by admin@bebak24.com on | 2026-07-03 19:32:07
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बिजनेस & ऑटो डेस्क (बेबाक24): भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने (Ethanol Blending) को लेकर वाहन मालिकों और विशेषज्ञों के बीच छिड़ी तीखी बहस के बीच केंद्र सरकार का आधिकारिक बयान सामने आया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के कारण गाड़ियों के इंजन खराब होने और उनकी रफ्तार व परफॉर्मेंस कम होने की आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।
उन्होंने एक बड़ा तर्क देते हुए कहा कि दुनिया भर में हाई-परफॉर्मेंस वाली रेसिंग कारों में इथेनॉल का पूरी सफलता के साथ इस्तेमाल हो रहा है, जो यह साबित करता है कि यह ईंधन इंजनों के लिए सुरक्षित और प्रभावी है।
पेट्रोलियम मंत्री ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 फ़्यूल) को लेकर फैले नैरेटिव पर सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने इसके फायदों को रेखांकित करते हुए निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
रफ्तार और परफॉर्मेंस में सुधार: हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि रेसिंग कारों में इथेनॉल का इस्तेमाल बहुत अच्छे नतीजे दे रहा है। यह जैव ईंधन (Biofuel) इंजन की क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ वाहनों के ओवरऑल प्रदर्शन को और बेहतर बनाता है।
उच्च स्तर के मिश्रण की नीति: सरकार इन सकारात्मक नतीजों को देखते हुए पेट्रोल में उच्च स्तर के जैव ईंधन मिश्रण (Higher Biofuel Blending) की नीति पर तेजी से आगे बढ़ रही है, ताकि कच्चे तेल पर निर्भरता को कम किया जा सके।
वाहन चालकों की सबसे बड़ी शिकायत यह रही है कि इथेनॉल वाले पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है। इस पर पेट्रोलियम मंत्री ने व्यावहारिक रुख अपनाया:
हल्की कमी संभव: उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मामलों में इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण वाहनों के माइलेज में हल्की गिरावट आ सकती है।
अन्य कारक भी जिम्मेदार: हालांकि, उन्होंने साफ किया कि माइलेज कम होने के पीछे सिर्फ इथेनॉल इकलौता कारण नहीं है; इसके पीछे गाड़ी के रखरखाव, ड्राइविंग पैटर्न और ट्रैफ़िक जैसे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने इथेनॉल ब्लेंडिंग को भारत के लिए क्यों जरूरी बताया, इसे भी समझना जरूरी है:
मिडिल ईस्ट संकट का असर: मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ रहा है। इसका सीधा नुकसान घरेलू सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को उठाना पड़ रहा है और उन पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ गया है। ऐसे में इथेनॉल एक बेहतरीन स्वदेशी विकल्प है।
बाजार में सबके लिए जगह: बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते दबदबे और बायो-फ़्यूल के बीच टकराव के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार इतना बड़ा है कि यहाँ ईवी और बायो-फ़्यूल (इथेनॉल/फ्लैक्स फ़्यूल) आधारित वाहनों, दोनों के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है।
पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर आम जनता और ऑटोमोबाइल सेक्टर में डर का माहौल है, जिसे पेट्रोलियम मंत्री ने रेसिंग कारों का उदाहरण देकर शांत करने की कोशिश की है। तकनीकी रूप से देखें तो इथेनॉल का ऑक्टेन नंबर (Octane Number) अधिक होता है, जिससे इंजन का 'नॉकिंग' इफेक्ट कम होता है और परफॉर्मेंस बेहतर होती है— जैसा कि रेसिंग कारों में देखा जाता है। लेकिन यहाँ सरकार को एक बेबाक कड़वा सच भी स्वीकारना होगा; रेसिंग कारों के इंजन विशेष रूप से 100% इथेनॉल या हाई-ब्लेंड के लिए ही डिजाइन किए जाते हैं। इसके विपरीत, भारत की सड़कों पर चल रही करोड़ों पुरानी गाड़ियां (BS-4 या उससे पहले की) केवल शुद्ध पेट्रोल के लिए बनी थीं। इथेनॉल की 'जल-शोषक' (Moisture Absorbing) प्रकृति के कारण पुरानी गाड़ियों के फ्यूल पाइप और इंजन के हिस्सों में जंग लगने की शिकायतें पूरी तरह गलत नहीं हैं।
'बेबाक24' का मानना है कि सरकार का 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य पर्यावरण और कच्चे तेल के आयात बिल को कम करने के लिहाज से 100% सही और मास्टरस्ट्रोक है, लेकिन कार कंपनियों को भी अब अपने इंजनों को पूरी तरह 'इथेनॉल कंप्लायंट' बनाना होगा। मंत्री जी का यह कबूलनामा कि माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, उपभोक्ताओं के प्रति पारदर्शिता को दिखाता है। अब चुनौती यह है कि सरकार तेल कंपनियों पर पड़ रहे वित्तीय बोझ को कम करने के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाए कि उनके पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतें और इथेनॉल का मिश्रण उनकी जेब और गाड़ी के इंजन, दोनों पर भारी नहीं पड़ेगा।
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