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पंजाब कांग्रेस में छिड़ा घमासान: सीएम रेस पर बोले राजा वड़िंग— 'राहुल गांधी जिसे भी मुख्यमंत्री बनाएंगे, मैं उनके साथ खड़ा मिलूंगा'

by admin@bebak24.com on | 2026-07-04 16:42:53

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पंजाब कांग्रेस में छिड़ा घमासान: सीएम रेस पर बोले राजा वड़िंग— 'राहुल गांधी जिसे भी मुख्यमंत्री बनाएंगे, मैं उनके साथ खड़ा मिलूंगा'

पॉलिटिकल डेस्क (बेबाक24): पंजाब विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly Elections) की सरगर्मियों के बीच पंजाब कांग्रेस के भीतर की गुटबाज़ी और अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर चौराहे पर आ गई है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग (Amrinder Singh Raja Warring) ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए एक बड़ा बयान दिया है और खुद को मुख्यमंत्री पद की रेस से पूरी तरह बाहर घोषित कर दिया है।

पंजाब चुनावों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी का सीएम चेहरा (CM Face) बनाए जाने की उठ रही मांग और अपने ही नेताओं द्वारा खुद के 'बहिष्कार' के बयानों पर राजा वड़िंग ने बेहद सधे हुए अंदाज में आलाकमान पर फैसला छोड़ने की बात कही है।

1. "खड़गे जी और राहुल गांधी लेंगे फैसला, मेरा मकसद सरकार बनाना" — वड़िंग

पार्टी के भीतर चन्नी समर्थकों की लामबंदी पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा:

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग: "देखिए, मैं यह साफ़ तौर पर कह रहा हूं कि चाहे चन्नी साहब मुख्यमंत्री का चेहरा बनें या कोई और बने, लेकिन मैं इस रेस में बिल्कुल नहीं हूं। मैं, यानी राजा वड़िंग, इस रेस से बाहर हूं। राहुल गांधी जिसे भी पंजाब का मुख्यमंत्री बनाएंगे, राजा वड़िंग उसके साथ मजबूती से खड़ा मिलेगा और उसका पूरा समर्थन करेगा।"

उन्होंने आगे जोड़ा कि सीएम चेहरे को लेकर अंतिम फ़ैसला राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी लेंगे। इस समय उनका केवल एक ही मक़सद है कि पंजाब राज्य में कांग्रेस की सरकार दोबारा बनाई जाए, न कि किसी पद की रेस में भाग लिया जाए।

2. चन्नी के घर जुटी 'विद्रोही' ब्रिगेड; राजा वड़िंग को हटाने की उठी मांग

दरअसल, राजा वड़िंग का यह रक्षात्मक और बड़ा बयान शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के आवास पर हुई एक सीक्रेट और बड़ी बैठक के बाद आया है। इस बैठक के बाद पंजाब कांग्रेस के भीतर की दरारें पूरी तरह जगजाहिर हो गईं:

  • चन्नी की सोशल मीडिया पोस्ट: बैठक के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने एक्स (X) पर लिखा, "कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मेरे घर आकर मुझसे मुलाक़ात की और मुझसे विशेष आग्रह किया कि मैं पंजाब के लोगों की भावनाओं और आकांक्षाओं को कांग्रेस हाई कमान के सामने रखूं।"

  • "राजा वड़िंग का हो बहिष्कार" — दर्शन सिंह बराड़: बैठक से बाहर आते ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता दर्शन सिंह बराड़ ने सीधे प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने बेबाक अंदाज में कहा, "चन्नी जी के आवास पर सिर्फ़ एक ही बात पर चर्चा हुई है कि वर्तमान राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का पूरी तरह बहिष्कार किया जाना चाहिए। उनकी जगह चरणजीत सिंह चन्नी को तुरंत राज्य अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए और उन्हें ही मुख्यमंत्री का चेहरा भी घोषित किया जाना चाहिए।"

  • बराड़ ने आगे राजा वड़िंग पर काम न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हम चन्नी के नाम पर ही पंजाब में वोट हासिल करेंगे और अगर उन्हें आगे बढ़ाया जाता है, तभी कांग्रेस राज्य में सरकार बनाएगी।

2. बेबाक24 टेक

पंजाब कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि जब-जब चुनाव नजदीक आते हैं, पार्टी के बड़े नेता विपक्ष से लड़ने के बजाय आपस में ही 'कुश्ती' लड़ने लगते हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह बनाम नवजोत सिंह सिद्धू, फिर सिद्धू बनाम चरणजीत सिंह चन्नी और अब चन्नी समर्थकों का सीधे वर्तमान अध्यक्ष राजा वड़िंग के खिलाफ खुला विद्रोह— यह दिखाता है कि पंजाब कांग्रेस ने अतीत की गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा है। राजा वड़िंग का यह कहना कि "राहुल गांधी जिसे भी सीएम बनाएंगे, मैं उसके साथ हूं", असल में एक सोची-समझी कूटनीतिक 'फेस-सेविंग' (गरिमा बनाए रखने की) रणनीति है, क्योंकि वह जानते हैं कि चन्नी गुट ने आलाकमान के सामने उनकी घेराबंदी तेज कर दी है।

'बेबाक24' का मानना है कि दर्शन सिंह बराड़ का सरेआम यह कहना कि "राजा वड़िंग काम नहीं करते और उनका बहिष्कार होना चाहिए", चुनाव से ठीक पहले पार्टी के अनुशासन की धज्जियां उड़ाने जैसा है। चरणजीत सिंह चन्नी को दोबारा आगे करके कांग्रेस दलित कार्ड खेलने की तैयारी में तो है, लेकिन अगर संगठन के भीतर ही अध्यक्ष का इस तरह सरेआम विरोध होगा, तो आम कार्यकर्ताओं के बीच क्या संदेश जाएगा? मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के लिए पंजाब की यह गुटबाज़ी एक बार फिर बड़ी सिरदर्दी बनने वाली है। अगर हाई कमान ने समय रहते इस कलह को 'बेबाक' फैसले से शांत नहीं किया, तो पंजाब की सत्ता में वापसी का कांग्रेस का सपना एक बार फिर अंदरूनी बगावत की भेंट चढ़ सकता है।



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