by admin@bebak24.com on | 2026-07-16 15:26:41
Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3074
नई दिल्ली/पटना (बेबाक24): देश की न्यायपालिका में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और यौन अपराधों की परिभाषा को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। पटना हाई कोर्ट के एक बेहद विवादित फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की थी कि 'छाती दबाना और सलवार उतारने का प्रयास करना' बलात्कार की कोशिश के दायरे में नहीं आता।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस टिप्पणी पर गहरा अफसोस जताते हुए जजों को यौन अपराधों के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत पर बल दिया है। पटना हाई कोर्ट का वह फैसला जिस पर मचा है बवाल
यह पूरा मामला बिहार के बांका जिले का है, जो साल 2008 का है:
क्या था मामला? 19 जनवरी 2008 को एक युवती अपने पिता के साथ आरोपी हिमांशु कुमार पाठक उर्फ मिथिया पाठक के फोटो स्टूडियो में फोटो खिंचाने गई थी। आरोप है कि हिमांशु ने लड़की के पिता को बाहर कंप्यूटर पर फोटो देखने को कहा और अंदर से स्टूडियो का दरवाजा बंद कर दिया। उसने लड़की के साथ जबरदस्ती की, उसकी छाती दबाई और सलवार खोलने का प्रयास किया। लड़की के शोर मचाने पर आरोपी दरवाजा खोलकर भाग गया।
निचली अदालत का फैसला (2013): ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376/511 (बलात्कार का प्रयास) और धारा 342 (बंधक बनाना) के तहत दोषी पाते हुए 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट ने बदला फैसला: आरोपी ने इस फैसले को पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट के जस्टिस पूर्णेदु सिंह ने अपने 23 पन्ने के फैसले में कहा कि चूंकि 'पेनिट्रेशन' (प्रवेश) का कोई सबूत या मेडिकल पुष्टि नहीं है, इसलिए इसे धारा 376/511 के तहत बलात्कार का प्रयास नहीं माना जा सकता।
हालांकि, कोर्ट ने माना कि आरोपी की हरकतें महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से की गई थीं, जो धारा 354 के तहत आती हैं। लेकिन अंततः तकनीकी खामियों और गवाहों के पलटने का हवाला देकर हाई कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने पटना हाई कोर्ट के इस विवादित आदेश का जिक्र किया:
कड़ा रुख: मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस वी. मोहना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने जब यह मामला आया, तो सीजेआई ने इस तरह के फैसले सुनाने से पहले पूरी कानूनी रिसर्च न किए जाने पर कड़ा अफसोस जताया।
विस्तृत आदेश की तैयारी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पटना हाई कोर्ट के इस विवादित फैसले को लेकर एक विस्तृत मार्गदर्शक आदेश पारित करेगा, ताकि भविष्य में इस तरह की असंवेदनशील टिप्पणियों पर लगाम लगाई जा सके।
यह पहला मौका नहीं है जब देश के विभिन्न हाई कोर्ट्स द्वारा यौन अपराधों को लेकर ऐसी हैरान करने वाली टिप्पणियां की गई हैं:
| कोर्ट और वर्ष | विवादित टिप्पणी/फैसला | सुप्रीम कोर्ट/जनता का रुख |
| बॉम्बे हाई कोर्ट (2021) | कपड़े के ऊपर से नाबालिग के स्तन को छूना यौन उत्पीड़न (POCSO) नहीं, क्योंकि 'स्किन-टू-स्किन' कॉन्टैक्ट नहीं था। | सुप्रीम कोर्ट ने इस बेतुके फैसले को तुरंत पलट दिया था। |
| इलाहाबाद हाई कोर्ट (मार्च 2025) | पीड़िता के स्तन को छूना और पायजामे की डोरी तोड़ना बलात्कार की कोशिश नहीं माना जा सकता। | सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च 2025 को स्वतः संज्ञान लेकर इस फैसले पर रोक लगा दी। |
| छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (फरवरी 2026) | बिना पेनिट्रेशन (प्रवेश) के केवल इजैक्युलेशन होना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता। | देश भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने इस पर तीखी आपत्ति जताई। |
| पटना हाई कोर्ट (जुलाई 2026) | छाती दबाना और जबरन सलवार उतारने का प्रयास बलात्कार की कोशिश नहीं है। | सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई और विस्तृत आदेश पारित करने की बात कही। |
