फिर 'ट्रेड डील' की बात

सोमवार (13 जुलाई 2026) की सुबह राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक चौंकाने वाली पोस्ट लिखी। उन्होंने ऐलान किया कि अमेरिका, ईरानी शिपिंग पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को फिर से शुरू कर रहा है।

  • 20 फीसदी शुल्क की मांग: ट्रंप ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों (जिसमें अमेरिकी सहयोगियों के जहाज भी शामिल हैं) को 20 फीसदी टोल टैक्स देना होगा। ट्रंप का तर्क था कि इस बेहद अशांत क्षेत्र में सुरक्षा देने के लिए अमेरिकी सेना जो भारी खर्च कर रही है, यह टैक्स उसकी भरपाई करेगा।

  • मंगलवार को यू-टर्न: हालांकि, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद मंगलवार सुबह तक ट्रंप ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह वापस ले लिया। अब उन्होंने नया दांव चलते हुए कहा कि वह खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ "व्यापार और निवेश समझौते" करेंगे, जिसके बदले अमेरिका उनके जहाजों को होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता देगा।

अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?

पिछले महीने ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान द्वारा ऐसे ही टैक्स लगाने के विचार की आलोचना करते हुए कहा था— "मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग (International Waterways) पर टोल या शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं है।" अब ट्रंप के खुद टोल वसूलने के बयान ने अमेरिका की कानूनी स्थिति को ही विरोधाभासी बना दिया है।

ट्रुथ सोशल की एक पोस्ट और कच्चे तेल में 10% का महा-उछाल

ट्रंप की इस उलझन और नाकेबंदी की खबरों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तुरंत और बेहद खतरनाक असर देखने को मिला:

  • 6 साल का रिकॉर्ड टूटा: सोमवार को ट्रंप के नाकेबंदी वाले बयान के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 10% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह पिछले छह वर्षों में एक ही दिन में होने वाला सबसे बड़ा उछाल है।

  • मध्यावधि चुनाव पर संकट: ट्रंप को मंगलवार को अमेरिका में उपभोक्ता कीमतों (महंगाई) में गिरावट की राहत भरी खबर मिली थी, लेकिन अगर पूर्ण पैमाने पर यह युद्ध दोबारा भड़कता है, तो तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। इससे अमेरिका में महंगाई की एक नई लहर आएगी, जो नवंबर 2026 में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि संसदीय चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी लुटिया डुबो सकती है।

'एमओयू' का अंत और वियतनाम युद्ध जैसे दलदल का डर

करीब एक महीने पहले अमेरिका और ईरान के बीच जिस 'एमओयू' (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर हुए थे, उसे दोनों देशों ने अपनी-अपनी जीत बताया था। लेकिन वह समझौता इतना अस्पष्ट था कि मंगलवार सुबह 10:16 बजे ट्रंप के नए सैन्य हमलों और नाकेबंदी के आदेश के साथ ही वह पूरी तरह खत्म हो गया।

प्रशासनिक और सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अब एक ऐसी उलझन में हैं जहां से निकलने का कोई साफ रास्ता नहीं है:

1.सैन्य बढ़त बनाम राजनीतिक गतिरोध:असीमित सैन्य कार्रवाई की सीमा.

अमेरिकी सेना ने हवाई हमलों में ईरान के विमानों, जहाजों और ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन राजनीतिक रूप से ईरान झुकने को तैयार नहीं है। भौगोलिक बढ़त के कारण ईरान जब चाहे होर्मुज़ स्ट्रेट को ठप करने की क्षमता रखता है।

2.सीमित प्रभाव और परमाणु ठिकानों का संकट:पिकऐक्स माउंटेन पर नजर.

ट्रंप ने अब तेहरान के दक्षिण में स्थित 'पिकऐक्स माउंटेन' (अत्यंत सुरक्षित परमाणु अनुसंधान केंद्र) पर हमले की धमकी दी है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेनाइट की चट्टानों के सैकड़ों फीट नीचे बनी इन सुरंगों को हवाई हमलों से तबाह करना नामुमकिन के बराबर है।

3.वियतनाम जैसे 'अनंत युद्ध' का खतरा:घरेलू मोर्चे पर विरोध का डर.

खुद ट्रंप ने माना है कि वियतनाम जैसी लड़ाइयां कई वर्षों तक चली थीं। उनके समर्थक भी मध्य पूर्व (Middle East) में किसी ऐसे 'अनंत युद्ध' को दोहराना नहीं चाहते, जिसने कभी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन के राजनीतिक करियर को हमेशा के लिए दफन कर दिया था।

होर्मुज़ स्ट्रेट संकट 2026: मुख्य बिंदु

रणनीतिक पहलूवर्तमान स्थिति और प्रभाव
ट्रंप का यू-टर्नपहले 20% सुरक्षा टोल लगाने की घोषणा की, 24 घंटे में वापस लेकर 'इन्वेस्टमेंट डील' का प्रस्ताव दिया।
आर्थिक झटकाट्रुथ सोशल की पोस्ट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 10% का ऐतिहासिक उछाल
सैन्य स्थितिअमेरिका का ईरान के परमाणु केंद्र 'पिकऐक्स माउंटेन' पर हमले का इशारा; एमओयू और युद्धविराम पूरी तरह ध्वस्त।
रणनीतिक विश्लेषक (कौंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस)इलियट अब्राम्स के मुताबिक— "सवाल यह है कि धैर्य किसके पास ज्यादा है? बिना तेल बेचने वाले ईरान के पास या तेल पर निर्भर अमेरिका के पास?"

बेबाक24 टेक

डोनाल्ड ट्रंप हमेशा खुद को एक महान 'डीलमेकर' के रूप में पेश करते रहे हैं। उनका मानना रहा है कि वे अपनी आक्रामक बयानबाजी और 'मैडमैन थ्योरी' के दम पर ईरान को घुटनों पर ले आएंगे। लेकिन होर्मुज़ स्ट्रेट के मामले में उनकी यह रणनीति बैकफायर कर गई है।

बेबाक24 का मानना है कि 20 फीसदी टोल लगाने का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ तो था ही, साथ ही इसने अमेरिका के अपने सहयोगियों को भी नाराज कर दिया। यही वजह है कि ट्रंप को 24 घंटे में पीछे हटना पड़ा। ईरान सैन्य रूप से कमजोर होने के बाद भी केवल अपनी भौगोलिक स्थिति के दम पर दुनिया की 20% तेल सप्लाई लाइन की गर्दन दबाए बैठा है। ट्रंप न तो ओबामा से बेहतर कोई डील कर पा रहे हैं और न ही युद्ध को पूरी तरह खत्म कर पा रहे हैं। अगर यह संघर्ष इसी तरह घिसटता रहा, तो यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का 'वियतनाम' साबित हो सकता है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उनकी रिपब्लिकन पार्टी दोनों को भारी नुकसान पहुंचाएगा।



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