by admin@bebak24.com on | 2026-07-01 11:02:54
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अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर जारी विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने भारत को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है।
डार ने कहा कि पाकिस्तान, भारत के साथ कोई सीधा टकराव नहीं चाहता, लेकिन संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से के जल संसाधनों को रोकने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को 'युद्ध जैसी कार्रवाई' (Act of War) माना जाएगा। दूसरी ओर, भारत अपने कड़े रुख पर कायम है और कश्मीर से लेकर हिमाचल तक नदियों के रुख को मोड़ने की महा-परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया गया है।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इसहाक डार ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) के पुराने रुख को दोहराते हुए भारत के कदमों को 'रणनीतिक खतरा' बताया।
निलंबन का कोई कानूनी आधार नहीं: डार ने कहा कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को एकतरफा रूप से निलंबित करने का न तो कोई कानूनी आधार है और न ही अंतरराष्ट्रीय कानून में इसकी कोई गुंजाइश है। द हेग स्थित मध्यस्थता अदालत (Court of Arbitration) भी भारत के इस कदम को गलत ठहरा चुकी है।
पानी को हथियार न बनाए भारत: डार ने चेतावनी देते हुए कहा, "पानी पाकिस्तान के 25 करोड़ से अधिक लोगों की जिंदगी, कृषि और आर्थिक सुरक्षा का आधार है। साझा जल संसाधनों को हथियार की तरह इस्तेमाल करना बंद होना चाहिए। पानी रोकने की कोई भी कोशिश क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को खतरे में डाल देगी।"
इसी सेमिनार में पाकिस्तान के इंडस वाटर कमिश्नर सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने खुलासा किया कि वे चिनाब नदी के प्रवाह में आ रहे असामान्य उतार-चढ़ाव को लेकर भारत को चार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन नई दिल्ली की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है।
पाकिस्तान की इस ताजा छटपटाहट के पीछे भारत की वह महत्वाकांक्षी जल परियोजना है, जिसने इस्लामाबाद के होश उड़ा दिए हैं। भारत ने हाल ही में 2,620 करोड़ रुपये की लागत वाली चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना की घोषणा की है:
क्या है प्रोजेक्ट: इसके तहत हिमाचल प्रदेश के कोकसार इलाके में 8.7 किलोमीटर लंबी एक विशाल टनल (सुरंग) बनाई जाएगी, जो चंद्रा (चिनाब) नदी के अतिरिक्त लगभग 19 लाख एकड़ फीट पानी का रुख मोड़कर भारत की ब्यास नहर प्रणाली में डाल देगी।
टेंडर जारी: भारत की सरकारी संस्था नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) ने इस टनल के निर्माण के लिए बाकायदा टेंडर भी जारी कर दिए हैं। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने भी साफ कहा है कि यह परियोजना राष्ट्रीय हित में है और भारत के पानी पर पहला हक उसके अपने लोगों का है।
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत के फैसले को दरकिनार करते हुए भारत अपने फैसले पर पूरी तरह अड़ा हुआ है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 5 जून को स्पष्ट किया था कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं कर देता।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल ने कुछ सप्ताह पहले भारत के इरादे साफ करते हुए कहा था, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। हमारी हर संभव कोशिश की जा रही है कि पानी की एक बूंद भी पाकिस्तान न जाए। हम अपनी पश्चिमी नदियों की क्षमता का पूरा इस्तेमाल हाइड्रो पावर और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए करेंगे।"
1960 में हुई सिंधु जल संधि को दुनिया के सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में से एक माना जाता था, जिसने भारत-पाकिस्तान के बीच तीन युद्ध होने के बाद भी अपनी प्रासंगिकता नहीं खोई थी। लेकिन 2025 के पहलगाम हमले ने भारत के सब्र का बांध तोड़ दिया। भारत का यह कदम कूटनीति की भाषा में 'हार्ड पावर' का बेबाक प्रदर्शन है। नई दिल्ली ने साफ संदेश दे दिया है कि 'रक्त और पानी एक साथ नहीं बह सकते'।
पाकिस्तान इस समय अपनी बदहाल अर्थव्यवस्था, आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और डूरंड लाइन पर तालिबान के साथ जारी सैन्य संघर्ष से बुरी तरह घिरा हुआ है। ऐसे में उसके पास भारत को 'युद्ध जैसी कार्रवाई' की गीदड़भभकी देने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। सच यह है कि पाकिस्तान के पास भारत की 'चिनाब-ब्यास लिंक टनल' जैसी परियोजनाओं का मुकाबला करने की न तो कोई आर्थिक क्षमता है और न ही वह भारत के साथ एक और पूर्ण युद्ध झेलने की स्थिति में है।
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत के फैसलों को ठेंगा दिखाकर भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी संप्रभुता और आक्रामक कूटनीति को रेखांकित किया है। यदि भारत सफलतापूर्वक चिनाब और झेलम के पानी को पूरी तरह नियंत्रित करने में कामयाब रहता है, तो यह पाकिस्तान की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा 'वाटर बॉम्ब' (जल बम) साबित होगा। भारत का यह बेबाक रुख दिखाता है कि अब आतंकवाद का जवाब केवल सेना की गोलियों से नहीं, बल्कि प्यास की रणनीतिक घेराबंदी से भी दिया जाएगा।
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