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"विदेशी हस्तक्षेप से नहीं आएगी शांति" — बहरीन में अमेरिकी 'सेंटकॉम' के सम्मेलन पर भड़के ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची

by on | 2026-07-03 09:07:07

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"विदेशी हस्तक्षेप से नहीं आएगी शांति" — बहरीन में अमेरिकी 'सेंटकॉम' के सम्मेलन पर भड़के ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची

अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या के बाद सुलग रही प्रतिशोध की आग के बीच अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची (Abbas Araghchi) ने बहरीन में अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) द्वारा आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन की कड़ी आलोचना करते हुए अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है।

अराग़ची ने साफ लफ्जों में खारिज किया है कि पश्चिमी मुल्कों या अमेरिकी सेना का दखल पश्चिम एशिया में किसी भी तरह की स्थिरता ला सकता है।

1. "सेंटकॉम ने सुरक्षा दी या असुरक्षा? जवाब साफ है" — अराग़ची

बीबीसी की फारसी सेवा के मुताबिक, विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने अमेरिकी सैन्य योजनाओं को क्षेत्र की शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।

अमेरिकी सेंट्रल कमान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा:

  • विदेशी हस्तक्षेप नामंजूर: "अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) ने हमारे क्षेत्र में सुरक्षा पैदा की है या असुरक्षा? इसका जवाब बिल्कुल साफ और शीशे की तरह वाज़ेह है। हमारे क्षेत्र में शांति तभी स्थाई होगी जब वह व्यापक, समावेशी हो और उसमें किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप न हो।"

  • ईरानी सेना सक्षम: अराग़ची ने गर्व से कहा कि ईरान की ताकतवर सशस्त्र सेनाओं ने बार-बार यह साबित किया है कि विदेशी ताकतें खुद अपनी सुरक्षा करने में भी सक्षम नहीं हैं, तो वे मिडिल ईस्ट को क्या सुरक्षा देंगी।

2. होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में बढ़ा टकराव, सीजफायर खतरे में

यह कूटनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब कतर (दोहा) में चल रही बैक-चैनल वार्ताओं के बावजूद जमीन और समुद्र में युद्धविराम (Ceasefire) के उल्लंघन की खबरें लगातार आ रही हैं:

  • मालवाहक जहाज पर हमला: पिछले दिनों होर्मुज़ स्ट्रेट में एक कमर्शियल मालवाहक जहाज पर हुए हमले के बाद अमेरिका और ईरान की सेनाओं ने एक-दूसरे के ठिकानों पर सीधे हमले किए थे।

  • टैंकरों को नई चेतावनी: इस सैन्य झड़प के ठीक एक सप्ताह बाद, ईरान ने एक बार फिर होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों और जहाजों को सख्त चेतावनी जारी की है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति (Oil Supply) पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

बेबाक24 टेक

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची का बहरीन सम्मेलन को लेकर दिया गया यह बयान ईरान की उस पारंपरिक 'क्षेत्रीय संप्रभुता' वाली नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह खाड़ी देशों से अमेरिकी सैन्य अड्डों को उखाड़ फेंकना चाहता है। लेकिन इस समय टाइमिंग बेहद संवेदनशील है। 4 से 8 जुलाई के बीच होने वाले दिवंगत सर्वोच्च नेता ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार से ठीक पहले, ईरान अपनी जनता और क्षेत्रीय समर्थकों (हूती और हिजबुल्लाह) को यह संदेश देना चाहता है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे रत्ती भर भी झुकने को तैयार नहीं है।

'बेबाक24' इस घटनाक्रम में दोहा की शांति वार्ता और जमीनी हकीकत के बीच के तीखे विरोधाभास को देख रहा है। एक तरफ कतर में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार बैठकर 60 दिनों के सीजफायर को बचाने का 'सकारात्मक' नाटक कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ होर्मुज़ स्ट्रेट में दोनों देशों की नौसेनाएं एक-दूसरे पर मिसाइलें दाग रही हैं। होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया का वह सबसे संवेदनशील समुद्री गला (Chokepoint) है जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है। ईरान द्वारा तेल टैंकरों को दी गई यह ताजा चेतावनी असल में अमेरिकी 'सेंटकॉम' के बहरीन सम्मेलन का सीधा जवाब है। ईरान अमेरिका को यह बताना चाहता है कि अगर उसकी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था (फ्रीज फंड्स) को कतर वार्ता में तवज्जो नहीं मिली, तो वह पूरी दुनिया की एनर्जी सप्लाई लाइन को चोक कर देगा। भारत के लिहाज से यह बेहद चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा इसी मार्ग पर निर्भर है। डोनाल्ड ट्रंप की 'दबाव और सौदा' नीति की असली परीक्षा अब होर्मुज़ के इन्हीं अशांत पानी में होने वाली है।



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