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ज्ञानवापी विवाद: मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी देश की निगाहें

by on | 2026-07-14 19:25:05

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ज्ञानवापी विवाद: मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी देश की निगाहें

विशेष संवाददाता, 

वाराणसी। काशी के बहुचर्चित ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट की पहल पर शुरू हुई मध्यस्थता (Mediation) प्रक्रिया बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई है। दोनों पक्षों के बीच किसी साझा सहमति पर न पहुंच पाने के बाद, अब इस संवेदनशील धार्मिक-ऐतिहासिक मामले का भविष्य पूरी तरह से सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले पर टिक गया है।

​सदियों पुराने विवाद में सुलह की राह बंद

​मामले में हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने मध्यस्थता प्रक्रिया के विफल होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इतने पुराने और जटिल मामले में मध्यस्थता के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद पहले से ही बेहद कम थी। चतुर्वेदी के मुताबिक, सदियों पुराने इस विवाद से दोनों पक्षों की गहरी धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाएं जुड़ी हैं, जिसके कारण किसी सर्वमान्य समझौते पर पहुंचना आसान नहीं था।

"हम पहले से ही इस बात की संभावना मानकर चल रहे थे कि मध्यस्थता से बात नहीं बनेगी। अब बातचीत का दौर खत्म हो चुका है और मामला एक बार फिर पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है।"

— सुभाष नंदन चतुर्वेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता (हिंदू पक्ष)


​सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी गोपनीय रिपोर्ट

​अधिवक्ता चतुर्वेदी ने बताया कि मध्यस्थता पैनल द्वारा तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट अब जल्द ही सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी जाएगी। इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद शीर्ष अदालत आगे की नियमित सुनवाई की तारीख और आवश्यक दिशा-निर्देश तय करेगी। मध्यस्थता के विफल होने के बाद, अब कोर्ट साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाएगा।

​पूजा के अधिकार पर अडिग हिंदू पक्ष

​हिंदू पक्ष ने एक बार फिर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा है कि ज्ञानवापी परिसर में हिंदू श्रद्धालुओं को उनके धार्मिक अधिकारों के अनुरूप नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन की अनुमति दी जानी चाहिए।

​कानूनी जानकारों का मानना है कि मध्यस्थता प्रक्रिया के बेनतीजा रहने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण होगा। अदालत की अगली सुनवाई पर न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि कोर्ट का जो भी आदेश आएगा, वह सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी होगा।



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