by admin@bebak24.com on | 2026-07-04 16:33:23
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नेशनल डेस्क (बेबाक24): देश की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति को आगे बढ़ाते हुए भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार (4 जुलाई 2026) को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) से भारत-विरोधी साजिशें रचने वाले 23 खूंखार अपराधियों को 'ग़ैरक़ानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत आधिकारिक तौर पर 'आतंकवादी' घोषित कर दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय (Office of Home Minister) ने इस संबंध में जारी सरकारी गजट नोटिफिकेशन को साझा करते हुए पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ने का साफ कूटनीतिक और कानूनी संदेश दिया है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए कड़े आधिकारिक आदेश के मुताबिक, इन सभी आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों के पास पुख्ता और अकाट्य सबूत हैं:
खूंखार संगठनों से संबंध: ब्लैकलिस्ट किए गए इन 23 लोगों का सीधा संबंध भारत में कई बड़े हमलों के गुनहगार रहे जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और कुछ अन्य प्रतिबंधित वैश्विक आतंकवादी संगठनों से है।
आतंकियों का प्रोफाइल: घोषित किए गए इन 23 आतंकवादियों में से 17 पाकिस्तान के मूल नागरिक हैं, जबकि 6 ऐसे भारतीय नागरिक (भगोड़े) हैं जो वर्तमान समय में पाकिस्तान और पीओके (PoK) में शरण लेकर भारत के खिलाफ डिजिटल और जमीनी आतंकी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यालय द्वारा साझा किए गए आधिकारिक बयान में इन आतंकियों की पूरी जन्मकुंडली और भारत-विरोधी हरकतों का ब्यौरा दिया गया है:
"घोषित किए गए ये सभी आतंकवादी लगातार भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इन पर भारतीय सरजमीं पर आतंकवादी हमले करने, युवाओं को आतंकवाद के लिए उकसाने और रेडिकलाइज करने, अत्याधुनिक हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ कराने, सक्रिय आतंकवादी संगठनों को लॉजिस्टिक मदद पहुंचाने, हवाला के जरिए धन जुटाने (टेरर फंडिंग) और नए आतंकवादियों की भर्ती करने जैसे बेहद गंभीर और अक्षम्य आरोप हैं।"
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) कानून केंद्र सरकार को यह विशेष और संप्रभु अधिकार देता है कि अगर देश की खुफिया एजेंसियों को किसी व्यक्ति के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का पक्का इनपुट मिलता है, तो बिना किसी देरी के उसका नाम 'डेज़िग्नेटेड टेररिस्ट्स' (Designated Terrorists) यानी घोषित आतंकवादी की सूची में व्यक्तिगत रूप से जोड़ा जा सकता है।
हथियारों व वित्तीय स्रोतों पर बैन: इस सूची में नाम शामिल होने के बाद भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को यह कानूनी शक्ति मिल जाती है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों और बैंकों के सहयोग से इन व्यक्तियों के सभी वैश्विक व घरेलू वित्तीय संसाधनों (बैंक खातों) को फ्रीज और ब्लॉक कर सके।
संपत्ति ज़ब्ती: इसके साथ ही इनकी हथियारों की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू होगा और भारत में मौजूद इनकी या इनके सहयोगियों की किसी भी बेनामी संपत्ति को एनआईए तुरंत ज़ब्त (Attach) कर सकेगी।
शनिवार को भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान में बैठे 17 पाकिस्तानियों और 6 भगोड़े भारतीयों को यूएपीए के तहत आतंकी घोषित करना, नई दिल्ली की 'ऑफेंसिव-डिफेंस' (आक्रामक रक्षा) नीति का एक बेहतरीन उदाहरण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा माउंट रशमोर से "ईरान को बुरी तरह हराने और वेनेज़ुएला को ढहाने" वाले भाषण के ठीक बाद भारत का यह कड़ा फैसला यह दिखाता है कि भारत भी अपने पड़ोस में पनप रहे टेरर-लॉन्च पैड्स और उनके आकाओं के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है। पाकिस्तान लंबे समय से इन 6 भारतीय मूल के गद्दारों और लश्कर-जैश के गुर्गों को 'नॉन-स्टेट एक्टर्स' कहकर सुरक्षा कवच देता रहा है, लेकिन अब भारत ने उन्हें नामजद करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामाबाद को फिर से बेनकाब कर दिया है।
'बेबाक24' का मानना है कि केवल नाम घोषित कर देने से जमीनी हकीकत तब तक नहीं बदलेगी, जब तक एनआईए इनके लोकल स्लीपर सेल्स और हवाला ऑपरेटरों पर चौतरफा प्रहार नहीं करती। इन 23 आतंकियों के नाम 'डेज़िग्नेटेड लिस्ट' में आने के बाद अब भारत के पास यह कूटनीतिक अधिकार है कि वह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) और संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान को फिर से घेर सके। पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (PoK) में पहले से ही चुनावों को लेकर जो आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल मची है, उसके बीच भारत का यह सख्त रुख सीमा पार बैठे आतंकियों के हौसलों को पस्त करने के लिए बेहद जरूरी और बेबाक कदम है।
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