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पीएम बालेन शाह के खिलाफ अपनी ही पार्टी (RSP) में बगावत!

by admin@bebak24.com on | 2026-07-15 19:15:10

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पीएम बालेन शाह के खिलाफ अपनी ही पार्टी (RSP) में बगावत!

काठमांडू (बेबाक24): पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश नेपाल की जनता ने इसी साल 5 मार्च को हुए आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को ऐतिहासिक और भारी जनादेश दिया था। पार्टी गठन के महज चार साल के भीतर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर 27 मार्च 2026 को बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

लेकिन सत्ता संभाले अभी चार महीने भी पूरे नहीं हुए हैं कि पीएम बालेन शाह अपनी तानाशाही कार्यशैली और मनमाने फैसलों को लेकर चौतरफा घिर गए हैं। विपक्षी दल तो दूर, खुद उनकी ही पार्टी (आरएसपी) के सांसदों और पार्टी अध्यक्ष रबि लामिछाने ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 'बेबाक24' की यह विशेष राजनीतिक और जमीनी समीक्षा रिपोर्ट:

"हम यहां सिर्फ मेज थपथपाने नहीं आए": आरएसपी सांसदों का खुला विद्रोह

प्रतिनिधि सभा (संसद) की हालिया बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के भीतर का असंतोष और दरार खुलकर सामने आ गई। सांसदों ने सीधे तौर पर पीएम बालेन शाह की कार्यशैली को निशाने पर लिया:

  • सांसद जगदीश खरेल की चेतावनी: आरएसपी सांसद जगदीश खरेल ने संसद में बेहद तल्ख लहजे में कहा:

    "क्या सांसद के तौर पर हमारी भूमिका सिर्फ यहां बैठकर मेज थपथपाने तक सीमित है? इससे न हम संतुष्ट होंगे और न ही जनता। सरकार को यह समझना होगा कि वह सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत लोकप्रियता के भरोसे नहीं चल सकती। सांसदों की गरिमा और उनकी भूमिका का सम्मान होना ही चाहिए।"

  • खाद संकट पर घेराव: आरएसपी की ही महिला सांसद करिश्मा कथारिया ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध न कराने के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को सार्वजनिक माफी मांगने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि जब तेज बुखार में तड़पते किसान को 'पैरासिटामोल' से पहले खाद की जरूरत हो, तो सरकार का दिल क्यों नहीं पसीजता? सांसदों ने कृषि मंत्री गीता चौधरी की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल उठाए।

  • सांसद अमरेश कुमार सिंह की दो-टूक: सरलाही से आरएसपी सांसद अमरेश कुमार सिंह ने बालेन शाह को नसीहत देते हुए कहा:

    "लोकतंत्र में सवालों से परे कोई नहीं है। आप पूरे देश को एक मेट्रोपॉलिटन सिटी (नगरपालिका) की तरह हांक कर नहीं चला सकते। सरकार को अपनी कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करना होगा।"

रबि लामिछाने बनाम बालेन शाह: पार्टी बनाम सरकार की जंग

नेपाल के प्रमुख अंग्रेजी अखबार 'माय रिपब्लिका' की रिपोर्ट के अनुसार, आरएसपी के अध्यक्ष रबि लामिछाने खुद प्रधानमंत्री बालेन शाह के फैसलों से बेहद नाखुश हैं। रविवार को दोनों नेताओं के बीच एक बंद कमरे में तनावपूर्ण बैठक हुई:

  • अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर नाराजगी: लामिछाने ने काठमांडू और अन्य इलाकों में बिना किसी ठोस पुनर्वास नीति के जबरन चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान (Demolition Drive) पर गहरी चिंता व्यक्त की।

  • विपक्षी नेताओं की धरपकड़: सरकार द्वारा विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ताबड़तोड़ गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर भी पार्टी नेतृत्व ने असहमति जताई है।

  • संसद से दूरी: नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार युग पाठक के मुताबिक, बालेन शाह प्रधानमंत्री बनने के बाद संसद जाने से कतराते हैं। वे कुछ मिनटों के लिए आते हैं, सांसदों के सवालों का जवाब नहीं देते, यहां तक कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान भी वे बीच में ही उठकर चले गए।

