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संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दी जानकारी; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लगाई मुहर

by admin@bebak24.com on | 2026-07-04 16:34:26

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संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दी जानकारी; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लगाई मुहर

नेशनल डेस्क (बेबाक24): भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर यानी संसद से एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक खबर आ रही है। संसद का आगामी मॉनसून सत्र 20 जुलाई 2026 से आधिकारिक तौर पर शुरू होने जा रहा है। यह सत्र अगले महीने 13 अगस्त 2026 तक चलेगा, जिसमें सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पटल पर रखने और पारित कराने की तैयारी में है।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री (Union Minister of Parliamentary Affairs) किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए पूरे देश को इस बात की आधिकारिक जानकारी दी।

1. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंज़ूरी; 13 अगस्त तक चलेगा विधायी कामकाज

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने देश के विधायी रोडमैप और संसदीय प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए अपनी पोस्ट में लिखा:

किरेन रिजिजू (केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री): "भारत सरकार की विधिवत सिफ़ारिश पर, आदरणीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) का आगामी मॉनसून सत्र बुलाने के प्रस्ताव को अपनी संवैधानिक मंज़ूरी दे दी है।"

उन्होंने आगे बताया कि यह सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक पूरी तरह सक्रिय रहेगा। इस लगभग 24 दिनों के लंबे सत्र के दौरान सरकार को उम्मीद है कि राष्ट्रीय महत्व के कई संवेदनशील और आवश्यक मुद्दों पर दोनों सदनों में सार्थक बहस, लोकतांत्रिक चर्चा और बड़े विधायी निर्णय लिए जाएंगे।

2. पिछले साल की तुलना में एक दिन पहले आगाज़

संसदीय आंकड़ों और रिकॉर्ड्स पर नज़र डालें तो इस बार का शेड्यूल लगभग पिछले साल जैसा ही रखा गया है। पिछले वर्ष यानी 2025 में संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हुआ था, जबकि इस बार चालू वर्ष 2026 में यह सत्र ठीक एक दिन पहले यानी 20 जुलाई से अपनी विधायी यात्रा शुरू करने जा रहा है।

बेबाक24 टेक

संसद के किसी भी सत्र का समय पर शुरू होना लोकतंत्र की जीवंतता के लिए बेहद आवश्यक है, लेकिन इस बार का मॉनसून सत्र राजनीतिक और रणनीतिक रूप से बेहद गर्म होने वाला है। हाल ही में देश के भीतर यूएपीए (UAPA) के तहत 23 आतंकवादियों को ब्लैकलिस्ट किए जाने का बड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा हो, या फिर वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संघर्ष और महंगाई-रोजगार के मोर्चे पर घरेलू चुनौतियां— विपक्ष इस बार सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहेगा। किरेन रिजिजू द्वारा "सार्थक बहस और चर्चा" की उम्मीद जताना संसदीय मर्यादा के अनुकूल है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि संसद का यह पटल हंगामे की भेंट चढ़ने से तभी बच सकता है जब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों राष्ट्रीय हितों पर एक साथ बैठें।

'बेबाक24' का मानना है कि 20 जुलाई से 13 अगस्त के बीच का यह समय देश के आर्थिक और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कई दूरगामी कानून बनाने का गवाह बन सकता है। पिछले बजट (UP Mega Budget) के बाद देश में चल रहे विकास कार्यों और केंद्रीय योजनाओं की प्रगति पर इस सत्र में तीखे सवाल-जवाब होने तय हैं। अब देखना यह होगा कि 24 दिनों के इस विधायी सफर में जनता के असली मुद्दों पर कितनी 'बेबाक' चर्चा होती है और कितने महत्वपूर्ण बिल कानून की शक्ल अख्तियार कर पाते हैं।



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