by on | 2026-07-14 21:58:43
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नई दिल्ली (बेबाक24): अपने बेबाक और डार्क ह्यूमर के लिए मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना (Samay Raina) कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। विकलांग लोगों (दिव्यांगों) पर की गई असंवेदनशील टिप्पणियों से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को समय रैना समेत पांच लोगों को कड़ी फटकार लगाते हुए भारी जुर्माना ठोक दिया है।
अदालती आदेशों की अवहेलना और कोर्ट को गुमराह करने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह सख्त रुख अपनाया है। 'बेबाक24' की यह विशेष कानूनी और मनोरंजन रिपोर्ट:
कानूनी मामलों की प्रतिष्ठित वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान समय रैना पर अदालती आदेशों का उल्लंघन करने के लिए पहले 10 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया था। हालांकि, बाद में कोर्ट ने नरमी दिखाते हुए इस राशि को कम करके तीन लाख रुपये कर दिया।
सीजेआई की सख्त चेतावनी: मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली बेंच ने समय रैना और अन्य आरोपियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, "यदि इस बार भी आपने कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया, तो जुर्माने की इस राशि को सीधे बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दिया जाएगा।"
कोर्ट को गुमराह करने का आरोप: समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "हमारा स्पष्ट मानना है कि समय रैना ने जानबूझकर कोर्ट को गुमराह किया है और हमारे पिछले आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया है।"
यह पूरा विवाद स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) नाम की एक बेहद दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जुड़ा हुआ है:
असंवेदनशील टिप्पणी का आरोप: क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि समय रैना ने एसएमए (SMA) के बेहद महंगे इलाज को लेकर बेहद असंवेदनशील टिप्पणियां की थीं और इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक पीड़ित व्यक्ति का सरेआम मजाक उड़ाया था।
नवंबर 2025 का पुराना आदेश: इस मामले पर सुनवाई करते हुए नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स को एक सुधारात्मक निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इन सभी को हर महीने कम से कम दो चैरिटी शो (कार्यक्रम) आयोजित करने होंगे, जिससे होने वाली कमाई को विकलांग लोगों के इलाज के लिए बने विशेष कोष (Fund) में जमा किया जा सके।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कोर्ट के सामने समय रैना की लापरवाही को उजागर किया। उन्होंने दलील दी, "समय रैना लगातार अपने कमर्शियल शो तो कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्होंने अब तक न तो एसएमए फाउंडेशन से कोई संपर्क किया है और न ही एसएमए से पीड़ित बच्चों या लोगों की मदद के लिए कोई कदम उठाया है।" इसी दलील के बाद कोर्ट का गुस्सा भड़क गया।
| मुख्य बिंदु / विषय | कोर्ट की कार्रवाई और आरोप के तथ्य |
| मुख्य आरोपी | स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना (Samay Raina) समेत 5 लोग। |
| जुर्माने की राशि | पहले 10 लाख रुपये लगाया, जिसे बाद में घटाकर 3 लाख रुपये किया गया। |
| मामले की पृष्ठभूमि | दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) के मरीजों का मजाक उड़ाने का आरोप। |
| अदालत की चेतावनी | आदेश का पालन न करने पर जुर्माना राशि 30 लाख रुपये करने की चेतावनी। |
| शिकायतकर्ता | क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन (Cure SMA India Foundation)। |
स्टैंड-अप कॉमेडी और 'डार्क ह्यूमर' के नाम पर किसी गंभीर बीमारी या शारीरिक रूप से अक्षम (दिव्यांग) लोगों का मजाक उड़ाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। समय रैना युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं, और ऐसे में उनकी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में उन्हें अपनी कला के जरिए ही प्रायश्चित करने का एक बेहतरीन मौका (चैरिटी शो करने का निर्देश) दिया था, लेकिन कमर्शियल मुनाफे के चक्कर में कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज करना भारी पड़ गया।
बेबाक24 का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाया गया यह जुर्माना देश के अन्य कंटेंट क्रिएटर्स और कॉमेडियन्स के लिए एक बड़ा सबक है। अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of Speech) का मतलब यह कतई नहीं है कि आप किसी लाचार व्यक्ति की बीमारी को पंचलाइन बना दें। समय रैना को अब बिना किसी चालाकी के 3 लाख का जुर्माना भरना चाहिए और कोर्ट के निर्देशानुसार एसएमए पीड़ितों की मदद के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि कानून से ऊपर कोई भी इन्फ्लुएंसर या सेलिब्रिटी नहीं हो सकता।
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