by admin@bebak24.com on | 2026-07-14 15:36:54
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नई दिल्ली/जंतर-मंतर (बेबाक24): दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। लद्दाख के प्रख्यात शिक्षाविद्, इंजीनियर और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
उनकी बिगड़ती सेहत ने समर्थकों और डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक बातचीत की कोई पहल नहीं की गई है। इस गतिरोध के बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के खिलाफ अपने सबसे बड़े रणनीतिक कदम का एलान कर दिया है।
जंतर-मंतर से जारी ताज़ा स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक, भीषण गर्मी और उमस के बीच अनशन पर बैठे 59 वर्षीय सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति तेज़ी से बिगड़ रही है:
गंभीर लक्षण: उनका वज़न 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है और ब्लड प्रेशर (BP) गिरकर 109/70 तक पहुंच गया है। उनका ब्लड शुगर लेवल भी काफी नीचे आ गया है।
चलने-फिरने में तकलीफ: सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि वांगचुक को बैठने या खड़े होने पर तेज चक्कर आ रहे हैं और वाशरुम तक जाना भी उनके लिए दूभर हो गया है। डॉक्टरों ने उन्हें अनशन तुरंत खत्म करने की चेतावनी दी है।
वांगचुक का संकल्प: समर्थकों की भावुक अपीलों को खारिज करते हुए वांगचुक ने बीबीसी से कहा, "मैं बाहर से कमज़ोर हूं, लेकिन अंदर से मजबूत हूं। मैंने जो शुरू किया है, उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा। जब तक सरकार जवाबदेही तय नहीं करती, अनशन खत्म नहीं होगा।"
यह पूरा आंदोलन देश के लाखों छात्रों के भविष्य और नीट (NEET) परीक्षा विवाद से जुड़ा हुआ है:
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग: सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
नीट पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी: आंदोलनकारियों का कहना है कि मई की शुरुआत में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे और अंततः परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए।
सरकार का रुख: दूसरी तरफ, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे से साफ इनकार करते हुए सीजेपी और प्रदर्शनकारियों को "विघटनकारी तत्वों की बी-टीम" करार दिया है।
पिछले 24 दिनों से चल रहे इस धरने और वांगचुक के 17 दिनों के अनशन के बावजूद सरकार की रहस्यमयी चुप्पी को देखते हुए सीजेपी ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है:
20 जुलाई को 'संसद मार्च' (Parliament March): सीजेपी ने एलान किया है कि यदि सरकार उनके पास बातचीत के लिए नहीं आती, तो वे खुद सरकार के पास जाएंगे। 20 जुलाई 2026 को, जिस दिन संसद का अगला सत्र शुरू हो रहा है, हज़ारों प्रदर्शनकारी छात्र और कार्यकर्ता जंतर-मंतर से संसद भवन की तरफ कूच करेंगे।
अभिजीत दीपके का बयान: "हम शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं। हम यह नहीं कह रहे कि हमें या सोनम सर को शिक्षा मंत्री बना दिया जाए। हमारी केवल इतनी मांग है कि जो मंत्री परीक्षाएं ठीक से नहीं करा सका, उसकी जिम्मेदारी तय हो। अब हम संसद जाकर अपनी मांगें सीधे सरकार के सामने रखेंगे।"
| मुख्य बिंदु / तारीख | वर्तमान स्थिति और विवरण |
| सोनम वांगचुक की स्थिति | 17वें दिन भी भूख हड़ताल जारी; वज़न 8.5 किलो घटा, कमजोरी अत्यधिक। |
| मुख्य मांग | नीट (NEET) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। |
| सीजेपी (CJP) का अगला कदम | 20 जुलाई 2026 को संसद के आगामी सत्र के पहले दिन 'संसद मार्च' का आयोजन। |
| समर्थन का दायरा | कई दलों के सांसद, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रो. नंदिता नारायण और देश भर से आए छात्र। |
सोनम वांगचुक जैसी वैश्विक धरोहर और 'आइस स्तूप' के जरिए पर्यावरण की रक्षा करने वाले सम्मानित व्यक्ति को अगर अपनी बात मनवाने के लिए दिल्ली की सड़कों पर इस तरह जान दांव पर लगानी पड़ रही है, तो यह हमारे लोकतांत्रिक तंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है। 'थ्री इडियट्स' के फुंसुख वांगडू की प्रेरणा रहे वांगचुक आज देश की रटंत और लचर शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ 'रीयल लाइफ' की जंग लड़ रहे हैं।
बेबाक24 का मानना है कि नीट पेपर लीक ने देश के करोड़ों होनहार छात्रों के भरोसे को तोड़ा है, ऐसे में जवाबदेही की मांग को 'विघटनकारी' कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। 20 जुलाई को होने वाला संसद मार्च दिल्ली पुलिस और प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बनने वाला है। बेहतर होगा कि गृह मंत्रालय या पीएमओ (PMO) तुरंत हस्तक्षेप करे और सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ने से पहले सीजेपी के प्रतिनिधियों के साथ टेबल पर बैठकर बातचीत का रास्ता निकाले, क्योंकि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के भविष्य (छात्रों) की है।
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