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जनरल धीरज सेठ बने भारत के 31वें थल सेना प्रमुख; रेगिस्तान से लेकर कश्मीर तक का है लंबा अनुभव, आर्मर्ड कोर से 29 साल बाद मिला नेतृत्व

by admin@bebak24.com on | 2026-07-01 10:31:34

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जनरल धीरज सेठ बने भारत के 31वें थल सेना प्रमुख; रेगिस्तान से लेकर कश्मीर तक का है लंबा अनुभव, आर्मर्ड कोर से 29 साल बाद मिला नेतृत्व

राष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): भारतीय सेना में मंगलवार (30 जून, 2026) को एक बड़े और ऐतिहासिक नेतृत्व परिवर्तन के तहत जनरल धीरज सेठ ने भारत के नए थल सेना प्रमुख (Chief of the Army Staff - COAS) की कमान संभाल ली है। वह भारतीय सेना के 31वें आर्मी चीफ बने हैं।

जनरल सेठ ने जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह ली है, जो सेना में 40 साल से अधिक की शानदार और बेदाग सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त (Retire) हो गए हैं। आर्मी चीफ का पद संभालने से पहले जनरल सेठ अप्रैल 2026 से वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (VCOAS) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

1. मिलिट्री परिवार से गहरा नाता और ऐतिहासिक आर्मर्ड कोर बैकग्राउंड

द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल धीरज सेठ का परिवार भारतीय सैन्य इतिहास में एक जाना-माना नाम है:

  • पिता का गौरव: उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल केएम सेठ 1997 में सेना के एडजुटेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि जब उनके पिता रिटायर हुए, तब जनरल धीरज सेठ स्वयं सेना में कैप्टन के रूप में सेवा दे रहे थे।

  • भाई नौसेना में फ्लैग ऑफिसर: उनके भाई रियर एडमिरल रविनीश सेठ भारतीय नौसेना (Indian Navy) में फ्लैग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, जो इस परिवार के देश सेवा के जज्बे को दिखाता है।

  • 29 साल बाद आर्मर्ड कोर से चीफ: जनरल सेठ साल 1997 में जनरल शंकर रॉय चौधरी के सेवानिवृत्त होने के बाद पहले ऐसे सेना प्रमुख हैं जो आर्मर्ड कोर (टैंक रेजिमेंट) से आते हैं

2. रेगिस्तान से लेकर कश्मीर तक: कमान संभालने का बेजोड़ अनुभव

रक्षा मंत्रालय (PIB) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, जनरल सेठ के पास करीब चार दशक (40 साल) लंबे करियर में परिचालन (Operations) और रणनीति का व्यापक अनुभव है:

  • रेगिस्तान और पश्चिमी मोर्चा: उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक आर्मर्ड रेजिमेंट और पश्चिमी मोर्चे पर एक पूरी आर्मर्ड ब्रिगेड का सफल नेतृत्व किया है।

  • कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी: जम्मू-कश्मीर के अशांत और चुनौतीपूर्ण माहौल में उन्होंने आतंकवाद विरोधी बल (Counter-Insurgency Force) की कमान संभाली।

  • सुदर्शन चक्र कोर: लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की सबसे घातक स्ट्राइक फॉर्मेशन में से एक, सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व किया।

  • दो परिचालन कमानों के प्रमुख: आर्मी कमांडर के पद पर प्रमोट होने के बाद उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान दोनों का नेतृत्व किया। ढाई साल से अधिक समय तक दो अलग-अलग परिचालन कमानों की रणनीतिक निगरानी करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

3. सेना के आधुनिकीकरण और भविष्य के युद्ध के विशेषज्ञ

जनरल धीरज सेठ को केवल मैदानी जंग का ही नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य तकनीकों और रणनीतिक आधुनिकीकरण का विशेषज्ञ माना जाता है:

  • अंतरराष्ट्रीय अनुभव: वह नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), खड़कवासला, हायर कमांड कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज के स्नातक हैं। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस के पेरिस में प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी पूरा किया है।

  • सैन्य सुधार: सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना और क्षमता विकास के महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने भारतीय सेना के दीर्घकालिक ढांचे को आकार देने और नई तकनीकों को शामिल करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है।

  • सम्मान: उनकी असाधारण सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से नवाजा जा चुका है।

4. "जनरल सेठ एक सक्षम और अनुभवी नेता" — जनरल उपेंद्र द्विवेदी

पद छोड़ते समय निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भावुक और बेबाक विदाई संदेश दिया। उन्होंने कहा, "भारतीय सेना की ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि उसके बहादुर सैनिकों, कमांडरों और देशवासियों के अटूट विश्वास में निहित है। पिछले दो सालों में सेना ने हर मोर्चे पर अपनी सतर्कता और संतुलन बनाए रखा और तीनों सेनाओं (थल, नभ और जल) ने बेहतर तालमेल के साथ काम किया।"

नए प्रमुख को जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि जनरल धीरज सेठ के सक्षम नेतृत्व में भारतीय सेना पेशेवर उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों को छुएगी।

बेबाक24 टेक

जनरल धीरज सेठ का भारत का नया थल सेना प्रमुख बनना ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ जहां चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, वहीं दूसरी तरफ डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी हालिया हवाई व जमीनी जंग ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। ऐसे माहौल में आर्मर्ड कोर (टैंक और बख्तरबंद कमान) के एक रणनीतिकार का सेना प्रमुख बनना भारत की आक्रामक रक्षा नीति का संकेत है।

जनरल सेठ की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उन्होंने कश्मीर के पहाड़ों में आतंकवाद का मुकाबला भी किया है और राजस्थान व पश्चिमी मोर्चे के रेगिस्तानों में टैंक कमान भी संभाली है। इसके अलावा, फ्रांस से उच्च सैन्य प्रशिक्षण और सेना मुख्यालय में आधुनिकीकरण विंग को संभालने का उनका अनुभव भारतीय सेना को 'थिएटर कमान' (तीनों सेनाओं के एकीकरण) की दिशा में आगे बढ़ाने में सबसे मददगार साबित होगा। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जो मजबूत और आधुनिक सेना उन्हें सौंपी है, उसे तकनीकी रूप से और अधिक 'फ्यूचर-रेडी' (भविष्य के युद्धों के अनुकूल) बनाना नए जनरल की सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता होगी।



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