by on | 2026-07-02 16:02:42
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राष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हिंसक कूटनीति और तीखे बयानों के अखाड़े में तब्दील हो गई है। कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा के नादिया जिले स्थित स्थानीय ट्रांजिट कार्यालय पर प्रदर्शनकारियों द्वारा अंडों और पत्थरों की भारी बौछार की गई।
इस घटना के बाद राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी टीएमसी के बीच सियासी जंग छिड़ गई है। महुआ मोइत्रा ने सीधे तौर पर इस हमले के लिए बीजेपी के स्थानीय नेताओं और 'गुंडों' को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि बीजेपी इसे टीएमसी के कुशासन के खिलाफ आम जनता का स्वाभाविक आक्रोश बता रही है।
बुधवार (1 जुलाई) को राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित दफ़्तर में जब महुआ मोइत्रा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रही थीं, तभी बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। महुआ मोइत्रा ने इमारत की ऊपरी मंजिल से वीडियो शूट कर सोशल मीडिया पर साझा किया और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सांसद को भी लगी चोट: महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि दफ्तर की खिड़कियों और कांच पर न सिर्फ अंडे और टमाटर फेंके गए, बल्कि भारी पत्थरबाजी भी हुई, जिसमें से एक पत्थर उन्हें भी लगा।
पुलिस की चुप्पी पर घेरा: महुआ ने आरोप लगाया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धनाथ गुप्ता को फोन किया, लोकेशन दी, लेकिन पुलिस आने के बाद भी दो घंटे तक मूकदर्शक बनी खड़ी रही और भीड़ को नहीं हटाया।
झुकने से इनकार: महुआ मोइत्रा ने हाथ में टीएमसी का झंडा थामे हुए वीडियो जारी कर कहा, "मैं डरती नहीं हूं। मैं खड़ी रहूंगी, डटी रहूंगी। बीजेपी मुझे चुप कराने में कभी कामयाब नहीं होगी।"
इस घटना के बाद विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने एकजुट होकर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है:
अभिषेक बनर्जी (TMC): उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा डीजीपी को सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश के बाद भी पुलिस की यह चुप्पी कायरता की निशानी है। क्या बीजेपी के 'परिवर्तन' का मतलब यही था?
संजय सिंह (AAP): आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से तत्काल संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा, "बंगाल में गुंडागर्दी मची है। एक सांसद अपने क्षेत्र में सुरक्षित नहीं है। अधिकारियों को विशेषाधिकार हनन समिति के सामने बुलाया जाना चाहिए।"
कीर्ति आज़ाद व सागरिका घोष (TMC): कीर्ति आज़ाद ने तंज कसा कि बीजेपी बच्चों को खाने के लिए पौष्टिक अंडा नहीं देगी, लेकिन कार्यकर्ताओं को फेंकने के लिए दे रही है। वहीं सागरिका घोष ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला और सोची-समझी साजिश बताया।
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस घटना में पार्टी का हाथ होने से साफ इनकार किया है, लेकिन उनके बयानों में तीखापन साफ नजर आया।
स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी का विवादित बयान: पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री ने मामले को और हवा देते हुए कहा, "उन्हें भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि सिर्फ़ अंडा फेंका गया है। आगे लोग उन पर क्या-क्या फेंकने वाले हैं, ये देखिएगा। तो क्या उन पर फूल बरसाएं? अंडा फेंकने में क्या लॉ एंड ऑर्डर! उन पर आम नागरिक अंडे फेंक रहे हैं।" उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सरकार के वक्त बीजेपी अध्यक्ष पर ईंटें फेंकी गई थीं।
समित भट्टाचार्य (प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष): उन्होंने कहा कि अंडा फेंकना बंद होना चाहिए क्योंकि इससे बंगाल की छवि खराब हो रही है, लेकिन उन्होंने अंदरूनी कलह का अंदेशा जताते हुए कहा, "तृणमूल ही तृणमूल को मार रही है। किसकी जेब में अंडा है, यह देखने के लिए कोई मेटल डिटेक्टर नहीं होता। टीएमसी को खुद पता लगाना चाहिए कि कौन सा कार्यकर्ता किस नेता पर अंडा फेंक रहा है।"
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'अंडा और पत्थर' कूटनीति का प्रवेश कोई नई बात नहीं है, लेकिन एक महिला निर्वाचित जनप्रतिनिधि के दफ्तर को घेरकर इस तरह का हमला करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। महुआ मोइत्रा संसद से लेकर सड़क तक अपनी बेबाक और आक्रामक शैली के लिए जानी जाती हैं, और इस हमले के बाद उनका आक्रामक रुख और मजबूत ही हुआ है।
हैरान करने वाली बात पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी का बयान है। एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री द्वारा यह कहना कि "शुक्र मनाएं सिर्फ अंडा फेंका गया है", न केवल हिंसा को मूक सहमति देना है बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने जैसा है। यदि सत्ता पक्ष ही ऐसी घटनाओं को 'आम जनता का गुस्सा' बताकर जायज ठहराने लगेगा, तो राजनीतिक प्रतिशोध का यह चक्र कभी नहीं थमेगा।
बीजेपी अध्यक्ष समित भट्टाचार्य का यह तर्क कि यह 'टीएमसी की आपसी गुटबाजी' हो सकती है, केवल जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश है। हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद अगर स्थानीय पुलिस दो घंटे तक तमाशा देखती रही, तो डीजीपी और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। इतिहास गवाह है कि महुआ मोइत्रा जैसी नेताओं को डराकर या उन पर अंडे फिंकवाकर चुप नहीं कराया जा सकता; बल्कि ऐसी घटनाएं उन्हें पीड़ित (Victim) के रूप में स्थापित कर उनके राजनीतिक कद को और मजबूत कर देती हैं। लोकसभा अध्यक्ष को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर सांसदों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का कड़ा संदेश देना चाहिए।
यह पश्चिम बंगाल की समसामयिक राजनीतिक हिंसा और टीएमसी-बीजेपी टकराव पर आधारित एक पूरी तरह से निष्पक्ष, त्वरित और तथ्य-सत्यापित न्यूज़ रिपोर्ट है, जिसे बेबाक24 के मुख्य राष्ट्रीय पेज या राज्य राजनीति सेक्शन में तुरंत लाइव किया जा सकता है।
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