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"इन्हें हमारी ज़रूरत है, हमें इनकी नहीं!" खाड़ी देशों पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप; सऊदी अरब, यूएई और कतर से मांगी सुरक्षा की कीमत, होर्मुज़ स्ट्रेट पर 20% टैक्स का एलान

by admin@bebak24.com on | 2026-07-14 20:53:50

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"इन्हें हमारी ज़रूरत है, हमें इनकी नहीं!" खाड़ी देशों पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप; सऊदी अरब, यूएई और कतर से मांगी सुरक्षा की कीमत, होर्मुज़ स्ट्रेट पर 20% टैक्स का एलान

वाशिंगटन/व्हाइट हाउस (बेबाक24): ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देशों (Gulf Countries) को लेकर एक बेहद तल्ख और बड़ा बयान दिया है। ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद, व्हाइट हाउस में मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिका अब मुफ्त में किसी भी देश की सुरक्षा नहीं करेगा।

ट्रंप ने सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे अमीर देशों का नाम लेते हुए कहा कि इन देशों को अमेरिका की सुरक्षा के बदले भारी कीमत चुकानी होगी।

ट्रंप का दोटूक बयान: "हम दुनिया के सबसे अमीर हिस्से की मुफ्त सुरक्षा नहीं कर सकते"

व्हाइट हाउस से मीडिया को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को दोहराया:

  • सुरक्षा के बदले पैसा: डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "मैं चाहता हूं कि हमें सुरक्षा के बदले भुगतान (Payment) किया जाए, क्योंकि हम दुनिया के एक बेहद समृद्ध और अमीर हिस्से की सुरक्षा कर रहे हैं। हम इस पर अपना पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं।"

  • किन देशों का किया जिक्र: ट्रंप ने सीधे तौर पर उन देशों के नाम गिनाए जिन्हें अमेरिकी सुरक्षा की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हम जिन देशों की सुरक्षा कर रहे हैं, उनसे हमें पैसा मिलेगा। जैसे सऊदी अरब है, यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) है, कतर है, बहरीन है, कुवैत है और दूसरे देश भी हैं। हमें इन देशों की कोई जरूरत नहीं है। इसके उलट उन्हें हमारी जरूरत है।"

  • तेल पर आत्मनिर्भरता का दावा: खाड़ी देशों के तेल पर निर्भरता को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमारे पास अब वेनेजुएला को मिलाकर बहुत सारा तेल है, इसलिए हमें तेल के लिए उन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।"

 ईरान की घेराबंदी: बंदरगाहों की नाकाबंदी और होर्मुज़ स्ट्रेट पर 20% शुल्क का एलान

ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में ट्रंप ने केवल बयानबाजी नहीं की, बल्कि दो बेहद कड़े आर्थिक और सैन्य कदमों की भी घोषणा कर दी है:

  • ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाहों (Ports) की पूरी तरह से नाकाबंदी (Blockade) करेगी, जिससे ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा।

  • होर्मुज़ स्ट्रेट पर 20% का 'ट्रंप टैक्स': दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी कार्गो और कमर्शियल जहाजों पर 20 फीसदी सुरक्षा शुल्क (Tariff/Toll) लगाने का एलान कर ट्रंप ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप का तर्क है कि इस इलाके में सुरक्षा मुहैया कराने का खर्च अमेरिका उठाता है, इसलिए यहां से गुजरने वाले जहाजों को टैक्स देना होगा।

ट्रंप का खाड़ी देशों पर रुख और बड़े एलान: एक नजर में

प्रभावित देश / क्षेत्रडोनाल्ड ट्रंप का कदम और बयान
खाड़ी देश (सऊदी, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत)इन्हें अमेरिकी सुरक्षा के बदले भुगतान करना होगा; अमेरिका को इनकी जरूरत नहीं।
ईरान (Iran)ईरान के सभी व्यावसायिक और सैन्य बंदरगाहों की अमेरिका करेगा पूर्ण नाकाबंदी।
होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz)इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी कार्गो जहाजों पर 20% शुल्क अनिवार्य।
तेल का विकल्पअमेरिका के पास खुद का और वेनेजुएला को मिलाकर पर्याप्त तेल भंडार मौजूद।

बेबाक24 टेक

डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान खाड़ी देशों के मुंह पर एक तगड़ा कूटनीतिक तमाचा है। सऊदी अरब और यूएई जैसे देश दशकों से अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी छाते (Military Umbrella) पर निर्भर रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि उनके शासनकाल में 'मुफ्त की सुरक्षा' का दौर खत्म हो चुका है। हालांकि, होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 20 फीसदी का एकतरफा शुल्क लगाना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों (International Maritime Law) का खुला उल्लंघन माना जा सकता है।

बेबाक24 का मानना है कि ट्रंप के इस फैसले से वैश्विक व्यापार में भारी हड़कंप मचेगा। होर्मुज़ स्ट्रेट से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है, ऐसे में 20% अतिरिक्त शुल्क लगने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, उनके लिए यह महंगाई का एक नया और बड़ा झटका साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि सऊदी अरब और यूएई ट्रंप की इस 'बिजनेस डिप्लोमेसी' पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।



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