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ट्रंप का बड़ा दावा: अमेरिका-ईरान अप्रत्यक्ष वार्ता में 'सकारात्मक' प्रगति, पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता लाई रंग

by on | 2026-07-02 16:07:02

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ट्रंप का बड़ा दावा: अमेरिका-ईरान अप्रत्यक्ष वार्ता में 'सकारात्मक' प्रगति, पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता लाई रंग

अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य तनाव और हिंसक टकराव के बीच एक बड़ी और राहत भरी कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को पुष्टि की है कि कतर की राजधानी दोहा में ईरान के साथ चल रही अमेरिका की अप्रत्यक्ष तकनीकी वार्ता (Indirect Technical Talks) में 'सकारात्मक' प्रगति हुई है।

नॉर्थ डकोटा में 'फ्रीडम 250' कार्यक्रम और थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन के लिए रवाना होने से पहले संयुक्त बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने इस बातचीत को लेकर काफी उम्मीदें जताईं। इस पूरी बातचीत में कतर और पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ (Mediators) की भूमिका निभा रहे हैं, जो दक्षिण एशियाई कूटनीति के लिहाज से एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ है।

1. "परमाणु कार्यक्रम को घटाने (Denuclearization) की दिशा सही" — ट्रंप

हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच हुए भारी मिसाइल हमलों और टकराव के बाद स्विट्जरलैंड के लेक लुसर्न समिट में एक शुरुआती सहमति पत्र (MoU) तैयार हुआ था। उसी को आगे बढ़ाते हुए दोहा में यह तकनीकी स्तर की बातचीत चल रही है।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा:

  • सकारात्मक बैठकें: "दोनों पक्षों के बीच बहुत अच्छी और सकारात्मक बैठकें हुई हैं। हम देखेंगे कि आगे क्या होता है।"

  • परमाणु कार्यक्रम पर प्रगति: ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने और उसे असैन्य (Denuclearization की ओर) रखने की प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • दबाव की नीति भी जारी: ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका ने ईरान पर चौतरफा कड़ा प्रतिबंधात्मक और सैन्य दबाव भी बनाए रखा है, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर बने हुए हैं, जो कि एक अच्छा संकेत है।

2. क्या हैं दोहा वार्ता के मुख्य बिंदु?

इस अप्रत्यक्ष वार्ता में कतर और पाकिस्तान के राजनयिक दोनों पक्षों (अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और ईरानी उप-विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी) के बीच संदेशवाहक का काम कर रहे हैं। इस बातचीत के एजेंडे में ये मुख्य मुद्दे शामिल हैं:

  • होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) का संकट: ईरान ने 60 दिनों के युद्धविराम समझौते के तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग से जहाजों को बिना किसी शुल्क के गुजरने देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वह इस पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। अमेरिकी वार्ताकार चाहते हैं कि ईरान इस मार्ग पर कोई मनमाना टोल या टैक्स न वसूले।

  • सीजफायर उल्लंघन रोकने के लिए हॉटलाइन: बैठक के बाद ईरानी पक्ष ने बताया कि दोनों देश इस शुरुआती समझौते (MoU) के उल्लंघनों को रिकॉर्ड करने और रिपोर्ट करने के लिए एक सीधा कम्युनिकेशन चैनल (हॉटलाइन) स्थापित करने पर सहमत हो गए हैं।

  • फ्रीज फंड्स का इस्तेमाल: बातचीत में कतर के सेंट्रल बैंक में फंसे ईरान के 6 अरब डॉलर के तेल राजस्व के एक हिस्से को जारी करने पर भी चर्चा हुई है, जिससे ईरान अपनी जरूरत का मानवीय सामान खरीद सकेगा।

बेबाक24 टेक

डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति हमेशा से 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) और 'सौदा करने की कला' (Art of the Deal) का मिश्रण रही है। एक तरफ जहां अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान पर हाल ही में बेहद सख्त हमले किए थे, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन ने बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए। ट्रंप का यह बयान कि "हमने उन्हें बहुत बुरी तरह हिट किया... लेकिन हमारी बातचीत बहुत अच्छी चल रही है", उनके इसी अनूठे कूटनीतिक अंदाज को दिखाता है।

इस पूरे घटनाक्रम में 'बेबाक24' के पाठकों के लिए सबसे गौर करने वाली बात पाकिस्तान और कतर की बढ़ती रणनीतिक भूमिका है। जहां भारत इस पूरे संकट में 'रणनीतिक स्वायत्तता' के नाम पर बेहद सतर्क और चुप है, वहीं पाकिस्तान ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर अमेरिका और ईरान जैसे दो कट्टर दुश्मनों के बीच खुद को एक अनिवार्य मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर लिया है। अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान में मचे आंतरिक संकट के बीच, यदि यह 60 दिनों का युद्धविराम एक स्थायी शांति समझौते में बदल जाता है, तो इसका सीधा आर्थिक फायदा भारत को भी होगा क्योंकि होर्मुज़ स्ट्रेट से हमारे ऊर्जा आयात (कच्चा तेल और गैस) का रास्ता सुरक्षित हो जाएगा। हालांकि, कूटनीतिक बिसात पर पाकिस्तान का यह बढ़ता कद नई दिल्ली के लिए आने वाले समय में एक नई रणनीतिक चुनौती जरूर खड़ी कर सकता है।



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