इस संवेदनशील मुद्दे पर 'बेबाक24' ने महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों से बात की:
प्रतिनिधित्व की भारी कमी: पटना हाई कोर्ट की एक महिला वकील ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हाई कोर्ट के 110 साल से अधिक के इतिहास में बमुश्किल 10 महिला जज रही हैं। आज भी वहां 44 जजों में से सिर्फ दो महिला जज हैं। जब तक नीति-निर्धारण और निर्णय लेने वाले शीर्ष पदों पर महिलाओं की संख्या नहीं बढ़ेगी, तब तक ऐसे असंवेदनशील फैसले आते रहेंगे।"
आधिकारिक आंकड़े: केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में (17 मार्च 2026 तक) संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश भर के सभी हाई कोर्ट्स में कार्यरत कुल 803 जजों में से सिर्फ 113 महिलाएं हैं।
मनोवैज्ञानिक असर: क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट निधि सिंह ने 'बेबाक24' से बात करते हुए कहा, "ऐसे असंवेदनशील फैसलों से पीड़ित महिलाएं और उनके परिवार देश की न्याय व्यवस्था पर से भरोसा खो देते हैं। यह किसी भी सभ्य समाज के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।"
न्याय का मुख्य उद्देश्य केवल कानून की धाराओं की शाब्दिक व्याख्या करना नहीं, बल्कि उसके पीछे की मूल भावना और पीड़ित को सुरक्षा प्रदान करना है। पटना हाई कोर्ट का यह तर्क कि 'बिना पेनिट्रेशन के बलात्कार का प्रयास नहीं माना जा सकता' और आरोपी को पूरी तरह बरी कर देना, आपराधिक मनोवृत्ति के लोगों के हौसले बढ़ाने जैसा है। क्या कोई अपराधी किसी महिला की मर्जी के बिना उसकी छाती दबाता है और उसके कपड़े उतारने की कोशिश करता है, तो उसे केवल 'मर्यादा को ठेस पहुंचाना' मानकर छोड़ दिया जाना चाहिए?
बेबाक24 का मानना है कि ऐसे फैसले देश की आधी आबादी को कानूनी रूप से और असुरक्षित महसूस कराते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट के 'पायजामे की डोरी' वाले फैसले पर रोक लगाने के बाद अब पटना हाई कोर्ट के इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख बेहद सराहनीय है। समय आ गया है कि भारतीय न्यायपालिका में न केवल महिला जजों की भागीदारी बढ़ाई जाए, बल्कि पुरुष जजों के लिए भी जेंडर सेंसिटाइजेशन के अनिवार्य प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं, ताकि अदालतों की दहलीज पर आने वाली किसी भी पीड़ित बेटी को दोबारा मानसिक प्रताड़ना का शिकार न होना पड़े।
स्वास्थ्य सेवा में लापरवाही पर सख्त हुईं महिला आयोग उपाध्यक्ष ; जिला महिला अस्पताल में अव्यवस्था, प्राइवेट लैब और बाहर की दवा लिखने पर भड़कीं चारू चौधरी
धान खरीद की तैयारी पूरी, जिलाधिकारी का सख्त निर्देश: किसानों से अच्छा व्यवहार करें क्रय केंद्र प्रभारी
जब झूमीं काली गाड़ियाँ, तो मची खलबली: बाबा के दरबार में योगी संग बाहुबली!
ब्रेकिंग न्यूज़: नोनहरा कांड के पीड़ित परिवार से मिलेंगे LG मनोज सिन्हा, दौरा कल से
सपा विधायक वीरेंद्र यादव का आह्वान: '2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है'
बिहार चुनाव 2025: लखीसराय में भीषण हंगामा, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के काफिले पर पथराव-गोबर से हमला; भड़के सिन्हा ने कहा- 'इन RJD गुंडों की छाती पर चलेगा बुलडोजर!'
स्वास्थ्य सेवा में लापरवाही पर सख्त हुईं महिला आयोग उपाध्यक्ष ; जिला महिला अस्पताल में अव्यवस्था, प्राइवेट लैब और बाहर की दवा लिखने पर भड़कीं चारू चौधरी
धान खरीद की तैयारी पूरी, जिलाधिकारी का सख्त निर्देश: किसानों से अच्छा व्यवहार करें क्रय केंद्र प्रभारी
जब झूमीं काली गाड़ियाँ, तो मची खलबली: बाबा के दरबार में योगी संग बाहुबली!
ब्रेकिंग न्यूज़: नोनहरा कांड के पीड़ित परिवार से मिलेंगे LG मनोज सिन्हा, दौरा कल से
सपा विधायक वीरेंद्र यादव का आह्वान: '2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है'
बिहार चुनाव 2025: लखीसराय में भीषण हंगामा, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के काफिले पर पथराव-गोबर से हमला; भड़के सिन्हा ने कहा- 'इन RJD गुंडों की छाती पर चलेगा बुलडोजर!'