गणेश नेपाली का आत्मदाह और 'जेन-ज़ी' (Gen-Z) युवाओं का आक्रोश

बालेन शाह को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाने में नेपाल की युवा और 'जेन-ज़ी' (Gen-Z) पीढ़ी का सबसे बड़ा हाथ था। लेकिन हालिया कुछ घटनाओं ने इस युवा वर्ग को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया है:

  • क्या था गणेश नेपाली कांड: रोजी-रोटी के लिए बाइक-राइडर का काम करने वाले गणेश नेपाली की बाइक को काठमांडू महानगर पुलिस ने पासपोर्ट कार्यालय के बाहर कथित गलत पार्किंग के लिए लॉक कर दिया और 1,000 नेपाली रुपये का जुर्माना ठोक दिया। पुलिस के इस अड़ियल और संवेदनहीन रवैये से तंग आकर गणेश ने वहीं आत्मदाह कर लिया। बीर अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद सोमवार को बागमती नदी के आर्यघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने पूरे काठमांडू को हिलाकर रख दिया है।

  • युवा आंदोलनकारियों पर पुलिसिया बर्बरता: बालेन शाह के धुर समर्थक रहे 26 वर्षीय कानून के छात्र और जेन-ज़ी आंदोलन के प्रमुख चेहरे मज्जिद अंसारी को कीर्तिपुर विस्थापित आश्रय केंद्र का दौरा करने के दौरान पुलिस ने बेरहमी से हिरासत में लिया। अन्य कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने अंसारी के चेहरे और सिर पर जूतों से लातें मारीं, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं।

बालेन शाह सरकार के खिलाफ बगावत के 5 मुख्य मोर्चे

विरोध का मोर्चा / नेताअसंतोष और बगावत की मुख्य वजह
जगदीश खरेल (RSP सांसद)पीएम की 'वन-मैन शो' कार्यशैली पर आपत्ति; सांसदों की अनदेखी का आरोप।
करिश्मा कथारिया (RSP सांसद)कृषि संकट और खाद की भारी किल्लत पर सरकार की नाकामी को उजागर किया।
रबि लामिछाने (RSP अध्यक्ष)अतिक्रमण हटाने के क्रूर तरीकों और गणेश नेपाली की मौत पर पीएम से नाराजगी।
युग पाठक (वरिष्ठ पत्रकार)संसद, राष्ट्रपति और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति पीएम के उदासीन रवैये पर सवाल।
जेन-ज़ी (Gen-Z) आंदोलनकारीबाइक राइडर के आत्मदाह और छात्र नेता मज्जिद अंसारी पर पुलिसिया दमन से आक्रोश।

बेबाक24 टेक

बालेन शाह का एक गैर-पारंपरिक राजनेता और सिस्टम-विरोधी 'रॉकस्टार' से देश के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर जितना रोमांचक था, सत्ता का असल गलियारा उतना ही कड़वा साबित हो रहा है। काठमांडू के मेयर के तौर पर उनकी 'लाठी-गोली' और बुल्डोजर वाली कड़क छवि सोशल मीडिया पर तो खूब तालियां बटोरती थी, लेकिन एक बहुसांस्कृतिक और लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका यही अड़ियल रवैया उनकी अपनी ही पार्टी के लिए गले की हड्डी बन गया है।

बेबाक24 का मानना है कि एक गरीब बाइक-राइडर गणेश नेपाली का महज ₹1,000 के जुर्माने और पुलिसिया उत्पीड़न से तंग आकर आत्मदाह कर लेना बालेन शाह के 'सुशासन' के दावों पर सबसे बड़ा तमाचा है। जिस युवा और 'जेन-ज़ी' पीढ़ी ने उन्हें पलकों पर बैठाया था, उसी के एक हिस्से को आज सड़कों पर पीटा जा रहा है। अगर बालेन शाह ने जल्द ही अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया, संसद के प्रति जवाबदेही नहीं दिखाई और अपनी पार्टी के सांसदों को भरोसे में नहीं लिया, तो जिस 'लोकप्रियता' के रथ पर सवार होकर वे सत्ता के शिखर पर पहुंचे थे, वही रथ उन्हें गर्त में गिराने में देर नहीं लगाएगा।



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