by admin@bebak24.com on | 2026-07-14 14:31:33
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वॉशिंगटन/तेहरान (बेबाक24): मध्य-पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य व रणनीतिक टकराव अब एक बेहद अनोखे और गंभीर आर्थिक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक चौंकाने वाला एलान करते हुए कहा कि अमेरिका ही होर्मुज़ स्ट्रेट का असली संरक्षक है और इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के एवज में वह वहां से गुजरने वाले जहाजों से 20 फीसदी टोल (सुरक्षा शुल्क) वसूलेगा।
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान भड़क गया है और दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। इस विवाद की जमीनी हकीकत क्या है और क्या अंतरराष्ट्रीय कानून अमेरिका को ऐसा टैक्स वसूलने की इजाजत देता है?
ट्रंप की इस घोषणा पर ईरान के शीर्ष सैन्य मुख्यालय 'खात्म अल-अंबिया' ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वे अमेरिका को होर्मुज़ स्ट्रेट के मैनेजमेंट में किसी भी तरह का दखल नहीं देने देंगे। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागी ने एक्स (X) पर तंज कसते हुए लिखा:
"अमेरिकी राष्ट्रपति बिल्कुल सही हैं। जो भी होर्मुज़ स्ट्रेट से कार्गो जहाजों की सुरक्षित और संरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता है, उसे इस सेवा के लिए भुगतान किया जाना चाहिए। ईरान हमेशा से होर्मुज़ स्ट्रेट का संरक्षक रहा है और हमेशा रहेगा। हालांकि, 20% निश्चित रूप से बहुत ज्यादा है। हम (टोल वसूलने में) निष्पक्ष रहेंगे।"
इस बीच, खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के जवाब में ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इन खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत) को सुरक्षा मुहैया कराएगा, लेकिन उसके बदले में उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमें इन देशों की जरूरत नहीं है, उन्हें हमारी जरूरत है। हमारे पास वेनेजुएला को मिलाकर खुद का बहुत सारा तेल है।"
डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी कानूनी चुनौतियों और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, अमेरिका का यह कदम पूरी तरह अवैध माना जा रहा है:
इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन का विरोध: संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा है, "हम अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवागमन के लिए इस्तेमाल होने वाले स्ट्रेट्स से गुजरने पर शुल्क लगाए जाने का सख्त विरोध करते हैं। सिर्फ किसी स्ट्रेट से गुजरने के लिए अनिवार्य टोल लागू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।"
शिपिंग इंडस्ट्री में चिंता: वैश्विक शिपिंग अधिकारियों का मानना है कि ऐसा कोई भी कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सीधा उल्लंघन होगा और इससे जहाजों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं मिलने वाली।
भौगोलिक और कानूनी दृष्टि से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
क्षेत्रीय जल सीमा का नियम: संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक, किसी भी देश का उसकी तटरेखा से 12 समुद्री मील (लगभग 22 किलोमीटर) तक के समुद्री क्षेत्र पर नियंत्रण होता है।
ईरान और ओमान का नियंत्रण: होर्मुज़ स्ट्रेट अपने सबसे संकरे हिस्से में इतना तंग है कि इसके दोनों शिपिंग लेस (जहाजी रास्ते) पूरी तरह से ईरान और ओमान की क्षेत्रीय समुद्री सीमा के भीतर आते हैं। यानी कानूनी तौर पर इस हिस्से पर केवल इन्हीं दो देशों का नियंत्रण है, अमेरिका का नहीं।
आर्टिकल 38 (ट्रांजिट पैसेज का अधिकार): संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून का आर्टिकल 38 यह स्पष्ट करता है कि दुनिया के 100 से अधिक महत्वपूर्ण जलमार्गों (जिसमें होर्मुज़ भी शामिल है) से होकर सभी देशों के जहाजों को बिना किसी बाधा के "ट्रांजिट पैसेज" का अधिकार है। कोई भी देश इस पर एकतरफा टैक्स नहीं थोप सकता।
| पैमाना / विषय | डोनाल्ड ट्रंप का दावा / अमेरिकी पक्ष | अंतरराष्ट्रीय कानून (UN) और भौगोलिक हकीकत |
| टोल / टैक्स | सुरक्षा के बदले जहाजों पर 20% शुल्क लगाएंगे। | अवैध। IMO के अनुसार अनिवार्य टोल लागू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। |
| भौगोलिक नियंत्रण | अमेरिका इस क्षेत्र की सुरक्षा का 'गार्डियन' (संरक्षक) है। | सबसे संकरा रास्ता पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री अधिकार क्षेत्र में आता है। |
| पारगमन का अधिकार | सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जहाजों का रास्ता रोकना या डायवर्ट करना। | आर्टिकल 38 के तहत दुनिया के सभी जहाजों को बिना रुकावट "ट्रांजिट पैसेज" का अधिकार है। |
होर्मुज़ स्ट्रेट को दुनिया की सबसे संवेदनशील 'आर्थिक जीवन रेखा' माना जाता है:
तेल और गैस का महामार्ग: इस तनाव से पहले दुनिया के कुल तेल का लगभग 25% और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की करीब 20% सप्लाई इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती थी।
तनाव की पृष्ठभूमि: इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए सीधे संघर्ष के बाद ईरान ने प्रभावी रूप से इस मार्ग को बंद कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी नौसेना ने भी ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की थी, जिसे जून में एक समझौते (MoU) के तहत हटाया गया था। लेकिन अब ट्रंप के ताजा बयान ने इस विवाद को दोबारा भड़का दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप का अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर 20% टोल लगाने का यह विचार व्यावहारिक से ज्यादा उनकी 'बिजनेस-फर्स्ट' विदेश नीति का हिस्सा दिखाई देता है। ट्रंप हर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समझौते को एक व्यापारिक सौदे की तरह देखते हैं, जहां वे अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के बदले सीधे पैसों की मांग करते हैं। लेकिन समुद्री मामलों में ऐसा करना अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने जैसा होगा।
बेबाक24 का मानना है कि यदि अमेरिका या ईरान में से किसी ने भी एकतरफा तरीके से इस वैश्विक जलमार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर भारी टैक्स या नाकेबंदी थोपने की कोशिश की, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इससे माल ढुलाई (Freight Rates) और कच्चे तेल की कीमतों में ऐसा ऐतिहासिक उछाल आएगा, जो दुनिया भर में बेकाबू महंगाई का कारण बन सकता है। अमेरिका और ईरान की इस 'जंग' में पीसना आम उपभोक्ताओं को ही पड़ेगा।
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