by on | 2026-07-16 20:56:22
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नई दिल्ली (बेबाक24): नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे प्रख्यात शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर कानूनी मोर्चे से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है।
लगातार 19 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक की तेजी से गिरती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (16 जुलाई 2026) को केंद्र सरकार को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि किसी भी नागरिक की जान सबसे ऊपर है और सरकार को इसे बचाने के लिए हर संभव कदम उठाने चाहिए। 'बेबाक24' के लीगल डेस्क की यह विशेष विस्तृत रिपोर्ट:
सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए वकील राकेश कुमार सैनी की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ऐतिहासिक टिप्पणी की:
अदालत की बड़ी टिप्पणी: हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने 'लाइव लॉ' की रिपोर्ट के मुताबिक कहा, "देश के हर नागरिक की जान बेहद कीमती है। किसी भी परिस्थिति में उसकी जान की रक्षा करना और उसे बचाना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। इसके लिए सरकार को हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए।"
दैनिक जांच का आदेश: खंडपीठ ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि सरकारी डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों की एक विशेष टीम द्वारा सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की हर दिन (Daily) गहन जांच की जाए। यदि जांच में किसी भी प्रकार के क्लीनिकल या चिकित्सा हस्तक्षेप (Treatment) की आवश्यकता महसूस होती है, तो सरकार बिना किसी देरी के उसे तुरंत मुहैया कराए।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए देश के सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को सरकार की मुस्तैदी का भरोसा दिलाया:
लगातार निगरानी: सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को अवगत कराया कि सरकारी डॉक्टर और मेडिकल एक्सपर्ट्स की टीम पहले से ही वांगचुक की सेहत पर पैनी नजर रखे हुए है और नियमित रूप से उनके वाइटल्स (Vital Signs) की जांच कर रही है।
आवश्यकता पर त्वरित इलाज: उन्होंने आश्वासन दिया कि डॉक्टरों की दैनिक मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जैसे ही जरूरत महसूस होगी, वांगचुक को तुरंत उचित और उच्च स्तरीय चिकित्सा उपचार दिया जाएगा।
याचिका का निपटारा: सॉलिसिटर जनरल के इस सकारात्मक और जिम्मेदार रुख की सराहना करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दैनिक जांच के अपने निर्देशों के साथ इस जनहित याचिका का सम्मानपूर्वक निपटारा (Dispose off) कर दिया।
अदालत में याचिका दायर करने वाले वकील राकेश कुमार सैनी ने सोनम वांगचुक के जीवन पर मंडराते खतरे को देखते हुए प्रशासन से बेहद सख्त कदम उठाने की मांग की थी:
अस्पताल शिफ्ट करने की मांग: याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र और दिल्ली सरकार को तुरंत आदेश दिया जाए कि वे वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर किसी बड़े सरकारी अस्पताल (जैसे एम्स या आरएमएल) में भर्ती कराएं।
जबरन खाना खिलाने का तर्क: याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि वांगचुक की जान बचाने के लिए यदि डॉक्टरों को जरूरी लगे, तो उन्हें जबरन खाना (Force-Feeding) या लिक्विड डाइट भी दी जानी चाहिए, ताकि उनके आंतरिक अंगों (Organs) को कोई गंभीर नुकसान न पहुंचे।
अदालत में जब यह सुनवाई चल रही थी, उसी समय सीनियर जनरल फिजिशियन डॉ. सतीश लांबा ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर 19वें दिन का आधिकारिक हेल्थ बुलेटिन जारी किया:
शारीरिक स्थिति: डॉ. लांबा के अनुसार, 28 जून से जारी इस कड़े अनशन के कारण अब तक सोनम वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है, जिससे उनका शरीर अत्यधिक कमजोर हो गया है। उनका ब्लड शुगर स्तर भी 80 mg/dL के आसपास दर्ज किया गया है।
राहत की बात: मेडिकल बुलेटिन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गंभीर कमजोरी के बावजूद वांगचुक के शरीर में पानी की मात्रा (Hydration Level) फिलहाल सामान्य बनी हुई है और वे मानसिक रूप से पूरी तरह सक्रिय, सचेत और बातचीत करने की स्थिति में हैं।
| न्यायिक पहलू | कोर्ट का निर्देश / वर्तमान स्थिति |
| सुनवाई करने वाली पीठ | मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ। |
| मुख्य निर्देश | केंद्र सरकार हर दिन डॉक्टरों के जरिए वांगचुक की मेडिकल जांच सुनिश्चित करे। |
| इलाज पर रुख | सेहत बिगड़ने या डॉक्टरों की सिफारिश पर तुरंत हर जरूरी इलाज कराया जाए। |
| सरकार का पक्ष | सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मेडिकल टीम द्वारा लगातार निगरानी का भरोसा दिया। |
| आंदोलन की स्थिति | 19वें दिन भी अनशन जारी, वजन 9 किलो से ज्यादा गिरा; 20 जुलाई को 'संसद मार्च' की तैयारी। |
दिल्ली हाई कोर्ट का यह निर्देश केवल एक कानूनी आदेश नहीं है, बल्कि यह भारतीय न्यायपालिका के मानवीय और संवेदनशील चेहरे को दर्शाता है। लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन जब बात 19 दिनों से भूखे एक प्रख्यात नागरिक की जान पर आ जाए, तो कोर्ट का यह दखल बेहद जरूरी हो जाता है। हाई कोर्ट ने "हर नागरिक की जान कीमती है" कहकर सरकार को उसकी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी याद दिलाई है।
बेबाक24 का मानना है कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कोर्ट में यह कहना कि सरकार डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाएगी, एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, केवल मेडिकल बुलेटिन और दैनिक जांच से इस समस्या का अंत नहीं होगा। 20 जुलाई को संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है और वांगचुक ने 'चलो संसद' मार्च का आह्वान कर रखा है। सरकार को चाहिए कि वह इस मामले को और ज्यादा बिगड़ने या कोर्ट के अगले दखल का इंतजार करने के बजाय, खुद पहल करे और शिक्षा मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के जरिए सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारी छात्रों से सीधे बातचीत कर इस गतिरोध को समाप्त कराए।
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