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अमेरिका-ईरान जंग पर पाकिस्तान का बड़ा बयान; प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी बोले— 'हिंसा रोकें दोनों देश, पिछले महीने के समझौते पर लौटें'

by on | 2026-07-16 21:05:00

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अमेरिका-ईरान जंग पर पाकिस्तान का बड़ा बयान; प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी बोले— 'हिंसा रोकें दोनों देश, पिछले महीने के समझौते पर लौटें'

इस्लामाबाद (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच भड़के सीधे सैन्य टकराव और होर्मुज स्ट्रेट में जारी भीषण तनाव पर पड़ोसी देश पाकिस्तान की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान ने दोनों देशों से तुरंत युद्ध और हिंसा को रोकने की अपील की है।

इस्लामाबाद में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने स्पष्ट किया कि वे दोनों शक्तिशाली देशों को बातचीत की मेज पर वापस लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखेंगे। 'बेबाक24' के अंतरराष्ट्रीय मामलों के डेस्क की यह विशेष रिपोर्ट:

'समझौते (MoU) के आधार पर दोबारा शुरू हो बातचीत'

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी (Tahir Andrabi) ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए दोनों देशों के बीच मध्यस्थता और शांति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया:

  • हिंसा समाप्ति की अपील: प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, "पाकिस्तान इस बेहद नाजुक मोड़ पर अमेरिका और ईरान दोनों को हिंसा का रास्ता छोड़ने और पिछले महीने (जून 2026) हुए आपसी समझौते (MoU) के आधार पर दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करता रहेगा।"

  • तकनीकी स्तर की वार्ता: उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान परिस्थितियों में शांति समझौते को जमीन पर लागू करने में कई गंभीर चुनौतियां हैं, लेकिन पाकिस्तान सभी पक्षों से हिंसा समाप्त करने और तकनीकी स्तर की वार्ता (Technical-level Talks) को बिना किसी देरी के फिर से शुरू करने की पुरजोर वकालत करता रहेगा।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पाकिस्तान की बड़ी चिंता

बीबीसी फारसी (BBC Persian) की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) की सुरक्षा को लेकर भी गहरी चिंता जताई:

  • मार्ग की सुरक्षा अहम: ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान को पूरी उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट में बनी युद्ध जैसी गंभीर स्थिति जल्द से जल्द सामान्य होगी।

  • जहाजों की निर्बाध आवाजाही: उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वैश्विक व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए इस अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की बिना किसी रुकावट (Unhindered Movement) के आवाजाही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।

क्यों बढ़ा है मिडिल ईस्ट में बारूद का धुआं?

पाकिस्तान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस सप्ताह के भीतर खाड़ी क्षेत्र में युद्ध चरम पर पहुंच गया है:

  • अमेरिका की बमबारी: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर खतरे का हवाला देते हुए ईरान के भीतर घुसकर उसके कमांड सेंटर्स, ड्रोन और एयर डिफेंस ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं।

  • ईरान का जवाबी प्रहार: इसके पलटवार में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों (विशेषकर कुवैत और बहरीन में मौजूद बेसों) पर हमला करने का दावा किया है, जिससे इस पूरे क्षेत्र में पूर्ण-युद्ध (Full-Scale War) का खतरा मंडरा रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव पर पाकिस्तान का रुख: मुख्य बिंदु

मुख्य पहलूपाकिस्तानी विदेश मंत्रालय (MoFA) का आधिकारिक स्टैंड
मुख्य प्रवक्ताताहिर अंद्राबी (विदेश मंत्रालय, पाकिस्तान)
मुख्य मांगअमेरिका और ईरान तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकें और हिंसा समाप्त करें।
समाधान का रास्तापिछले महीने (जून 2026) हस्ताक्षरित MoU के तहत तकनीकी स्तर की वार्ता फिर शुरू हो।
रणनीतिक चिंताहोर्मुज स्ट्रेट में तनाव खत्म हो, ताकि समुद्री व्यापारिक जहाजों को खतरा न हो।

बेबाक24 टेक

पश्चिम एशिया के इस महासंकट पर पाकिस्तान का यह बयान बेहद नपा-तुला और उसकी अपनी आर्थिक मजबूरियों को दर्शाता है। पाकिस्तान एक तरफ जहां ईरान का पड़ोसी देश है और उसके साथ द्विपक्षीय संबंध साझा करता है, वहीं दूसरी तरफ वह अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अमेरिकी मदद और आईएमएफ (IMF) के ऋण पर पूरी तरह निर्भर है। ऐसे में इस्लामाबाद किसी भी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करने की स्थिति में नहीं है।

बेबाक24 का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पाकिस्तान की चिंता पूरी तरह जायज है, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने पर सबसे पहला और गहरा आर्थिक झटका पाकिस्तान और भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों को ही लगेगा। हालांकि, केवल "उम्मीद" जताने और "प्रोत्साहित" करने से ट्रंप प्रशासन और ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व के बीच जारी इस बारूदी जंग को नहीं रोका जा सकता। देखना यह होगा कि चीन और अन्य वैश्विक शक्तियां इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं।



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