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'फेक न्यूज अलर्ट!' भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द होने की रिपोर्ट पर भड़के पीयूष गोयल और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

by admin@bebak24.com on | 2026-07-14 20:17:09

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'फेक न्यूज अलर्ट!' भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द होने की रिपोर्ट पर भड़के पीयूष गोयल और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

नई दिल्ली/वॉशिंगटन (बेबाक24): भारत और अमेरिका के बीच होने वाले ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Deal) को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई एक रिपोर्ट पर दोनों देशों ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) की उस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि भारत ने अमेरिका के साथ जल्दबाजी में ट्रेड डील करने से इनकार कर दिया है।

दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर आकर इस खबर को 'फेक न्यूज' करार दिया और स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत बेहद सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। 'बेबाक24' की विशेष बिजनेस और डिप्लोमैटिक रिपोर्ट:

रॉयटर्स की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया था?

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में गतिरोध आ गया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत ने अमेरिका के साथ किसी भी जल्दबाजी वाले व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया है और भारत इस डील में अपने हितों के लिए और बेहतर शर्तों व रियायतों की उम्मीद कर रहा है। इस खबर के सामने आते ही वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई थीं।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का तीखा पलटवार: "पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक"

रॉयटर्स की रिपोर्ट पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए भारत के केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे एजेंडा आधारित और भ्रामक बताया। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा:

"यह खबर पूरी तरह से झूठी, बेबुनियाद और भ्रामक है। जून में नई दिल्ली दौरे पर आए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीयर के साथ मेरी बेहद शानदार और सकारात्मक बैठकें हुई थीं। दोनों पक्षों ने एक ऐसे व्यापार समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है, जो संतुलित हो, सार्थक हो और दोनों देशों के कारोबारियों, किसानों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं के लिए समान रूप से लाभ सुनिश्चित करे।"

पीयूष गोयल ने आगे साफ किया कि दोनों देशों की तकनीकी टीमें इस ऐतिहासिक उद्देश्य को जल्द से जल्द हासिल करने के लिए जमीन पर पूरी तरह सक्रियता से काम कर रही हैं।

अमेरिकी राजदूत ने जारी किया 'फेक न्यूज़ अलर्ट': "किसी ने कुछ खारिज नहीं किया"

भारत के सुर में सुर मिलाते हुए भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी रॉयटर्स की रिपोर्ट की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने रॉयटर्स की खबर को कोट करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा:

  • फेक न्यूज अलर्ट!: अमेरिकी राजदूत ने सीधे तौर पर इसे 'फेक न्यूज' करार दिया।

  • सकारात्मक बातचीत: सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया, "किसी भी पक्ष ने किसी भी प्रस्ताव को खारिज नहीं किया है। दोनों देशों के बीच बेहद सकारात्मक माहौल में बैठकें हुई हैं और ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की आपसी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया गया है। हम इस दिशा में लगातार और सक्रिय रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।"

भारत-अमेरिका ट्रेड डील विवाद: मुख्य तथ्य

विषय / बिंदुरॉयटर्स (Reuters) का दावाभारत और अमेरिका का आधिकारिक रुख
ट्रेड डील का स्टेटसभारत ने जल्दबाजी में डील करने से मना किया; बातचीत अटकी।बातचीत बेहद सकारात्मक; डील को अंतिम रूप देने के लिए दोनों पक्ष प्रतिबद्ध।
बैठक का इनपुटबेहतर शर्तों के इंतजार में भारत ने प्रस्ताव ठुकराया।जून के आखिर में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर के साथ बैठक शानदार रही।
भविष्य की रणनीतिडील में लंबा वक्त लग सकता है।दोनों देशों की टीमें संतुलित और सार्थक समझौते के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।

बेबाक24 टेक

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार का दायरा लगातार बढ़ रहा है, और जब भी दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं किसी बड़े ट्रेड समझौते के करीब पहुंचती हैं, तो वैश्विक स्तर पर ऐसी लॉबिंग और भ्रामक रिपोर्ट आना कोई नई बात नहीं है। जून के आखिर में नई दिल्ली में हुई हाई-लेवल फ्रेमवर्क बैठक के बाद यह साफ था कि दोनों देश एक ऐसा व्यावहारिक समझौता चाहते हैं जिससे भारत के किसानों-कारोबारियों और अमेरिका के हितों में टकराव न हो।

बेबाक24 का मानना है कि पीयूष गोयल और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर द्वारा त्वरित और आक्रामक तरीके से इस रिपोर्ट का खंडन करना यह दिखाता है कि भारत-अमेरिका के कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ते कितने परिपक्व हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसियों को भी रणनीतिक रूप से संवेदनशील ऐसी खबरों को छापने से पहले दोनों सरकारों के आधिकारिक बयानों की प्रतीक्षा करनी चाहिए। यह साफ है कि डील अटकी नहीं है, बल्कि दोनों देश 'जल्दबाजी' के बजाय एक 'मजबूत और टिकाऊ' समझौते की नींव रख रहे हैं।



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