by admin@bebak24.com on | 2026-07-14 21:10:23
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नई दिल्ली/धार (बेबाक24): मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर (Bhojshala-Kamal Maula Mosque Complex) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील अंतरिम आदेश जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) के उस फैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें भोजशाला परिसर को 'देवी सरस्वती का मंदिर' घोषित कर वहां नमाज़ पढ़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। 'बेबाक24' की यह विशेष कानूनी रिपोर्ट:
कानूनी मामलों की प्रतिष्ठित वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि हाई कोर्ट के फैसले पर तुरंत अंतरिम रोक लगाई जाए और वहां पहले की तरह शुक्रवार को नमाज़ अदा करने और निर्धारित दिनों में हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दी जाए।
अदालत का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की 'यथास्थिति' (Status Quo) बहाल करने की इस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया। यानी हाई कोर्ट द्वारा परिसर के भीतर नमाज़ पर लगाई गई रोक फिलहाल जारी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश की अहम टिप्पणी: सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने देश के सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए बेहद गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "हमें ऐसा कोई भी आदेश पारित करने से बचना चाहिए, जिससे जमीन पर (धार्मिक) तनाव पैदा हो।"
भले ही सुप्रीम कोर्ट ने विवादित परिसर के भीतर नमाज़ की इजाजत नहीं दी, लेकिन मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं और इबादत के अधिकार को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश की राज्य सरकार को एक विशेष निर्देश दिया है:
खुली जगह देने का आदेश: सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह भोजशाला-कमाल मौला परिसर से ठीक सटे हुए एक अलग खुले स्थान (Open Space) को चिन्हित करे।
अस्थायी व्यवस्था: इस वैकल्पिक खुली जगह पर मुस्लिम पक्ष को प्रत्येक शुक्रवार को दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे के बीच नमाज़ अदा करने की अनुमति दी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह एक पूरी तरह से अस्थायी (Temporary) व्यवस्था है, जब तक कि इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता।
| विवाद का विषय | हाई कोर्ट का पिछला फैसला | सुप्रीम कोर्ट (SC) का ताज़ा अंतरिम आदेश |
| परिसर की स्थिति | ऐतिहासिक भोजशाला को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर घोषित किया था। | हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी। |
| परिसर के अंदर नमाज़ | पूरी तरह से प्रतिबंधित (रोक)। | परिसर के भीतर नमाज़ पर रोक बरकरार; कोई राहत नहीं। |
| शुक्रवार की नमाज़ | कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। | परिसर से सटे खुले स्थान पर दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज़ की अस्थायी छूट। |
धार का भोजशाला विवाद अयोध्या और ज्ञानवापी की तरह ही दशकों पुराना और बेहद संवेदनशील धार्मिक-कानूनी मुद्दा है। हाई कोर्ट द्वारा एएसआई (ASI) के सर्वे के आधार पर इसे सरस्वती मंदिर घोषित करने के बाद से ही इलाके में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह ताजा फैसला कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच एक बेहतरीन कूटनीतिक और कानूनी संतुलन (Balance) बनाने का प्रयास है।
बेबाक24 का मानना है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की यह टिप्पणी कि "तनाव बढ़ाने वाले आदेश से बचना चाहिए", यह दिखाता है कि न्यायपालिका केवल किताबों में लिखे कानून नहीं, बल्कि देश की जमीनी शांति को भी प्राथमिकता दे रही है। विवादित परिसर के भीतर नमाज़ की मनाही करके जहां कानूनी स्टेटस को बनाए रखा गया है, वहीं परिसर के बाहर नमाज़ के लिए 2 घंटे का वक्त और जगह देना मुस्लिम पक्ष को एक बड़ी व्यावहारिक राहत है। अब मध्य प्रदेश प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वह कोर्ट के इस आदेश को शांतिपूर्ण तरीके से जमीन पर लागू करवाए ताकि धार में सांप्रदायिक सौहार्द न बिगड़े।
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