by admin@bebak24.com on | 2026-07-15 20:39:20
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कोलकाता (बेबाक24): पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बार फिर बहुत बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और कद्दावर नेताओं में शुमार मदन मित्रा ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है।
अभिषेक बनर्जी के बढ़ते दबदबे और कार्यशैली से लंबे समय से नाराज चल रहे मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर सीधे ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट का दामन थाम लिया है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में खलबली मचा दी है।
"पार्टी डूब रही है, लेकिन अभिषेक को बचाना जरूरी है": मदन मित्रा का बड़ा आरोप
बागी गुट में शामिल होने के तुरंत बाद मदन मित्रा ने पार्टी के भीतर चल रहे तानाशाही और परिवारवाद के माहौल पर खुलकर भड़ास निकाली। उन्होंने ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा:
"मैंने खुद अभिषेक बनर्जी को सुझाव दिया था कि वे पार्टी के भले के लिए छह महीने या एक साल के लिए अपने पद से पीछे हट जाएं। मैंने उनसे कहा था कि आइए पहले मिलकर पार्टी को मजबूत करते हैं, और फिर आप वापस आकर अपनी जगह ले सकते हैं। लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया और कहा कि मैं पार्टी नहीं छोड़ूंगा।"
मित्रा ने बेहद तल्ख लहजे में आगे कहा:
"आज पार्टी डूब रही है; नाव पूरी तरह डूब चुकी है। लोग मर रहे हैं। फिर भी, पार्टी ने यह आत्मघाती रास्ता चुना है कि बाकी सब मर जाएं तो ठीक है, लेकिन हर हाल में सिर्फ अभिषेक को बचाना जरूरी है। यह बहुत दुखद है। टीएमसी हम सबकी पार्टी है, फिर भी ऐसा लगता है कि यह सिर्फ और सिर्फ अभिषेक की सेवा करने और उनकी चाटुकारिता तक ही सीमित रह गई है।"
मदन मित्रा ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को भी सीधे शब्दों में अपनी सियासी ताकत का अहसास कराया:
"मैं ममता जी से गुज़ारिश करता हूं कि आइए इसे एक मैराथन की तरह देखें। रास्ते में हम दोबारा ज़रूर मिलेंगे। अब देखते हैं कि राजनीति के इस मैदान में कौन सा घोड़ा आगे निकलता है।"
मदन मित्रा जैसे कद्दावर और जमीन से जुड़े नेता का ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट में जाना यह साफ करता है कि टीएमसी के भीतर पुराना बनाम नया (Old Guard vs New Guard) का विवाद अब खुलकर विद्रोह का रूप ले चुका है। ऋतब्रत बनर्जी का यह गुट पिछले कुछ समय से ममता और अभिषेक के फैसलों को चुनौती दे रहा है, और मदन मित्रा के आने से इस बागी धड़े को भारी मजबूती मिली है, जो आने वाले दिनों में विधानसभा और स्थानीय राजनीति में टीएमसी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है।
| राजनीतिक घटनाक्रम | विवरण और प्रभाव |
| बागी नेता का नाम | मदन मित्रा (पूर्व वरिष्ठ टीएमसी नेता व ममता के पूर्व करीबी)। |
| नया ठिकाना | ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी तृणमूल गुट। |
| बगावत की मुख्य वजह | अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और पार्टी में केवल उन्हें प्राथमिकता दिए जाने से नाराजगी। |
| ममता बनर्जी को संदेश | सभी पदों से इस्तीफा देकर भविष्य में राजनीतिक 'मैराथन' और मुकाबले की खुली चुनौती। |
मदन मित्रा का टीएमसी छोड़ना ममता बनर्जी के लिए किसी बड़े व्यक्तिगत और राजनीतिक सदमे से कम नहीं है। मित्रा सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि कोलकाता और आसपास के जिलों में टीएमसी का एक बड़ा और चर्चित चेहरा रहे हैं। उनका यह बयान कि 'नाव डूब चुकी है और बाकी सब मर जाएं लेकिन अभिषेक को बचाना जरूरी है'—यह साफ करता है कि पार्टी के भीतर अंदरूनी लोकतंत्र पूरी तरह खत्म हो चुका है और सिर्फ एक परिवार का सिक्का चल रहा है।
बेबाक24 का मानना है कि ऋतब्रत बनर्जी और मदन मित्रा की यह जुगलबंदी बंगाल की राजनीति में टीएमसी के खिलाफ एक नया मोर्चा खोलने जा रही है। अगर ममता बनर्जी ने समय रहते पुराने नेताओं की इस नाराजगी को दूर नहीं किया और अभिषेक बनर्जी के फैसलों पर अंकुश नहीं लगाया, तो 2026 का यह साल टीएमसी के ऐतिहासिक बिखराव की शुरुआत साबित हो सकता है।
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