by admin@bebak24.com on | 2026-06-30 12:42:28
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नई दिल्ली (बेबाक24): देश की चुनावी प्रक्रिया, निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और राजनीतिक शुचिता को लेकर देश के समूचे विपक्ष ने एक सुर में न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर पर दस्तक दी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि 23 प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद के हस्ताक्षर वाला एक साझा संयुक्त पत्र भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को भेजा गया है।
इस संयुक्त पत्र के जरिए विपक्ष ने चुनाव आयोग की विवादित 'एसआईआर (SIR) प्रक्रिया' और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे देश की सियासी सरगर्मी अचानक काफी बढ़ गई है।
जयराम रमेश ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (X) पर इस पत्र की पृष्ठभूमि साझा करते हुए कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं को बचाने के लिए पूरी तरह एकजुट है।
8 जून की बैठक: आज से करीब तीन हफ्ते पहले, 8 जून 2026 को विपक्षी 'इंडिया जनबंधन' (India Janbandhan) की एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में 21 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने हिस्सा लिया था।
सहमति: इसी बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास किया गया था कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेषकर एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ देश के मुख्य न्यायाधीश को एक आधिकारिक और कानूनी तौर पर हस्ताक्षरित साझा पत्र भेजा जाएगा।
संख्या में बढ़ोतरी: जयराम रमेश के मुताबिक, 8 जून को भले ही 21 दल बैठक में थे, लेकिन आज जब यह पत्र सीजेआई सूर्यकांत को सौंपा गया, तब तक इस पर हस्ताक्षर करने वाले दलों की संख्या बढ़कर 23 हो चुकी थी। उन्होंने जोर देकर कहा, "विपक्षी दल एकजुटता, एकता और प्रतिरोध के सिद्धांतों पर मजबूती से कायम हैं।"
जयराम रमेश की इस घोषणा के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी और एक बड़ा दावा किया।
दो बड़ी पार्टियों की एंट्री: डेरेक ओ ब्रायन ने दावा किया कि सीजेआई को भेजे गए इस ऐतिहासिक पत्र पर आम आदमी पार्टी (AAP) और तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके (DMK) की ओर से भी आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
बैठक से बनाई थी दूरी: गौरतलब है कि 'आप' और 'डीएमके' दोनों ही पार्टियां 8 जून को हुई विपक्षी गठबंधन की उस मुख्य बैठक में शामिल नहीं हुई थीं, जिसके बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि, इन दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने इस साझा पत्र पर हस्ताक्षर करने के दावों पर अब तक अपनी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं दी है।
यद्यपि जयराम रमेश ने पत्र के सभी कानूनी बिंदुओं को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि मुख्य फोकस निम्नलिखित मुद्दों पर है:
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया: हालिया चुनावों के दौरान चुनाव आयोग द्वारा लागू की गई इस तकनीकी/प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर विपक्ष को गहरी आपत्ति है।
निर्वाचन आयोग की भूमिका: विपक्ष का लगातार यह आरोप रहा है कि चुनाव आयोग सत्तापक्ष के दबाव में एकतरफा काम कर रहा है और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो रही है।
चुनावी सुधार: मतपत्रों, ईवीएम प्रबंधन या काउंटिंग नियमों से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं को भी इस पत्र के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया है।
विपक्ष द्वारा सीधे देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को इस तरह का संयुक्त पत्र लिखना यह दिखाता है कि देश की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों का अब चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर से भरोसा लगभग उठ चुका है या बेहद कम हो गया है। 8 जून की बैठक के बाद करीब 22 दिनों का वक्त लेकर 23 दलों के हस्ताक्षर जुटाना यह साफ करता है कि इस पत्र का मसौदा (Draft) बेहद सोच-समझकर और कानूनी विशेषज्ञों की राय के बाद तैयार किया गया है, ताकि इसे केवल एक राजनीतिक बयानबाजी न मानकर सुप्रीम कोर्ट इस पर संज्ञान (Cognizance) ले।
राजनीतिक रूप से देखें तो, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन द्वारा 'आप' और 'डीएमके' के शामिल होने का दावा करना विपक्ष के लिए एक बड़ी राहत और संजीवनी है। अगर चुनाव के बाद 'आप' और 'डीएमके' जैसी पार्टियां दोबारा इस साझा एजेंडे पर कांग्रेस के साथ खड़ी हो रही हैं, तो यह 'इंडिया जनबंधन' के भविष्य के लिए एक मजबूत संकेत है। असली पेंच अब यह देखना होगा कि सीजेआई सूर्यकांत इस पत्र को किस तरह लेते हैं— क्या वह इसे एक प्रशासनिक शिकायत मानकर चुनाव आयोग को भेजेंगे, या फिर चुनावी शुचिता की रक्षा के लिए इस पर सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष पीठ (Bench) गठित कर खुली सुनवाई का आदेश देंगे। न्यायपालिका का अगला कदम भारतीय लोकतंत्र और आगामी राज्य विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक होने वाला है।
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