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व्हाट्सऐप यूज़रनेम फ़ीचर पर सरकार की 'ब्रेक': प्राइवेसी अपग्रेड या साइबर फ्रॉड का नया हथियार? मेटा को मिला 3 दिन का नोटिस

by admin@bebak24.com on | 2026-07-02 12:08:56

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व्हाट्सऐप यूज़रनेम फ़ीचर पर सरकार की 'ब्रेक': प्राइवेसी अपग्रेड या साइबर फ्रॉड का नया हथियार? मेटा को मिला 3 दिन का नोटिस

टेक डेस्क (बेबाक24): दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप (WhatsApp) द्वारा अपने 3 अरब से अधिक यूज़र्स के लिए पेश किए जा रहे सबसे बड़े प्राइवेसी अपग्रेड 'यूज़रनेम फ़ीचर' पर भारत सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है। भारत सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस फ़ीचर के वैश्विक रोलआउट का संज्ञान लेते हुए पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) को एक कड़ा नोटिस जारी किया है।

मंत्रालय ने मेटा को 3 दिनों के भीतर इस फ़ीचर की पूरी कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों की विस्तार से जानकारी देने का निर्देश दिया है। साथ ही साफ कहा है कि जब तक सरकार के साथ इस मामले पर पूरी कूटनीतिक और तकनीकी समीक्षा (Consultation) पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में इसे लॉन्च न किया जाए।

1. प्राइवेसी का 'सुपर टूल' या 'डिजिटल अरेस्ट' का नया रास्ता?

व्हाट्सऐप और उसकी हेड ऑफ प्रोडक्ट एलिस न्यूटन-रेक्स के मुताबिक, यह फ़ीचर यूज़र्स को इस बात पर पूरा कंट्रोल देता है कि उनका पर्सनल फोन नंबर कौन देख सकता है। विशेषकर किसी अनजान ग्रुप या नए लोगों से जुड़ते समय लोग फोन नंबर छिपाकर केवल एक 'यूनिक यूज़रनेम' के जरिए बात कर सकेंगे।

हालांकि, भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने इस प्राइवेसी टूल को लेकर गंभीर आंतरिक सुरक्षा चिंताएं और आशंकाएं जाहिर की हैं:

  • पहचान की हेराफेरी (Impersonation): फोन नंबर न दिखने के कारण जालसाजों के लिए किसी सरकारी अधिकारी, सेलिब्रिटी या नामचीन हस्ती के नाम का फर्जी यूज़रनेम बनाकर लोगों को ठगना बेहद आसान हो जाएगा।

  • साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट: देश में इस समय 'डिजिटल अरेस्ट' और फिशिंग घोटालों की बाढ़ आई हुई है। एजेंसियों को डर है कि फोन नंबर जैसी मुख्य पहचान छिप जाने से साइबर अपराधियों को ट्रैक करना बेहद मुश्किल (Untraceable) हो जाएगा।

  • सार्वजनिक डायरेक्टरी की अनुपस्थिति: व्हाट्सऐप के अनुसार, इसमें कोई पब्लिक डायरेक्टरी नहीं होगी। जब तक आपके पास किसी का सटीक यूज़रनेम नहीं होगा, आप उसे सर्च नहीं कर सकते। लेकिन स्कैमर्स इसका तोड़ निकाल सकते हैं।

2. क्या है व्हाट्सऐप 'यूज़रनेम की' (Username Key) सुरक्षा चक्र?

मेटा ने फर्जीवाड़े और स्पैम मैसेज को रोकने के लिए इस फ़ीचर में सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत (Layer) जोड़ी है, जिसे 'यूज़रनेम की' (वैकल्पिक 4 अंकों का सिक्योरिटी कोड) कहा जा रहा है:

  • कैसे काम करेगा यह पिन (PIN): यदि आपने इस सुरक्षा कोड को ऑन किया है, तो कोई भी अनजान व्यक्ति केवल आपका यूज़रनेम जानकर आपको मैसेज नहीं भेज पाएगा। उसे मैसेज भेजने के लिए यूज़रनेम के साथ व्हाट्सऐप द्वारा जनरेट किया गया 4 अंकों का सटीक सिक्योरिटी कोड भी डालना होगा।

  • नाबालिगों के लिए डिफ़ॉल्ट सुरक्षा: यदि किसी यूज़र का मेटा अकाउंट (फेसबुक/इंस्टाग्राम) लिंक है और उसमें उम्र 18 साल से कम है, तो उनकी सुरक्षा के लिए यह 'यूज़रनेम की' डिफ़ॉल्ट रूप से हमेशा चालू रहेगी।

किन्हें इस पिन (Key) की जरूरत नहीं होगी?

  • जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर पहले से सेव है।

  • जिनसे आपकी पहले से चैट चल रही है या जो आपके साथ किसी कॉमन ग्रुप में हैं।

  • जिन्होंने आपका आधिकारिक QR कोड स्कैन किया है।

3. मौजूदा इंस्टाग्राम और फेसबुक यूज़र्स को मिलेगी प्राथमिकता

पहचान की चोरी को रोकने के लिए व्हाट्सऐप ने एक 'रिजर्वेशन पीरियड' शुरू किया है। इसके तहत सेलिब्रिटीज, पब्लिक फिगर्स और सरकारी संस्थाओं के हाई-प्रोफाइल यूज़रनेम स्थायी रूप से ब्लॉक (सुरक्षित) कर दिए गए हैं ताकि कोई और उन्हें क्लेम न कर सके। साथ ही, कंटेंट क्रिएटर्स और छोटे बिजनेसेस अपनी ऑनलाइन पहचान एक जैसी रख सकें, इसके लिए वे अपने मौजूदा इंस्टाग्राम या फेसबुक यूज़रनेम को ही व्हाट्सऐप पर क्लेम कर सकेंगे। यूज़र इसे मोबाइल डिवाइस में Settings > Account > Username पर जाकर रिजर्व कर सकते हैं।

बेबाक24 टेक

इसमें कोई दो राय नहीं है कि उपभोक्ता के नजरिए से व्हाट्सऐप का यूज़रनेम फ़ीचर प्राइवेसी के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है। सिग्नल और टेलीग्राम जैसे प्रतिद्वंदी ऐप्स सालों से इस फीचर के जरिए प्राइवेसी का फायदा उठा रहे हैं। किसी अनजान पैरेंट्स ग्रुप या व्यावसायिक डील में अपना पर्सनल नंबर दिए बिना केवल हैंडल साझा करना महिलाओं और आम यूज़र्स की गोपनीयता को मजबूत करता है।

लेकिन भारत जैसे देश में, जहां रोजाना हजारों लोग टेलीग्राम और व्हाट्सऐप पर 'डिजिटल अरेस्ट' और 'वर्क फ्रॉम होम' के नाम पर करोड़ों रुपये गंवा रहे हैं, वहां सरकार का यह दखल पूरी तरह से तार्किक और बेबाक है। भारत में जब आधार कार्ड (Aadhaar Card) और फोन नंबर को आपस में लिंक करके सिम कार्ड जारी किए जाते हैं, ताकि हर डिजिटल पहचान की जवाबदेही तय हो सके, ऐसे में व्हाट्सऐप द्वारा अचानक फोन नंबर को छिपा देना जांच एजेंसियों के हाथ-पांव बांधने जैसा है।

मेटा की '4-डिजिट सिक्योरिटी की' की योजना कागजों पर तो सुरक्षित दिखती है, लेकिन डार्क वेब और एआई (AI) के दौर में स्कैमर्स इस पिन को भी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए हासिल करने का रास्ता ढूंढ लेंगे। भारत सरकार का तीन दिनों का यह अल्टीमेटम मेटा को यह साफ संदेश है कि भारत के 50 करोड़ से ज्यादा व्हाट्सऐप यूज़र्स के बाजार में बने रहने के लिए उन्हें 'यूज़र प्राइवेसी' और 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के बीच एक ऐसा संतुलन बनाना होगा, जहां कानून तोड़ने वालों को छिपाने के लिए प्राइवेसी की आड़ न ली जा सके।



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